नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्टों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां सामने आने के बाद कांग्रेस ने सोमवार (12 जनवरी) को मोदी सरकार के इस प्रमुख योजना में अनियमितताओं को लेकर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच की मांग की है.
कैग की रिपोर्ट में इस योजना के विभिन्न चरणों में बड़े पैमाने पर डेटा में हेरफेर, वित्तीय कुप्रबंधन और कमजोर निगरानी की ओर इशारा किया गया है.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता कन्नन गोपीनाथन ने पीएमकेवीवाई 2.0 और 3.0 के कैग ऑडिट का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)- ये मोदी सरकार की एक योजना थी, जिसके बारे में आप सभी ने सुना होगा।
हाल ही में इसकी CAG रिपोर्ट आई है, जिसमें 2015 से 2022 तक के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट ने PMKVY में भयंकर स्कैम का भंडाफोड़ किया है।
एक प्रोग्राम था- नेशनल… pic.twitter.com/Icru95OkCW
— Congress (@INCIndia) January 12, 2026
वर्ष 2015 से 2022 की अवधि के लिए किए गए इस ऑडिट में शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग (एसटीटी), रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) और स्पेशल प्रोजेक्ट्स (एसपी) की जांच की गई थी, और लाभार्थियों के डेटा, फंड के उपयोग और पात्रता मानकों के अनुपालन में गंभीर खामियां पाई गईं.
कैग रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों में योजना के तहत दर्ज 94.53% लाभार्थियों के बैंक खाते विवरण या तो शून्य दर्ज हैं, खाली छोड़े गए हैं या उपलब्ध ही नहीं हैं. इसके अलावा लाभार्थियों की तस्वीरों की नकल, अमान्य या बार-बार दोहराए गए मोबाइल नंबर जैसी गंभीर अनियमितताएं भी पाई गई हैं.
कैग ने यह भी पाया कि विशिष्ट नौकरी भूमिकाओं के लिए बाज़ार की मांग का कोई ठोस आकलन नहीं किया गया, और न ही उसके अनुरूप प्रशिक्षण दिया गया. इसका नतीजा यह रहा कि योजना के तहत कुल प्लेसमेंट दर केवल 41% रही.
गोपीनाथन ने कहा कि अक्टूबर 2024 में समीक्षा किए गए पीएमकेवीवाई 4.0 के डेटा में भी ये कमियां बनी रहीं.
ट्रेनर और असेसर से जुड़े रिकॉर्ड भी बेहद खराब पाए गए. 61 लाख से अधिक प्रमाणित उम्मीदवारों को शून्य या ‘नल’ ट्रेनर आईडी से जोड़ा गया था. कई बैचों में ट्रेनर का नाम ‘नल’ या ‘माइग्रेटेड डेटा’ दर्ज था, जिससे प्रशिक्षण की वास्तविकता पर भी सवाल खड़े होते हैं.
वित्तीय पहलू पर कैग ने बताया कि पीएमकेवीवाई के विभिन्न चरणों के लिए निर्धारित 14,450 करोड़ रुपये में से 10,194 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि 9,261 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल किया गया.
जुलाई 2023 तक 337.16 करोड़ रुपये अप्रयुक्त पड़े थे, वहीं 34 लाख से अधिक प्रमाणित उम्मीदवारों, लगभग 36 प्रतिशत को डीबीटी प्रोत्साहन राशि नहीं मिली थी. इस योजना के तहत हर प्रमाणित उम्मीदवारों को 500 रुपए दिए जाने का प्रावधान हैं.
ऑडिट में कई राज्यों में धन के गलत तरह के उपयोग की भी ओर इशारा किया गया है. गोपीनाथन ने बताया कि बिहार ने जारी किए गए 36.82 करोड़ रुपये में से केवल 5.96 करोड़ रुपये का ही उपयोग किया. ओडिशा ने 27.71 करोड़ रुपये में से 7.39 करोड़ रुपये खर्च किए और बची हुई 20.33 करोड़ रुपये की राशि को 6.39 करोड़ रुपये के ब्याज के साथ वापस किया, जबकि महाराष्ट्र में करीब 19 करोड़ रुपये बिना खर्च के पड़े रहे.
रिपोर्ट में आयु, शिक्षा और कार्य अनुभव से जुड़े मानकों के गंभीर उल्लंघन भी सामने आए हैं, जिनमें ड्राइवर और स्वरोज़गार दर्जी जैसी भूमिकाओं में कम उम्र के उम्मीदवारों को प्रमाणित किया जाना शामिल है.
इस रिपोर्ट को बेहद चिंताजनक बताते हुए गोपीनाथन ने कहा कि प्रणालीगत विफलताओं ने कौशल विकास योजना के उद्देश्यों को कमजोर कर दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस करदाताओं के पैसों के इस दुरुपयोग को संसद में उठाएगी और इसके लिए जवाबदेही तय करने की मांग करेगी.
कन्नन गोपीनाथन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘यह सरकार की अभूतपूर्व ‘स्कैमिंग स्किल्स’ को उजागर करता है. हमने 2015 से 2022 के दौरान स्किल इंडिया मिशन में हुए बड़े पैमाने के घोटाले को लेकर कैग रिपोर्ट पर प्रेस ब्रीफिंग की है. इस 10,000 करोड़ रुपये के घोटाले की कैग रिपोर्ट में 95 प्रतिशत फर्जी बैंक खाते, 96 प्रतिशत फर्जी मोबाइल नंबर और 97 प्रतिशत फर्जी असेसर विवरण सामने आए हैं. आपका वह टैक्स का पैसा, जो आपके हाथ में आने से पहले ही कट जाता है, कौशल विकास के नाम पर लूट लिया गया है.
ज्ञात हो कि कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की यह योजना जुलाई 2015 में शुरू की गई थी. 2015 से 2022 के बीच पीएमकेवीवाई के तीन चरण लागू किए गए, जिन पर लगभग 4,450 करोड़ रुपये खर्च हुए और 1.32 करोड़ उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण या प्रमाणन देने का लक्ष्य रखा गया था.
