जम्मू-कश्मीर: भाजपा कार्यकर्ताओं के रतले परियोजना में बाधा डालने के बाद कंपनी की निषेधाज्ञा की मांग

किश्तवाड़ ज़िले में भाजपा के नेताओं द्वारा रतले विद्युत परियोजना के काम में बाधा उत्पन्न करने के बाद एक महीने के भीतर दूसरी बार मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से निषेधाज्ञा लागू करने का आग्रह किया है. कंपनी ने इसके लिए 'कामगारों की सुरक्षा' और 'सार्वजनिक व्यवस्था संबंधी चिंताओं' का हवाला दिया है.

रतले हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट की साइट. (फोटो साभार: आरएचपीसीएल वेबसाइट)

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में एक महीने के भीतर दूसरी बार हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से किश्तवाड़ स्थित रतले विद्युत परियोजना स्थल पर निषेधाज्ञा लागू करने का आग्रह किया है.

कंपनी ने इसके लिए ‘कामगारों की सुरक्षा’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था संबंधी चिंताओं’ का हवाला दिया है.

मालूम हो कि यह घटनाक्रम गुरुवार (8 जनवरी) को जम्मू और कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा से जुड़े भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय परिहार और भाजपा की किश्तवाड़ विधायक शगुन परिहार द्वारा एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की उपस्थिति में रतले परियोजना का काम रोकने की धमकी देने के बाद सामने आया है.

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने किश्तवाड़ जिला प्रशासन पर ‘जनहित की रक्षा करने में विफल रहने’ और परियोजना में कथित तौर पर बाधा डालने वाले ‘भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं’ के खिलाफ ‘चुनिंदा तौर पर निष्क्रियता’ का आरोप लगाया है.

इस संबंध में किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा से बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब प्राप्त नहीं हो सका. जवाब मिलते ही इस खबर को अपडेट किया जाएगा.

‘गैरकानूनी विरोध प्रदर्शन’

ताज़ा घटनाक्रम के बाद शनिवार (9 जनवरी) को शर्मा को लिखे एक पत्र में एमईआईएल के रतले परियोजना प्रमुख हरपाल सिंह ने परिहार का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि ‘बाहरी लोगों’ का एक समूह पिछले महीने से किश्तवाड़ के द्राबशाला स्थित परियोजना स्थल पर ‘गैरकानूनी विरोध प्रदर्शन’ कर रहा है.

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, संजय परिहार, जो एक पूर्व सरपंच हैं और जिनके परिवार को परियोजना में जमीन खोए बिना ही करोड़ों रुपये के ठेके मिले हैं, को पिछले साल एक ठेके को पूरा न कर पाने के कारण एमईआईएल द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था.

भाजपा को 664 करोड़ रुपये के चुनावी बांड देने वाली सबसे बड़ी कंपनी द्वारा दंडात्मक कार्रवाई का सामना करने के बाद संजय परिहार किश्तवाड़ के स्थानीय लोगों के एक छोटे समूह का नेतृत्व कर रहे हैं, जो अक्सर द्राबशाला में परियोजना स्थल पर इकट्ठा होते हैं.

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा की मांग करते हुए सिंह ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन ‘कर्मचारियों, आगंतुकों और आपूर्ति में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं’ जिससे अरबों रुपये की इस बिजली परियोजना की प्रगति पर सीधा असर पड़ा है.

पत्र में कहा गया है, ‘परियोजना स्थलों पर किसी भी प्रकार की गैरकानूनी सभा, हड़ताल या बंद पर रोक लगाने के आपके कार्यालय से स्पष्ट निर्देश प्राप्त होने के बावजूद वे निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और परियोजना कार्य को बाधित करने के लिए लगातार अवैध गतिविधियां कर रहे हैं. इस तरह के जानबूझकर किए गए हस्तक्षेप से इस महत्वपूर्ण परियोजना की प्रगति पर सीधा असर पड़ा है.’

उल्लेखनीय है कि समर्थकों के एक छोटे समूह के साथ संजय परिहार ने शुक्रवार को एक बार फिर सहायक श्रम आयुक्त (किश्तवाड़) ममता सुदर्शन की उपस्थिति में रतले परियोजना का काम रोकने की धमकी दी, जो परियोजना स्थल के दौरे पर थीं.

रतले परियोजना के प्रमुख को धमकी

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित वीडियो में रतले परियोजना के प्रमुख सिंह, द्राबशाला साइट के बाहर सुदर्शन को छंटनी किए गए कर्मचारियों की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए दिखाई दे रहे हैं. जबकि मौके पर मौजूद परिहार सिंह से बहस करते और उन्हें धमकाने की कोशिश करते नज़र आ रहे हैं.

वीडियो में सिंह भाजपा कार्यकर्ता परिहार पर परियोजना में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए और उन्हें ‘बाहरी’ बताते हुए कहते हैं, ‘मैं आपसे बात नहीं करूंगा. मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति से बात नहीं करूंगा जो कर्मचारी नहीं है.’

इसके बाद परिहार सिंह को धमकी देते हुए कहते हैं, ‘फिर हम देखेंगे कि बाहरी लोग यहां कैसे काम करते हैं. अगर तुम गुंडागर्दी करोगे तो हम तुम्हें काम नहीं करने देंगे. अगर मैं कानून से बंधा न होता तो तुम्हें उल्टा लटका देता.’

इसके बाद दोनों के बीच बहस तेज़ हो जाती है और सिंह को ब्रीफिंग पूरी किए बिना ही लौट जाते हैं.

एमईआईएल के नवीनतम पत्र में पिछले साल 22 मई को किश्तवाड़ के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा बीएनएसएस की धारा 163 (1) के तहत जारी एक आदेश का जिक्र है, जिसमें किश्तवाड़ के सभी बिजली परियोजना स्थलों पर ‘गैरकानूनी सभा, हड़ताल या बंद” पर प्रतिबंध लगाया गया था.

उल्लेखनीय है कि 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने और हाल ही में हुए भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के मद्देनजर केंद्र सरकार ने चिनाब घाटी जिले में चार बिजली परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया है. यह जिला उत्तर भारत में स्वच्छ ऊर्जा के केंद्र के रूप में उभर रहा है.

किश्तवाड़ के कुछ स्थानीय लोगों और बिजली परियोजनाओं में कार्यरत वर्कर्स के विरोध के मद्देनजर जारी आदेश में किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया गया था कि वे अनुपालन सुनिश्चित करें और उल्लंघनकर्ताओं पर बीएनएसएस की धारा 223 और ‘अन्य संबंधित धाराओं’ के तहत मुकदमा चलाएं.

इस संबंध में किश्तवाड़ के पूर्व डीसी राजेश कुमार शावन के आदेश में कहा गया था, ‘राष्ट्रीय महत्व की इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पहले से ही अनुचित देरी हो रही है और इस तरह की अवैध हड़तालें/काम बंद करना न केवल गैरकानूनी हैं बल्कि सरकार के व्यापक हित के खिलाफ भी हैं.’

मालूम हो कि ये आदेश दो महीने के लिए वैध था.

इससे पहले नवंबर 2024 में किश्तवाड़ में पांच स्थानीय यूनियन नेताओं को विवादास्पद जम्मू और कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत बिजली परियोजनाओं में बाधा डालने के प्रयास के आरोप में हिरासत में लिया गया था, इस कदम की व्यापक आलोचना हुई थी.

एमईआईएल का यह ताजा पत्र कंपनी द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25-एफ के खंड (सी) के तहत रतले परियोजना से 320 कर्मचारियों की छंटनी का आदेश जारी करने के एक महीने से भी कम समय बाद आया है.

इस छंटनी के बाद किश्तवाड़ के कुंतवारा के सरपंच परिहार और उनके समर्थकों ने परियोजना स्थल पर विरोध प्रदर्शन किया था.

इसी कड़ी में छंटनी का आदेश सार्वजनिक होने के बाद 4 दिसंबर को द्राबशाला में हुए एक लक्षित हमले में एमईआईएल के रतले परियोजना के मानव संसाधन प्रबंधक बुरहान अंद्राबी घायल हो गए थे.

वहीं, स्थानीय भाजपा नेताओं ने कंपनी के शीर्ष प्रबंधन और कर्मचारियों पर आतंकवाद और पाकिस्तान से संबंध होने का झूठा आरोप लगाया था.

इससे पहले 17 दिसंबर को भी एमईआईएल ने निषेधाज्ञा की मांग की थी

पिछले साल 17 दिसंबर को भी एमईआईएल ने किश्तवाड़ के उपायुक्त को पत्र लिखकर परियोजना स्थल के एक किलोमीटर के दायरे में सभाओं पर रोक लगाने के लिए ‘तत्काल पुलिस तैनाती’ और ‘निषेध आदेश’ जारी करने की मांग की थी.

एमईआईएल ने 16 दिसंबर को उपायुक्त से यह भी आग्रह किया था कि किश्तवाड़ स्थित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आसिफ इकबाल नाइक के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 351 (आपराधिक धमकी) और 356 (आपराधिक मानहानि) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-ई और 67 के तहत मामला दर्ज किया जाए.

नाइक ने भाजपा नेताओं द्वारा लगाए गए उन झूठे आरोपों को हवा दी थी कि एमईआईएल की रतले परियोजना प्रबंधन और उसके कर्मचारियों के आतंकवाद और पाकिस्तान से संबंध हैं.

वरिष्ठ पीडीपी नेता और किश्तवाड़ से पूर्व सांसद फिरदौस टाक ने कहा कि यह विवाद जम्मू-कश्मीर भाजपा के शीर्ष नेताओं की ‘राजनीतिक उठापटक’ है, साथ ही उन्होंने एमईआईएल पर भाजपा नेताओं के निर्देश पर कर्मचारियों की भर्ती करने का आरोप लगाया.

फिरदौस ने बताया, ‘साइट पर काम करने वाले लगभग 90 प्रतिशत लोग भाजपा से जुड़े हुए हैं या स्वयं भाजपा के नेता हैं. अब जब कंपनी ने कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है, जिनमें से अधिकतर भाजपा समर्थक हैं, तो पार्टी जनता के लिए लड़ने की झूठी छवि पेश करने की कोशिश कर रही है.’

टाक ने आगे कहा, ‘केंद्रीय ऊर्जा मंत्री की किश्तवाड़ की हालिया यात्रा और भाजपा नेताओं को कंपनी प्रबंधन के साथ समन्वय करने के निर्देश इस मिलीभगत को स्पष्ट रूप से उजागर करते हैं. दोनों पक्ष जनता को गुमराह कर रहे हैं.’

मालूम हो कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार (4 जनवरी) को किश्तवाड़ का दौरा किया था और अपनी पार्टी के जम्मू-कश्मीर के नेताओं द्वारा रतले विद्युत परियोजना के कुछ कर्मचारियों को आतंकवाद और पाकिस्तान से जोड़ने के आरोपों को ‘स्थानीय मुद्दा’ बताकर खारिज कर दिया था.

इस संबंध में नेशनल कॉन्फ्रेंस के मीडिया विश्लेषक और राज्यसभा सांसद सज्जाद अहमद किचलू के बेटे शाहन सज्जाद किचलू ने कहा, ‘यह बेहद चिंताजनक है कि भाजपा के कुछ नेता और कार्यकर्ता खुलेआम बाधाएं खड़ी कर रहे हैं, परियोजना प्रबंधन, ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को धमकियां दे रहे हैं और ज़मीनी स्तर पर काम में रुकावट डाल रहे हैं. अगर कानून का शासन कायम रखना है, तो काम में बाधा डालने वालों को बिना किसी डर या पक्षपात के जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.’

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