नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर ज़िले में सोमवार (15 दिसंबर) को संदिग्ध मिलिटेंट्स के साथ मुठभेड़ के दौरान घायल हुआ जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के एक जवान ने दम तोड़ दिया है.
मंगलवार (16 दिसंबर) की सुबह हुई फायरिंग की ताज़ा घटना में एसओजी के दो और कर्मी घायल हुए हैं.
जम्मू डिवीज़न के उधमपुर ज़िले में हुई यह मुठभेड़ पिछले तीन महीनों से कम समय में दूसरी मुठभेड़ है. वहीं इस साल यह तीसरी ऐसी घटना है जिसमें सुरक्षा बलों की जान गई है. सेना की उत्तरी कमांड का मुख्यालय होने के कारण उधमपुर बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है.
जम्मू के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) भीमसेन टुटी ने बताया कि सोमवार दोपहर एसओजी, सेना और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीम ने उधमपुर के माजल्टा क्षेत्र के सोअन गांव में सर्च ऑपरेशन शुरू किया, जिसके दौरान जोरदार मुठभेड़ शुरू हो गई.
टुटी के मुताबिक, क्षेत्र में पाकिस्तान-स्थित प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े तीन संदिग्ध आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी के बाद यह ऑपरेशन शुरू किया गया था.
जम्मू डिवीज़न का यह रणनीतिक ज़िला कठुआ के पास पड़ता है, जहां से अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से लगती है. उत्तरी कमांड के अलावा उधमपुर में कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान स्थित हैं.
आईजीपी टुटी ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आतंकियों से ‘बहुत छोटी एसओजी टीम’ की मुठभेड़ हुई, जिसमें पुंछ ज़िले के मेंढर के निवासी एसओजी जवान अमजद पठान गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई.
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती मुठभेड़ में एक आतंकी के घायल होने की भी संभावना है. संदिग्धों के भाग निकलने से रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को इलाके में भेजा गया है.
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘क्षेत्र में कड़ी घेराबंदी की गई है और सर्च ऑपरेशन जारी है.’
19 सितंबर को भी उधमपुर ज़िले के ऊपरी इलाक़े दूरू बसंतगढ़ में भारी हथियारों से लैस तीन से चार आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सेना के एक जवान की मौत हो गई थी.
24 अप्रैल को भी इसी क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर चलाए गए अभियान के दौरान सेना के एक जवान मारे गए थे.
वहीं 13 अगस्त को उत्तर कश्मीर के बारामुला ज़िले में नियंत्रण रेखा (एलओस) पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों से हुई मुठभेड़ में सेना का एक और जवान की मृत्यु हुई थी.
दिल्ली-स्थित साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के अनुसार, इस साल जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में हुए मुठभेड़ों में अब तक 17 सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है. वहीं इसी अवधि में कम से कम 46 संदिग्ध आतंकी भी मारे गए हैं.
