नई दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश में जारी उथल-पुथल की ओर इशारा करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (21 दिसंबर) को वहां के हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की और दुनिया भर में फैले हिंदुओं से उनकी मदद करने का आग्रह किया.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कोलकाता में आयोजित एक सेमिनार में बोलते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘वे (हिंदू) वहां (बांग्लादेश में) अल्पसंख्यक हैं और स्थिति काफी कठिन है. हालात मुश्किल हैं, फिर भी अधिकतम सुरक्षा के लिए वहां के हिंदुओं को एकजुट रहना होगा. और दुनिया भर के हिंदुओं को उनकी मदद करनी चाहिए.’
बांग्लादेश में इस समय एक बार फिर अशांति का दौर चल रहा है. हिंसा की ताज़ा चिंगारी 12 दिसंबर को 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या से भड़की, जो प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चले आंदोलन में शामिल थे. इसी आंदोलन के बाद 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था.
भारत सरकार से बांग्लादेश की स्थिति का संज्ञान लेने का आग्रह करते हुए मोहन भागवत ने रविवार को कहा, ‘हम जो कुछ भी कर सकते हैं, वह सब करना होगा, और हम कर भी रहे हैं… भारत सरकार को भी कुछ करना होगा. संभव है कि वह पहले से कुछ कर रही हो. कुछ बातें सार्वजनिक होती हैं, कुछ नहीं हो सकतीं. कभी नतीजे निकलते हैं, कभी नहीं. लेकिन कुछ न कुछ तो किया ही जाना चाहिए.’
पश्चिम बंगाल में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनावों का ज़िक्र करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि बंगाल में बढ़ता इस्लामी कट्टरपंथ, हिंदुओं पर हमलों की घटनाएं, बांग्लादेश की स्थिति और मुस्लिम घुसपैठ ने राज्य पर नकारात्मक असर डाला है.
आरएसएस प्रमुख ने बाबरी जैसी मस्जिद को साज़िश बताया
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद ज़िले में बाबरी मस्जिद जैसी दिखने वाली मस्जिद बनाने की पहल को ‘विवाद को फिर से भड़काने की राजनीतिक साज़िश’ बताया.
उन्होंने कहा, ‘यह सब वोटों के लिए किया जा रहा है. इससे न मुसलमानों का भला होगा और न ही हिंदुओं का. ऐसा नहीं होना चाहिए. मेरी यही राय है.’
टीएमसी सरकार द्वारा तटीय शहर दीघा में जगन्नाथ मंदिर बनाए जाने पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ‘मुझे नियमों की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन एक धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी देश में सरकार द्वारा मंदिर बनवाना, मुझे नहीं लगता कि इसकी अनुमति है.’
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का उल्लेख करते हुए, जहां पहले बाबरी मस्जिद थी, भागवत ने कहा, ‘राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से बनाया गया है. ट्रस्ट को मंदिर निर्माण के लिए कहा गया था और इसमें सरकार का कोई पैसा नहीं लगाया गया. सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन धर्म स्थायी होता है. धार्मिक स्थल हमें ईश्वर के द्वार तक ले जाते हैं. इसलिए इन्हें राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. मंदिर सरकारों द्वारा नहीं बनाए जाने चाहिए.’
