पंजाब: सीएम की ग़ैर-मौजूदगी में उनके हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल पर सवाल उठाने पर दस के ख़िलाफ़ एफआईआर

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के जापान के आधिकारिक दौरे के दौरान उनके चॉपर के इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछने के लिए लुधियाना पुलिस ने आरटीआई कार्यकर्ता मणिक गोयल समेत 10 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस का दावा है कि इन लोगों ने सीएम के हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल को लेकर ‘तोड़ी-मरोड़ी, अप्रमाणित और स्पष्ट रूप से ग़लत जानकारियां’ दीं.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: पंजाब की लुधियाना पुलिस ने पिछले महीने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता मणिक गोयल समेत 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने ‘तोड़े-मरोड़े गए और अप्रमाणित कंटेंट’ को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ये कार्रवाई फेसबुक पर कुछ पोस्ट्स में यह सवाल उठाए जाने के बाद की गई है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आधिकारिक जापान दौरे पर होने के दौरान उनके चॉपर का इस्तेमाल कौन कर रहा था.  

यह एफआईआर 12 दिसंबर को लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी, लेकिन गुरुवार को सामने आई.

मणिक गोयल के अलावा एफआईआर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मिंटू गुरुसरिया, गगन रामगढ़िया, हरमन फार्मर, मनदीप मक्कड़, गुरलाल एस मान, स्नम्मू ढालीवाल, अर्जन, दीप मांगिल और लोक आवाज टीवी के नाम शामिल हैं.

मुख्यमंत्री मान 1 से 10 दिसंबर के बीच जापान और दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर थे. आरोप है कि इस दौरान इन सभी लोगों ने सीएम के चॉपर के उड़ते हुए विजुअल्स सोशल मीडिया पर साझा किए और मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए. 

इसके बाद यह मामला इंस्पेक्टर सतबीर सिंह की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(1) (झूठे बयान, अफवाह या रिपोर्ट को प्रकाशित/प्रसारित करना), 353(2) (धर्म, जाति आदि के आधार पर वैमनस्य फैलाने की नीयत से झूठी जानकारी फैलाना) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज किया गया है.

लुधियाना पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त (साइबर क्राइम) वैभव सहगल ने कहा, ‘मामले की जांच जारी है. आरोपियों द्वारा अपलोड किए गए सोशल मीडिया पोस्ट्स की प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है.’ 

एफआईआर में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन पोस्ट्स में पंजाब के मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल को लेकर ‘तोड़ी-मरोड़ी, अप्रमाणित और स्पष्ट रूप से गलत जानकारियां’ दी गई थीं. इसमें उड़ान ट्रैकिंग डेटा की गलत व्याख्या, संदर्भ से हटकर विजुअल्स का चयन और बिना तथ्यात्मक आधार के आरोप लगाए गए, जिससे एक झूठी और भ्रामक कहानी गढ़ी गई.

एफआईआर में यह भी कहा गया है कि इन पोस्ट्स के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि मुख्यमंत्री के विदेशी दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर का कथित तौर पर अनधिकृत या संदिग्ध इस्तेमाल किया गया.

एफआईआर के अनुसार, ये आरोप निराधार हैं और आधिकारिक रिकॉर्ड्स से मेल नहीं खाते.

पंजाब के नागरिक उड्डयन विभाग के हवाले से एफआईआर में कहा गया है कि संबंधित हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा किया गया था, जिसे तय तारीखों पर आधिकारिक उद्देश्यों के लिए विमान उपयोग करने की विधिवत अनुमति थी.

एफआईआर में यह भी कहा गया है कि ‘इस तरह की भ्रामक सामग्री का व्यापक प्रसार संस्थानों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है, सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है और अप्रमाणित जानकारियों के फैलाव को बढ़ावा दे सकता है, जिससे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य पंजाब में सार्वजनिक व्यवस्था और प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो सकता है.’ 

एफआईआर में आगे कहा गया है, ‘प्रथमदृष्टया आरोपियों की हरकतें संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आती हैं. जांच के दौरान विवादित कंटेंट की प्रामाणिकता, सटीकता और स्रोत की विस्तृत जांच की जाएगी.’

एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए मणिक गोयल ने कहा, ‘मेरे और अन्य लोगों के खिलाफ एक झूठी एफआईआर दर्ज करके पंजाब सरकार ने हमें नए साल का तोहफा दिया है. हमने सिर्फ इतना सवाल किया था कि मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में उनके आधिकारिक चॉपर का इस्तेमाल कौन कर रहा था. पिछले चार वर्षों से हेलीकॉप्टर और विमान के उपयोग और उस पर हुए खर्च से जुड़ी आरटीआई जानकारी साझा करने से लगातार इनकार किया जा रहा है और अगर अब हम सोशल मीडिया पर जायज़ सवाल पूछते हैं, तब हमारे खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कर दी जाती है.’ 

उन्होंने यह भी कहा, ‘इससे पहले भी जब हमने विमान ख़रीद से जुड़े करोड़ों रुपये के टेंडर को लेकर सवाल पूछे थे, तब हमें डराने की कोशिश की गई थी. आखिर इस हेलीकॉप्टर और विमान को लेकर सरकार को क्या छिपाना है कि वह बात करने से डर रही है? यही आप सरकार कभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति के अधिकार की बात करती थी, आज सवाल पूछने पर एफआईआर दर्ज की जा रही है.’

4 जनवरी को चंडीगढ़ में प्रदर्शन

सभी आरोपियों ने बाद में अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर एक संयुक्त बयान जारी किया.

बयान में कहा गया, ‘हमारा एकमात्र अपराध यह है कि हमने सरकार से सवाल पूछे. जब मन हो तब गिरफ्तार कर लीजिए, बोलने और सवाल करने का हमारा अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए. कलम के पैरों में जंजीर नहीं बंधनी चाहिए. सरकार इस भ्रम में न रहे कि पंजाब के लोग सवाल पूछना बंद कर देंगे. सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती.’

आरोपियों ने घोषणा कि वे 4 जनवरी को चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन करेंगे. वहीं विपक्षी दलों ने भी एफआईआर को लेकर सरकार पर निशाना साधा.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने एक्स पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री से इस एफआईआर को लेकर सवाल उठाए. 

उन्होंने लिखा, ‘भगवंत मान जी, आप खुद लोगों से अपने नेताओं से सवाल पूछने की अपील किया करते थे. आज जब कुछ पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने आपकी सरकार के हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए, तो उनके खिलाफ मामले दर्ज करवा दिए गए. क्या यही लोकतंत्र है? लोकतंत्र को पुलिस राज्य में मत बदलिए.’