नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार (20 दिसंबर) को ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी- जी राम जी’ विधेयक को लेकर केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार की आलोचना की.
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया है और करोड़ों किसानों, श्रमिकों एवं भूमिहीन ग्रामीण वर्ग के गरीबों के हितों पर हमला किया है.
मालूम हो कि विपक्ष के भारी विरोध के बीच वीबी-जी राम जी विधेयक इस सप्ताह संसद से पारित हो गया. प्रस्तावित कानून पूर्व की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के 20 सालों से चले आ रहे मनरेगा क़ानून (महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट) की जगह लेगा, जिसमें 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के अनिवार्य मजदूरी रोजगार को सुनिश्चित की गई है.
इस संबंध में सोनिया गांधी ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘मुझे आज भी याद है, 20 साल पहले डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब संसद में मनरेगा कानून आम राय से पास किया गया था. यह ऐसा क्रांतिकारी कदम था, जिसका फायदा करोड़ों ग्रामीण परिवारों को मिला था. खासतौर पर वंचित, शोषित, गरीब और अतिगरीब लोगों के लिए रोजी-रोटी का जरिया बना.’
उन्होंने आगे कहा, ‘रोजगार के लिए अपनी माटी, अपना गांव, अपना घर-परिवार छोड़कर पलायन करने पर रोक लगी. रोजगार का कानूनी हक दिया गया, साथ ही ग्राम पंचायतों को ताकत मिली. मनरेगा के जरिए महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों के भारत की ओर एक ठोस कदम उठाया गया.’
सोनिया गांधी ने दावा किया कि पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार, गरीबों और वंचितों के हितों को नजरअंदाज कर मनरेगा को कमजोर करने की हर कोशिश की, जबकि कोविड के वक़्त ये गरीब वर्ग के लिए संजीवनी साबित हुआ.
उन्होंने कहा, ‘बहुत अफसोस की बात है कि अभी हाल में सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया. न सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, बल्कि मनरेगा का रूप-स्वरूप बिना विचार-विमर्श किए, बिना किसी से सलाह-मशवरा किए, बिना विपक्ष को विश्वास में लिए मनमाने ढंग से बदल दिया गया.’
सोनिया गांधी का कहना है, ‘अब किसको, कितना, कहां और किस तरह रोजगार मिलेगा, यह जमीनी हकीकत से दूर दिल्ली में बैठकर सरकार तय करेगी.’
भाई और बहनों.. नमस्कार
मुझे आज भी याद है, 20 साल पहले डॉ. मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री थे, तब संसद में मनरेगा कानून आम राय से पास किया गया था। यह ऐसा क्रांतिकारी कदम था, जिसका फायदा करोड़ों ग्रामीण परिवारों को मिला था। खासतौर पर वंचित, शोषित, गरीब और अतिगरीब लोगों के लिए… pic.twitter.com/mjH4CfYRVe
— Congress (@INCIndia) December 20, 2025
सोनिया गांधी ने कहा, ‘कांग्रेस का मनरेगा को लाने और लागू करने में बड़ा योगदान था, लेकिन यह पार्टी से जुड़ा मामला कभी नहीं था. ये देशहित और जनहित से जुड़ी योजना थी. मोदी सरकार ने इस कानून को कमजोर करके देश के करोड़ों किसानों, श्रमिकों और भूमिहीन ग्रामीण वर्ग के गरीबों के हितों पर हमला किया है.’
सोनिया गांधी ने कहा, ‘इस हमले का मुकाबला करने के लिए हम सब तैयार हैं. 20 साल पहले अपने गरीब भाई-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलवाने के लिए मैं भी लड़ी थी, आज भी इस काले कानून के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं.’
उन्होंने कहा, ‘मेरे जैसे कांग्रेस के सभी नेता और लाखों कार्यकर्ता आपके साथ खड़े हैं.’
गौरतलब है कि इस प्रस्तावित कानून को लेकर विपक्ष का आरोप है कि इस योजना में केंद्र सरकार को राज्यों की तुलना में ‘ज़्यादा अधिकार’ हैं जबकि राज्य सरकारों को पहले की तुलना में ‘ज़्यादा पैसा’ खर्च करना होगा. लेकिन सरकार का दावा है कि ये मनरेगा से बेहतर योजना है और ग्रामीण इलाके में रह रहे लोगों को रोज़गार के बेहतर अवसर मुहैया कराएगी.
मनरेगा की जगह प्रस्तावित नए कानून का अर्थशास्त्रियों और सामाजिक अधिकार संगठनोंं ने भी विरोध किया है. इनका आरोप है कि ‘विकसित भारत- रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन’ अब हर हाथ को काम के अधिकार की बजाय, चुनिंदा लाभार्थियों को दिहाड़ी के दान की योजना बनाता है.
