नई दिल्ली: इंदौर नगर निगम को गुरुवार (1 जनवरी) को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार, शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र से लिए गए पानी के नमूनों में से एक-तिहाई में बैक्टीरियल इन्फेक्शन पाया गया है.
यह जांच महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज द्वारा किया गया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में पाया गया कि भागीरथपुरा से लिए गए पानी के नमूने मुख्य सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज के कारण दूषित थे. यह इलाका इस प्रकोप का केंद्र बन गया है.
जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि शुरुआती लैब रिपोर्ट में पानी के सैंपल में दूषित होने की पुष्टि हुई है, हालांकि अधिकारी अभी तक इसके लिए ज़िम्मेदार खास बैक्टीरिया की पहचान नहीं कर पाए हैं.
इस बीच प्रशासन ने जलापूर्ति लाइन की सफाई–मरम्मत के साथ विलंबित नई लाइन के काम को भी शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है.
ज्ञात हो कि पिछले दस दिनों में दूषित पेयजल के कारण लगभग 2,800 लोग बीमार हो चुके हैं और 272 लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है. आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या चार बताई गई है, लेकिन स्थानीय रिपोर्टों और लोगों का दावा है कि 14 लोगों की मौत हुई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार (2 जनवरी) को कहा कि उन्हें शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले डायरिया के कारण 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर संभागायुक्त सुदाम खड़े ने बताया कि एमजीएम कॉलेज की रिपोर्ट में पानी के 26 नमूनों में बैक्टीरिया संक्रमण की पुष्टि हुई है. क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से 70 से अधिक नमूने एकत्र किए गए थे.
नई सप्लाई लाइन
खड़े ने कहा, ‘पूरी सप्लाई लाइन की सफाई कर दी गई है, लीकेज ठीक कर दिए गए हैं और दूषित पानी बदला जा चुका है. क्षेत्र में क्लोरीन की गोलियां बांटी गई हैं और लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है.’
उन्होंने यह भी दावा किया कि अब ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या घट रही है.
अखबार के अनुसार, इस क्षेत्र में नई पानी की लाइन के लिए अगस्त में टेंडर जारी किया गया था, लेकिन चार महीने से काम रुका हुआ था. अधिकारियों ने इस लापरवाही को इस त्रासदी की बड़ी वजहों में से एक बताया.
गुरुवार (1 जनवरी) को हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस देरी पर चर्चा हुई और शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शुक्रवार (2 जनवरी) तक टेंडर मंजूर कर दिया जाएगा और काम शुरू होगा.
उन्होंने कहा, ‘आज (गुरुवार को) हमने बैठक कर टेंडर आदि से जुड़े छोटे-मोटे अवरोध दूर कर दिए हैं. भागीरथपुरा क्षेत्र का टेंडर कल तक साफ हो जाएगा और काम शुरू होगा.’
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने शहर में अलग-अलग जगहों से पेयजल के नमूने लेने के निर्देश दिए, साथ ही स्थिति से बेहतर तरीके से निपटने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय करने को कहा. खड़े ने बताया, ‘एसीएस ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश भी दिए हैं.’
एनएचआरसी का नोटिस
नए साल के पहले दिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
मीडिया में आई ख़बरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने नोटिस में कहा, ‘ख़बरों के अनुसार क्षेत्र के लोग कई दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की. मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस मुख्य पाइपलाइन से पेयजल आपूर्ति होती है, वह एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजरती है. पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया. इसके अलावा कई सप्लाई लाइनें टूटी हुई भी पाई गईं, जिसके कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा था.’
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के बयान के अनुसार, अब तक क्षेत्र में 48,400 से अधिक लोगों की जांच की गई है, जिनमें से लगभग 2,800 में लक्षण पाए गए हैं. बयान में कहा गया, ‘अब तक कुल 272 मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए, जिनमें से 71 को छुट्टी दे दी गई है. वर्तमान में 201 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और 32 मरीज आईसीयू में हैं.’
