नई दिल्ली: जर्मनी के शीर्ष राजनेताओं के लिए भारत अब एक नया पसंदीदा यात्रा गंतव्य बनता जा रहा है. हाल ही में विदेश मंत्री योहान वाडेफुल की यात्रा के बाद, अब चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए हैं.
सोमवार (12 जनवरी) को मैर्त्स अहमदाबाद (गुजरात) के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचे, जहां उनका स्वागत गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया.
Welcome to India! Willkommen in Indien!
Federal Chancellor Friedrich Merz @Bundeskanzler has arrived in Ahmedabad on an official visit. Warmly received by Hon’ble Governor of Gujarat, Shri Acharya Devvrat at the airport.
India and Germany are celebrating 75 years of… pic.twitter.com/Qw4ZkQ0FpP
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) January 12, 2026
इसके बाद पीएम मोदी और जर्मन चांसलर साबरमती आश्रम पहुंचे और महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की. दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव में भी भाग लिया. कल यानी मंगलवार को मैर्त्स बेंगलुरु में रुकेंगे.
Embracing Mahatma’s legacy together, celebrating shared values
PM @narendramodi along with @Bundeskanzler Friedrich Merz visited the Sabarmati Ashram, from where Gandhiji led the Dandi March. They paid floral tribute to Bapu and reflected on his enduring ideals.@Bundeskanzler… pic.twitter.com/SAoHWd5wNZ
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) January 12, 2026
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को लेकर जारी बयान में कहा है, ‘दोनों नेता भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे. यह साझेदारी पिछले साल 25 साल पूरे कर चुकी है.’
बयान के मुताबिक, मर्ज़ और मोदी व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मज़बूत करने पर चर्चा करेंगे. पद संभालने के बाद मैर्त्स भारत के पहले आधिकारिक दौरे पर हैं.
जर्मनी की भारत में बढ़ी है दिलचस्पी
दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत (जहां लगभग 1.45 अरब लोग रहते हैं) में जर्मनी की बढ़ती दिलचस्पी के पीछे आर्थिक और भू-राजनीतिक-दोनों वजहें हैं. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट) के एक अनुमान के मुताबिक, इस साल भारत की अर्थव्यवस्था चीन की तुलना में कहीं तेज़ी से बढ़ेगी. वहीं, जर्मनी लगभग तीन वर्षों से आर्थिक मंदी से जूझ रहा है.
जर्मनी कुशल कामगारों की सख़्त ज़रूरत से भी जूझ रहा है और ऐसी बड़ी संख्या उसे अब भारत में मिल रही है. इसी बीच, जर्मन विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में भारतीय सबसे बड़ा समूह बन चुके हैं.
बर्लिन स्थित जर्मन इंस्टिट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के भारत विशेषज्ञ क्रिश्चियन वैगनर कहते हैं, ‘भारत की ताक़त मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में है. भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के दफ़्तर की तरह काम करता है, जबकि चीन को वैश्विक अर्थव्यवस्था की फैक्ट्री कहा जा सकता है.’
वैगनर ने डीडब्ल्यू से कहा कि इस प्रक्रिया में भारत ने तेज़ी से विकास किया है, ‘यह शुरुआत कॉल सेंटर्स से हुई थी. अब बात रिसर्च सुविधाओं तक पहुंच गई है. कई बड़ी जर्मन कंपनियों ने अपने शोध संस्थान भारत में आउटसोर्स कर दिए हैं. और जो भारतीय छात्र हमारे यहां पढ़ने आते हैं, वे ज़्यादातर विज्ञान और इंजीनियरिंग में डिग्री लेते हैं.’
हाल के वर्षों में भारत के साथ जर्मनी का व्यापार काफ़ी बढ़ा है. उपलब्ध ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में यह बढ़कर 29 अरब यूरो (करीब 33.7 अरब डॉलर) तक पहुंच गया. हालांकि, यह अब भी चीन के साथ जर्मनी के कुल व्यापार के मुक़ाबले काफी कम है, जो उसी साल लगभग 246 अरब यूरो रहा.
