नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले की कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद में बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले के सह-आरोपी तुषार आप्टे को ‘को-ऑप्टेड’ पार्षद नियुक्त किए जाने पर हुई व्यापक आलोचना के बाद उसी दिन यह आदेश वापस ले लिया.
ज्ञात हो कि आप्टे उस स्कूल के तत्कालीन सचिव थे, जहां बदलापुर यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था.
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, नगर परिषद की अध्यक्ष रुचिता घोरपड़े ने आप्टे की नियुक्ति की पुष्टि की थी. शुक्रवार (9 जनवरी) को नगर परिषद के पांच को-ऑप्टेड पार्षदों के चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका स्वागत किया गया. इनमें से दो पार्षद भाजपा, दो शिवसेना और एक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की ओर से नामित किए गए.
आप्टे के अलावा नामित किए गए अन्य पार्षदों में शगुफ़ा गोरे (भाजपा), प्रभाकर पाटिल (एनसीपी) और दिलीप बैकर व हेमंत चतुर्वेदी (शिवसेना) शामिल हैं.
को-ऑप्टेड पार्षद वह होता है, जिसे जनता द्वारा सीधे चुने जाने के बजाय नगर परिषद के मौजूदा सदस्य किसी रिक्त पद को भरने के लिए चुनते और नियुक्त करते हैं.
उल्लेखनीय है कि आप्टे उस शैक्षणिक संस्था के सचिव थे, जहां कथित यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपराध की जानकारी होने के बावजूद इसकी रिपोर्ट नहीं की.
स्कूल परिसर में 24 वर्षीय अक्षय शिंदे द्वारा छात्राओं के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया था, जिसके बाद अभिभावकों और नागरिकों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे.
मुख्य आरोपी अक्षय शिंदे 12 अगस्त 2024 को ठाणे ज़िले के बदलापुर स्थित एक स्कूल के शौचालय में दो नाबालिग लड़कियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. बच्चों के यौन शोषण के मामले में शिकायत दर्ज न कराने के कारण स्कूल प्रबंधन के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम की धारा 21(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
घटना के 44 दिन बाद आप्टे को गिरफ्तार किया गया था और 48 घंटे के भीतर उन्हें ज़मानत मिल गई थी. यह मामला फिलहाल कोर्ट में है.
उसी साल 23 सितंबर को, नवी मुंबई की तलोजा जेल से पूछताछ के लिए ले जाते समय कथित पुलिस मुठभेड़ में मुख्य आरोपी की मौत हो गई थी. पुलिस का कहना था कि वैन में उसने एक पुलिसकर्मी से बंदूक छीनकर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में हुई गोलीबारी में वह मारा गया.
आप्टे को पार्षद बनाने के फैसले का बचाव करते हुए भाजपा पार्षद राजन घोरपड़े ने कहा कि आप्टे एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था के पदाधिकारी रहे हैं.
घोरपड़े ने कहा, ‘हालांकि उनका नाम आरोपी के तौर पर दर्ज किया गया था, लेकिन उनकी दोषसिद्धि नहीं हुई है. मुख्य आरोपी को पहले ही सज़ा मिल चुकी है. आप्टे ने पार्टी के लिए सक्रिय रूप से काम किया है और पार्टी उम्मीदवार की जीत में योगदान दिया, इसलिए उन्हें यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई.’
