नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह और उनकी पत्नी ज्योति अवस्थी द्वारा संचालित एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से जुड़े ठिकानों पर कथित विदेशी मुद्रा उल्लंघन (फेमा) के मामले में तलाशी अभियान चलाया.
हिंदुस्तान टाइम्स ने मामले के जानकार लोगों के हवाले से बताया कि ईडी हरजीत सिंह के संगठन – सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल) – को प्राप्त 6 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी निधि की जांच कर रहा है.
आरोप है कि इन पैसों का उपयोग ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी नीतियों को प्रभावित करने के लिए नैरेटिव गढ़ने में किया गया. हरजीत सिंह बहुपक्षीय जलवायु मंचों पर ग्लोबल साउथ के अधिकारों के पैरोकार के रूप में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं.
फेमा के तहत कथित उल्लंघनों को लेकर सिंह के आवास तथा दिल्ली और गाजियाबाद स्थित एनजीओ के कार्यालयों पर छापेमारी की गई. हालांकि, एजेंसी ने यह नहीं बताया कि छापों में फेमा उल्लंघन से संबंधित क्या साक्ष्य मिले.
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘एसएसपीएल और उसके संस्थापकों को 2021 से 2025 के बीच पर्याप्त मात्रा में विदेशी धनराशि प्राप्त हुई है. ये रेमिटेंस कंसल्टेंसी चार्ज के नाम पर मिले थे. हालांकि, विदेश में रेमिटेंस भेजने वालों द्वारा की गई फाइलिंग के क्रॉस-वेरिफिकेशन से पता चला है कि ये हस्तांतरण वास्तव में भारत में फॉसिल फ्यूल नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (एफएफ-एनपीटी) के मकसद को आगे बढ़ाने के लिए नैरेटिव चलाने के लिए किए जा रहे थे, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं.’
फॉसिल फ्यूल नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों की आपूर्ति को सीधे निशाना बनाकर जलवायु संकट पर काबू पाना है. हालांकि यह बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह नए जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं की मंजूरी समाप्त करने, मौजूदा उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से कम करने और देशों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण में वित्तीय व तकनीकी सहायता देने पर जोर देता है.
यह मुख्यतः एक वैश्विक नागरिक समाज अभियान है, जिसे सैकड़ों शहरों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित कई संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है.
अधिकारी ने यह भी दावा किया कि एसएसपीएल की गतिविधियां – जैसे खेती में ऑर्गेनिक तरीकों को बढ़ावा देना और किसानों को ऑर्गेनिक फल और सब्जियां बेचने में मदद करना सिर्फ़ दिखावे की गतिविधियां हैं – और इस कंपनी का असली मकसद विदेशी प्रभावशाली समूहों की ओर से भारत में एफएफ-एनपीटी को बढ़ावा देना है.
अखबार के अनुसार, नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि सिंह के आवास से लगभग 45 शराब की बोतलें मिलीं, जो आबकारी नियमों का उल्लंघन है. गाजियाबाद के सहायक आबकारी आयुक्त संजय सिंह ने कहा, ‘ईडी से मिली सूचना के आधार पर हमने हरजीत सिंह के आवास पर एक टीम भेजी है. आबकारी नियमों के उल्लंघन को लेकर एफआईआर दर्ज की जाएगी और कार्रवाई की जाएगी.’
एक दूसरे ईडी अधिकारी ने कहा कि इस एनजीओ को मुख्य रूप से क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क (सीएएन), ऑयस्टर एचआर और स्टैंड अर्थ से फंडिंग मिलती है.
वैश्विक जलवायु जगत में एक जाना-पहचाना नाम रहे हरजीत सिंह पिछले दो दशकों से गैर-सरकारी स्तर पर जलवायु मुद्दों की प्रभावशाली आवाज रहे हैं. वे पर्यवेक्षक संगठनों की ओर से अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित और संवेदनशील देशों के लिए बनाए गए ‘लॉस एंड डैमेज फंड’ की रूपरेखा तैयार करने में भी उनके महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा होती रही है. इस फंड की स्थापना वर्ष 2023 में दुबई में हुई थी.
विकसित देशों द्वारा जलवायु कार्रवाई में ढिलाई के खिलाफ ग्लोबल साउथ की एक मजबूत आवाज के रूप में हरजीत सिंह के विचार अक्सर मीडिया में स्थान पाते रहे हैं. हालिया साक्षात्कारों में उन्होंने अरावली पर्वतमाला की ऊंचाई को 100 मीटर मानने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की थी- जिस आदेश पर बाद में अदालत ने रोक लगा दी.
