नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीते साल फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द किए जाने के बाद पहले पूर्ण वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया है और अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की तुलना में 12 गुना अधिक चंदा जुटाया है.
चुनाव आयोग के सामने 2024-25 के लिए प्रस्तुत राजनीतिक दलों की चंदा रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा को मिला चंदा इस वर्ष में एक दर्जन विपक्षी दलों द्वारा संयुक्त रूप से प्राप्त कुल चंदे से 4.5 गुना अधिक है.
उल्लेखनीय है कि जहां भाजपा को 2023-24 में 3,967 करोड़ रुपये चंदे से प्राप्त हुए थे, वहीं लोकसभा चुनाव वाले वर्ष में यह आंकड़ा बढ़कर 6,088 करोड़ रुपये हो गया.
2024-25 में चुनावी ट्रस्टों के माध्यम से प्राप्त चंदे में से आधे से अधिक चंदा केवल सात बड़े कॉरपोरेट घरानों – टाटा समूह, ओपी जिंदल समूह, एल एंड टी, मेघा इंजीनियरिंग, अशोक लेलैंड, डीएलएफ और महिंद्रा का था.
इन ट्रस्टों ने विभिन्न पार्टियों को कुल 3,811.37 करोड़ रुपये का चंदा दिया, जिसमें से इन सात समूहों का योगदान 2,107 करोड़ रुपये था, जो उनके कुल कोष (corpus) का 55% था.
कांग्रेस को मिले चंदे में गिरावट
भाजपा के उलट कांग्रेस को 2024-25 में अनुदान, ट्रस्ट और अंशदान से 522.13 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो पिछले वित्तीय वर्ष में प्राप्त 1,129.66 करोड़ रुपये के आधे से भी कम है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के कुल चंदे का 60% यानी 313.76 करोड़ रुपये, चुनावी ट्रस्टों के जरिए आया.
यह असमानता चुनावी बॉन्ड के बाद के दौर में दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच बढ़ती वित्तीय खाई को उजागर करती है.
क्षेत्रीय सहयोगियों को लाभ: टीडीपी और जेएसपी
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साझेदारों की वित्तीय स्थिति में भी भिन्नता देखी गई. आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को 83.03 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो 2023-24 में प्राप्त 100.18 करोड़ रुपये से कम है.
प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने टीडीपी को सबसे अधिक 40 करोड़ रुपये का योगदान दिया. जबकि एबी जनरल ट्रस्ट (5 करोड़ रुपये) और ट्रायम्फ ट्रस्ट (4 करोड़ रुपये) सहित अन्य ट्रस्टों ने भी चंदा दिया.
कॉरपोरेट चंदा देने वालों में नैटको फार्मा (7 करोड़ रुपये), यूनिवर्सिटी एजुकेशन मैनेजमेंट (5 करोड़ रुपये), क्रिस्टी फ्राइडग्राम इंडस्ट्री (2 करोड़ रुपये), यूनाइटेड टेली लिंक्स (2 करोड़ रुपये) और प्रिया एक्वा फार्म्स (2 करोड़ रुपये) शामिल हैं.
इस वर्ष कई सौर ऊर्जा कंपनियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है. हेरेम्बा रिन्यूएबल्स लिमिटेड ने 59.90 लाख रुपये का चंदा दिया, जबकि नीमच सोलर पावर ने 43.80 लाख रुपये का योगदान दिया.
अन्य नवीकरणीय ऊर्जा चंदादाताओं में रिन्यू रंगा रेड्डी सोलर पावर (57.80 लाख रुपये), रिन्यू सोलर एनर्जी (झारखंड फाइव) (29.10 लाख रुपये), रिन्यू विंड एनर्जी (राजस्थान वन) (43.20 लाख रुपये), श्रेयस सोलर फार्म्स (52.50 लाख रुपये) और अखिलाज्ञा सोलर एनर्जी (30.60 लाख रुपये) शामिल हैं.
सेंचुरी प्लाईबोर्ड्स ने भी 50 लाख रुपये का चंदा दिया. वहीं, दो व्यक्तिगत चंदा देने वाले शरत बाबू बोलिनेनी और कृष्णा मोहन बोलिनेनी ने 2 करोड़ रुपये का योगदान दिया.
इस संबंध में राज्य टीडीपी अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने पत्रकारों से कहा, ‘हमें जो भी पैसा मिलता है, उसके लिए हम चंदा देने वालों के प्रति जवाबदेह हैं… उदाहरण के लिए हमारे पास एक स्वास्थ्य सेवा योजना है जिसमें हम 38 करोड़ रुपये का योगदान देते हैं – यह सब चंदे से आता है.’
टीडीपी की सहयोगी जन सेना पार्टी (जेएसपी) को 25.33 करोड़ रुपये मिले. उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के नेतृत्व वाली इस पार्टी को विशेष तौर पर व्यक्तिगत और निर्माण कंपनियों से चंदा प्राप्त हुआ.
पार्टी को हैदराबाद के व्यक्ति रविकुमार अकुला ने 5 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जो पार्टी के लिए अब तक का सबसे अधिक योगदान था. आरवीएम कंस्ट्रक्शंस इंडिया ने 3 करोड़ रुपये और नैटको फार्मा ने 1 करोड़ रुपये का चंदा दिया.
अन्य महत्वपूर्ण योगदानों में डीवीके कंस्ट्रक्शंस से 2 करोड़ रुपये, साईनाथ एडीएस से 1.5 करोड़ रुपये, मिरेकल सॉफ्टवेयर सिस्टम्स से 1 करोड़ रुपये और व्यक्तिगत तौर पर चंदा देने वाले उद्दराजू श्री राम लक्ष्मीपति भोगा राजू से 1 करोड़ रुपये शामिल थे.
गौरतलब है कि जेएसपी को चुनावी ट्रस्टों से कोई खास धनराशि प्राप्त नहीं हुई. पार्टी प्रवक्ता अजय कुमार वेमुलापति ने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और पेंशनभोगियों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने 10 रुपये से 20 रुपये तक की राशि चंदे में दी.
टीएमसी की धनराशि तीन गुना बढ़ी
वित्तीय वर्ष 2024-25 में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की धनराशि लगभग तीन गुना बढ़कर 64.24 करोड़ रुपये से 184.96 करोड़ रुपये हो गई. पार्टी को 448 चंदा देने वालों से धनराशि प्राप्त हुई.
प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 92 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जबकि लॉटरी वितरक टाइगर एसोसिएट्स ने 50 करोड़ रुपये चंदा दिया. टाटा समर्थित प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 10 करोड़ रुपये दिए.
पार्टी को अन्य महत्वपूर्ण चंदा देने वालों में रश्मी सीमेंट लिमिटेड (5 करोड़ रुपये), श्याम फेरो अलॉयज लिमिटेड (3 करोड़ रुपये), केजरीवाल माइनिंग (3 करोड़ रुपये), सुपर स्मेल्टर्स (2 करोड़ रुपये) और आईवीएल धनसेरी पेट्रोकेम इंडस्ट्रीज (2 करोड़ रुपये) शामिल थे.
सबसे अधिक व्यक्तिगत योगदान देने वाले किशन गोपाल मोहता थे, जिन्होंने 3 करोड़ रुपये का चंदा दिया.
रिपोर्ट में बताया गया कि टीएमसी के 213 विधायकों में से 199 ने पार्टी कोष में 22,000 रुपये से 30,000 रुपये तक का योगदान दिया.
व्यक्तिगत रूप से चंदा देने वालों में ब्रात्या बसु, बाबुल सुप्रियो, अरूप बिस्वास, चंद्रिमा भट्टाचार्य और फिरहाद हकीम जैसे मंत्री भी शामिल थे. 40 सांसदों और पूर्व सांसदों ने भी योगदान दिया, जिनमें माला रॉय (6.12 लाख रुपये), खलीलुर रहमान (3.8 लाख रुपये), महुआ मोइत्रा (1 लाख रुपये) और सागरिका घोष (1.2 लाख रुपये) शामिल हैं.
इस संबंध में टीएमसी प्रवक्ता जय प्रकाश मजूमदार ने कहा, ‘भाजपा भारत की सबसे अमीर पार्टी है… केंद्र सरकार भी कॉरपोरेट समूहों की मदद करती है, इसलिए स्वाभाविक रूप से वे भाजपा की भी मदद करेंगे.’
आम आदमी पार्टी के चंदे में भी बढ़ोतरी
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) को मिलने वाले चंदे में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 11.06 करोड़ रुपये से बढ़कर 38.1 करोड़ रुपये हो गया है. प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 16.4 करोड़ रुपये का चंदा दिया, जो कुल चंदे का 43% से अधिक है.
अन्य पार्टियों के विपरीत आम आदमी पार्टी के चंदे में व्यक्तियों का दबदबा देखने को मिला. शीर्ष 100 चंदादाताओं में से केवल चार संस्थाएं थीं. व्यक्तिगत तौर पर तलपदी उमाशंकर शेन ने 37.74 लाख रुपये का योगदान दिया, जबकि माइकल डिसूजा ने 30 लाख रुपये का चंदा दिया.
पार्टी को भारत स्वमुक्ति संस्था, एक धर्मार्थ ट्रस्ट, ने 30 लाख रुपये का चंदा दिया. जबकि कॉरपोरेट चंदादाताओं में कुबेर पॉलीप्लास्ट (25 लाख रुपये) और एडवांस केमिकल्स (11 लाख रुपये) शामिल हैं.
पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 10,000 रुपये के 12 चंदे दिए. अन्य नेताओं ने भी नियमित रूप से योगदान दिया: पंजाब के मंत्री अमन अरोरा (10,000 रुपये के 12 चंदे), दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी (3,500 रुपये के 12 चंदे), पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह (10,000 रुपये के 12 चंदे) और स्पीकर कुलतार सिंह संधवान (10,000 रुपये के 12 चंदे). पंजाब के मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कुल 62,000 रुपये का योगदान दिया.
बिहार में सहयोगी दलों के चंदे में उछाल
बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के चंदे में चुनावी ट्रस्टों के योगदान से ज़बरदस्त वृद्धि देखी गई.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू को पिछले वर्ष के 1.81 करोड़ रुपये के मुकाबले 932% की वृद्धि के साथ 18.69 करोड़ रुपये का चंदा मिला.
पार्टी को प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 10 करोड़ रुपये, प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 5 करोड़ रुपये और समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट एसोसिएशन ने 2 करोड़ रुपये का योगदान दिया.
जेडीयू को चंदा देने वाले स्थानीय कॉरपोरेट चंदादाताओं में अनमोल इंडस्ट्रीज (15 लाख रुपये), उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज (10 लाख रुपये), सोना बिस्कुट (10 लाख रुपये) और नटराज आयरन एंड इंडस्ट्रीज (5 लाख रुपये) शामिल हैं.
व्यक्तिगत तौर पर चंदा देने वालों में आकाश अग्रवाल (10 लाख रुपये) और संजय कुमार सिन्हा (4.5 लाख रुपये) शामिल हैं.
सजंय कुमार ने व्यक्तिगत रूप से पार्टी को 1.25 लाख रुपये का योगदान दिया. अन्य योगदान देने वाले नेताओं में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश (3.74 लाख रुपये), जहानाबाद की विधायक मनोरमा देवी (1.01 लाख रुपये), और सांसद राजीव रंजन सिंह, दिनेश चंद्र यादव, गिरिधारी यादव, रामनाथ ठाकुर, कौशलेंद्र कुमार, दिलेश्वर कामत, रामप्रीत मंडल, आलोक कुमार सुमन, अजय कुमार मंडल और खीरू महतो (प्रत्येक 72,000 रुपये) शामिल थे.
कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा सहित कई अन्य लोगों ने 54,000 रुपये का योगदान दिया.
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नेतृत्व वाली एलजेपी (राम विलास) ने अपने कोष में 9,403% की वृद्धि दर्ज की, और 2023-24 में 11.67 लाख रुपये की तुलना में 11.09 करोड़ रुपये प्राप्त किए.
इस कुल राशि में से प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट का योगदान 10 करोड़ रुपये था, जबकि प्रूडेंट ने 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया. पार्टी को एसआरआर प्रोजेक्ट्स से 5 लाख रुपये भी मिले.
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