नई दिल्ली: राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने सोमवार (12 जनवरी) को महायुति के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार को ‘मुख्यमंत्री-माझी लाडकी बहिन’ योजना की जनवरी की किस्त समय से पहले जारी करने से रोक दिया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग का यह स्पष्टीकरण ख़बरों के जरिये सामने आई कई शिकायतों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि योजना के लाभार्थियों को मकर संक्रांति उपहार के रूप में 14 जनवरी से पहले उनके बैंक खातों में दिसंबर और जनवरी की किस्तों को मिलाकर 3,000 रुपये मिलेंगे.
मालूम हो कि एक सप्ताह पहले भाजपा मंत्री गिरीश महाजन ने टीवी पर घोषणा की थी कि इस योजना के तहत लाभान्वित महिलाओं को भारतीय त्योहार मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी से पहले दिसंबर और जनवरी की 3,000 रुपये की संयुक्त राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी.
उन्होंने इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से प्रिय बहनों को ‘विशेष उपहार’ बताया था.
अब राज्य चुनाव आयोग ने नगर निगम चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने का हवाला देते हुए सरकार को इस योजना की अग्रिम किस्त जारी करने पर रोक लगा दी है.
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत नियमित या लंबित किश्तों का भुगतान किया जा सकता है. लेकिन आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान कोई अग्रिम भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा.
चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा था
उल्लेखनीय है कि आयोग ने रविवार (10 जनवरी) को इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण की मांग की थी कि क्या सरकार चुनावों से ठीक पहले दो महीने की किस्तें एक साथ वितरित करने की योजना बना रही है.
इसके बाद मुख्य सचिव ने अपने जवाब में बताया था कि लाडकी बहिन योजना एक सतत योजना है और चुनाव घोषणा से पहले शुरू होने वाली ऐसी योजनाओं को आचार संहिता के दौरान जारी रखने की अनुमति है.
राजस्व मंत्री और नागपुर जिला संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि लाडकी बहिन योजना नगर निगम चुनावों की घोषणा से काफी पहले शुरू की गई थी और इसका चुनावी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है.
ज्ञात हो कि दिशानिर्देशों के अनुसार, चुनाव की घोषणा से पहले शुरू किए गए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान जारी रखने की अनुमति है.
हालांकि, कांग्रेस की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि चुनाव की पूर्व संध्या पर दो महीने की किश्तें जारी करना ‘सामूहिक सरकारी रिश्वत’ के बराबर है और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है.
पार्टी ने तर्क दिया था कि यह कदम एक करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया गया है और आयोग से आग्रह किया कि वह सरकार को मतदान पूरा होने तक किश्तों का ट्रांसफर स्थगित करने का निर्देश दे.
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना के तहत योग्य महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति को मिली ऐतिहासिक जीत के पीछे इस घोषणा को अहम कारक माना जाता है.
बिहार का सबक?
गौरतलब है कि इससे पहले हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत योग्य महिलाओं के खातों में पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये जमा किए गए थे.
यह योजना अपने समय को लेकर आलोचनाओं के घेरे में रही थी, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव से करीब दो महीने पहले इसकी घोषणा की थी.
ख़बरों के मुताबिक, इस योजना के तहत राज्य भर में 1.5 करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपये दिए गए, जिसने कथित तौर पर बड़े पैमाने पर राज्य की महिला मतदाओं को लुभाने का काम किया था, जिसके चलते राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल की.
इसे लेकर चुनाव आयोग की भी खूब किरकिरी हुई थी. ऐसे में अब महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले आयोग की ये रोक बिहार का एक सबक या वहां पलीद हुई मिट्टी को लेकर अपनी छवी साफ़ करने की एक कोशिश नज़र आती है.
