नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (16 दिसंबर) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी के ख़िलाफ़ नेशनल हेराल्ड मामले में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत को खारिज कर दिया.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी की शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यह मामला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर की गई निजी शिकायत पर आधारित है, न कि किसी एफआईआर पर.
सुनवाई के दौरान राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने कहा कि अभियोजन शिकायत एक व्यक्ति डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा धारा 200 सीआरपीसी के तहत दायर की गई शिकायत पर संज्ञान और समन आदेश पर आधारित है, न कि एफआईआर पर.
अदालत ने फैसला सुनाया कि ‘वर्तमान शिकायत का संज्ञान कानून में विचार योग्य नहीं है.’
‘पहला ऐसा मामला है जहां एजेंसी ने बिना किसी एफआईआर के मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की’
इस संबंध में पत्रकार अरविंद गुणशेखर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि नेशनल हेराल्ड मामला ईडी के इतिहास में पहला ऐसा मामला है जहां एजेंसी ने बिना किसी एफआईआर के सिर्फ एक निजी शिकायत के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की.
On whose orders, ED overruled its own ‘Technical Circular No 01/2015’ dated 14.1.2015 that clearly stated “for registering an ECIR, the requirement of FIR under Sec 154 of CrPC and its forwarding to a Magistrate under Sec 157 of CrPC is essential” ?
— Arvind Gunasekar (@arvindgunasekar) December 16, 2025
उन्होंने आगे बताया कि हालांकि पीएमएलए में 2019 में संशोधन करके इस खामी को दूर किया गया था, फिर भी यह मामला न्यायपालिका की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका.
फैसले के दौरान विशेष न्यायाधीश ने कहा, ‘धारा 3 के तहत परिभाषित और धारा 4 के तहत दंडनीय मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध से संबंधित जांच और उसके परिणामस्वरूप अभियोग शिकायत एफआईआर या अधिनियम की अनुसूची में उल्लिखित अपराध के अभाव में मान्य नहीं है.’
इसी अदालत ने यह भी कहा है कि गांधी परिवार को उस एफआईआर की प्रति प्राप्त करने का अधिकार नहीं है जो दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 3 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को रद्द करते हुए उनके खिलाफ दर्ज की थी.
यह एफआईआर ईडी की सूचना पर आधारित थी.
हालांकि, न्यायाधीश गोगने ने यह भी कहा कि आरोपियों को एफआईआर दर्ज होने की सूचना दी जा सकती है. अब जब शिकायत ही रद्द कर दी गई है, तो इस एफआईआर का क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है.
इस मामले में गांधी परिवार के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन, डोटेक्स मर्चेंडाइज और सुनील भंडारी को भी ईडी ने आरोपी बनाया था. ईडी ने दावा किया कि नेशनल हेराल्ड के पब्लिशर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की प्रॉपर्टीज पर कथित तौर पर धोखाधड़ी करके कब्जा किया गया था, जिसकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है और इससे मिली ‘अपराध की कमाई’ का इस्तेमाल यंग इंडियन नाम की कंपनी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग किया गया.
गांधी परिवार, जो कंपनी में बहुसंख्यक हिस्सेदार हैं, ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप संपत्ति के उपयोग या प्रदर्शन के बिना लगाए गए हैं.
सत्य की जीत हुई है: कांंग्रेस
कांग्रेस ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य की जीत हुई है. मोदी सरकार की दुर्भावना और गैरकानूनी गतिविधियों का पर्दाफाश हो गया है. कांग्रेस सच और नागरिकों के अधिकारों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी और किसी भी तरह के दबाव से पीछे नहीं हटेगी.
हमने बार-बार कहा है कि सत्य की जीत होगी। नेशनल हेराल्ड के केस में कुछ नहीं है- यही सच है।
सरकार इस केस को घसीट रही है। कंपनी से कोई पैसे निकाल नहीं सकता है, कोई इस्तेमाल नहीं कर सकता और कोई कुछ बेच नहीं सकता है।
ये सच न्यायपालिका समेत सभी को मालूम है। आखिर में सच सबके सामने आ… pic.twitter.com/5eg66GxgGR
— Congress (@INCIndia) December 16, 2025
पार्टी ने आगे कहा, ‘कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि न तो मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला बनता है, न अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का कोई सबूत है और न ही संपत्ति के किसी लेन-देन का प्रमाण. ये आरोप निराधार थे, जिन्हें राजनीतिक दबाव, बदनाम करने की कोशिश और प्रचार अभियान के तौर पर इस्तेमाल किया गया.’
