रिपोर्ट: लगातार तीसरे साल डोपिंग उल्लंघन मामलों में भारत शीर्ष पर, 2024 में सबसे ज़्यादा उल्लंघन

वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारत में डोपिंग से जुड़े कुल 260 उल्लंघन दर्ज किए गए, जो किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक है. इसके साथ भारत लगातार तीसरी बार दुनिया का सबसे अधिक डोपिंग उलंघन वाला देश बन गया है. वहीं फ्रांस दूसरे और इटली तीसरे स्थान पर रहा.

वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारतीय खिलाड़ी एक बार फिर डोपिंग मामलों में दुनिया में सबसे आगे पाए गए हैं. वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारत में डोपिंग से जुड़े कुल 260 उल्लंघन दर्ज किए गए, जो किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक है. 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वाडा की वेबसाइट पर मंगलवार (16 दिसंबर) को जारी इस रिपोर्ट में भारत को लगातार तीसरी बार दुनिया का सबसे बड़ा डोपिंग अपराधी देश बताया गया है.

डोपिंग के मामलों में भारत के शीर्ष पर रहने की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब भारत 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स के शताब्दी संस्करण की मेज़बानी की तैयारी कर रहा है. इसके साथ ही भारत 2036 ओलंपिक खेलों की मेज़बानी के लिए भी प्रयासरत है. 

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान बार-बार सामने आ रहे डोपिंग के मामलों पर चिंता जताई थी.

वाडा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डोपिंग से जुड़े मामलों की पॉजिटिविटी रेट 3.6 प्रतिशत रही, यानी कुल 260 मामले दर्ज किए गए, जो सभी देशों में सबसे अधिक हैं.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, खेलों की श्रेणियों में साल 2024 में एथलेटिक्स में सबसे अधिक 76 डोपिंग के मामले सामने आए. इसके बाद वेटलिफ्टिंग में 43 और कुश्ती में 29 मामले दर्ज किए गए. 

अन्य देशों में फ्रांस दूसरे स्थान पर रहा, जहां 2024 में 91 खिलाड़ी डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए, जबकि इटली 85 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा.

रिपोर्ट जारी होने के बाद भारत की राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने एक बयान जारी कर डोपिंग के ख़िलाफ़ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

नाडा ने अपने बयान में कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों में भारत के एंटी-डोपिंग ढांचे को काफ़ी मज़बूती मिली है. खेलों में डोपिंग की समस्या से निपटने के लिए नाडा इंडिया ने न सिर्फ़ टेस्ट की संख्या बढ़ाई है, बल्कि शिक्षा और जागरूकता पर भी ज़ोर दिया है.’