नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 नवंबर 2025 को राज्य का 25वां स्थापना दिवस मनाया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे. इस मौके पर पीएम मोदी ने सड़क, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा क्षेत्रों की 14 हजार 260 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की घोषणा की थी.
अब आरटीआई से पता चला है कि इस एक दिन के कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार पर राज्य सरकार ने 6 करोड़ 90 लाख 83 हजार 385 रुपये खर्च किए हैं.
ध्यान रहे यह वही राज्य है, जहां के सरकारी स्कूल फंड कटौती से इस कदर जूझ रहे हैं कि बिजली का बिल भरना तक मुश्किल हो रहा है. चॉक-डस्टर खरीदना दूभर हो रहा है.
आरटीआई से क्या पता चला है?
आरटीआई एक्टिविस्ट अजय बासुदेव बोस ने छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा था कि 1 नवंबर 2025 को मनाए गए छत्तीसगढ़ दिवस के अवसर पर विज्ञापनों पर कुल कितना व्यय किया गया?
आवेदन के जवाब में खर्च की गई राशि का विवरण साझा करते हुए छत्तीसगढ़ जनसंपर्क निदेशालय ने बताया कि इस कार्यक्रम को लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टीवी आदि) में दिए विज्ञापनों पर 1,39,75,277 रुपये खर्च किए गए.
इसी तरह राष्ट्रीय व राज्य स्तर के दैनिक समाचार पत्रों में 4,97,69,426 रुपये के विज्ञापन दिया गया. और बड़े होर्डिंग्स, बैनर, बिलबोर्ड्स और ब्रांडिंग पर 53,38,682 रुपये खर्च किए गए.
तीनों मदों को जोड़ने पर कुल खर्च हुआ: 6,90,83,385 रुपये. ध्यान रहे यह पूरे कार्यक्रम का कुल खर्च नहीं है, बल्कि केवल विज्ञापनों पर हुए खर्च का ब्योरा है.
आरटीआई के जवाब में यह नहीं बताया गया है कि किस टीवी चैनल या अखबार को कितने विज्ञापनों के एवज में कितने का भुगतान किया गया.
करोड़ों के विज्ञापन के बीच स्कूलों के फंड में कटौती
इसके बरक्स अगर सरकार के अन्य मदों खासकर स्कूली शिक्षा के फंड्स को रखें तो बेहद असंतुलित तस्वीर बनती है. फ़िलहाल बात करते हैं केवल आत्मानंद विद्यालयों की.
साल 2020 में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना की शुरुआत पिछली कांग्रेस सरकार ने की थी. स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय की वेबसाइट के मुताबिक, ‘इस योजना का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को समान अवसर प्रदान करना है.’
इस योजना के तहत राज्य में बड़ी संख्या में आत्मानंद स्कूल खोले गए.
लेकिन वर्तमान सरकार के समय में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के फंड में करीब 64 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है. पहले इन स्कूलों के रखरखाव, वार्षिक समारोह, खेल गतिविधि, स्टेशनरी (चॉक-डस्टर आदि), परीक्षा आयोजित करने आदि के लिए राज्य सरकार से सालाना 5 लाख रुपये मिलता था, अब 1 लाख 83 हजार मिल रहा है.
द वायर हिंदी से बातचीत में रायपुर जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के प्रधानाचार्य नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘एक-एक स्कूल का बिजली बिल 25,000-30,000 रुपये आता है, क्या इतने पैसों में बिल चुकाना संभव है.’
फंड कटौती के प्रभाव को विस्तार से समझाते हुए वह कहते हैं, ‘देखिए इन्हीं पैसों से हमें बच्चों की परीक्षाओं का आयोजन करना होता है, चॉक-डस्टर आदि खरीदना होता है, लैब में केमिकल्स उपलब्ध कराने होते हैं. अब फंड कम होने के बाद हमें तय करना पड़ता है कि क्या करें और क्या नहीं… पहले स्कूल का वार्षिक समारोह और स्पोर्ट्स डे मनाते थे, अब उसे रोकना पड़ा है.’
प्रधानाचार्य ने बताया कि यह फंड कटौती पिछले अकादमिक सत्र से शुरू हुआ है. 2024-25 में 5 लाख रुपये से घटाकर 1 लाख 79 हजार रुपये किए गए. इस सत्र में थोड़ा बढ़ाकर 1 लाख 83 हजार रुपये मिला.
‘लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. मेरे ही स्कूल में 1200 विद्यार्थी है, तो प्रति छात्र करीब 150 रुपये हुए. इसमें क्या-क्या होगा. साल में तीन बार (त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक) परीक्षाएं करानी होती हैं. हर साल इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के मेंटेनेंस में 15-20 हजार रुपये लग जाते हैं.’ प्रधानाचार्य बताते हैं.
वर्तमान में 751 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय चल रहे हैं. सरकार का दावा है कि इन विद्यालयों में ‘पुस्तकालय, अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला जैसे अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों की एक उच्च प्रशिक्षित टीम है.’ लेकिन सवाल है कि क्या फंड के अभाव में इन सुविधाओं का सुचारू रुप से इस्तेमाल हो सकता है?
‘सरकार निजी स्कूलों को बढ़ावा देना चाहती है’
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आरपी सिंह का आरोप है कि राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार आत्मानंद विद्यालयों की स्थिति पर इसलिए ध्यान नहीं दे रही है कि क्योंकि वह निजी स्कूलों को बढ़ावा देना चाहती है.
द वायर हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘भूपेश बघेल सरकार में हमने लगभग 750 आत्मानंद स्कूल खोले थे ताकि गरीब परिवार का जो बच्चा भारी फीस के चलते अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में नहीं पढ़ पाता, उसे बेहतर शिक्षा मिल सके. राज्य की जनता ने इसका बहुत स्वागत किया था. लेकिन अभी देखकर बड़ा दुख होता है कि जब से राज्य में भाजपा की सरकार आई है, आत्मानंद स्कूलों की वित्तीय स्थिति खराब हो गई है. …सरकार इन स्कूलों को किसी तरह बंद करना चाहती है कि ताकि निजी स्कूलों को फायदा हो सके.’
द वायर हिंदी ने छत्तीसगढ़ के भाजपा प्रवक्ता अनुराग सिंह देव से भी संपर्क किया. एक दिन के कार्यक्रम के विज्ञापनों पर 6 करोड़ 90 लाख रुपये खर्च किए जाने पर उन्होंने कहा, ‘जनसंपर्क विभाग के माध्यम से तो विज्ञापन दिए ही जाते हैं. यह तो सभी सरकारों में होता है. मुझे नहीं लगता कि कोई सरकार ऐसी है, जो विज्ञापन पर पैसा खर्च न करे.’
वहीं आत्मानंद स्कूलों की फंड कटौती पर उन्होंने कहा, ‘स्कूलों के लिए फंड का प्रावधान है. आत्मानंद के लिए अलग से क्या किया गया है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है. लेकिन राज्य सरकार ने स्कूलों के लिए अच्छे बजट का प्रावधान किया है.’
छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आत्मानंद स्कूलों की फंड कटौती को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया, जवाब आने पर रिपोर्ट में अपडेट कर दिया जाएगा.
बता दें कि राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार की तरह ही मौजूदा भाजपा सरकार भी विज्ञापनों पर हर रोज लाखों रुपये खर्च कर रही है. मार्च 2025 में कांग्रेस विधायक द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आया था कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार विज्ञापनों पर प्रतिदिन 78 लाख रुपये रुपये खर्च कर रही है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने बताया था कि 1 दिसंबर 2023 से 31 जनवरी 2025 के बीच विज्ञापनों पर कुल 332.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए. यह खर्च करीब 428 दिनों की अवधि में हुआ, यानी सरकार ने औसतन हर दिन लगभग 78 लाख रुपये केवल विज्ञापनों पर खर्च किए.
यह राशि सरकारी योजनाओं, कार्यों और प्रचार-प्रसार से जुड़े विज्ञापनों पर राज्य के जनसंपर्क विभाग के माध्यम से खर्च की गई.
