बीएमसी चुनाव: उद्धव ठाकरे की मुंबई पर दशकों पुरानी पकड़ ख़त्म, महायुति की जीत

बीएमसी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना गठबंधन ने मिलकर 227 में से 118 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, पहली बार ठाकरे परिवार को बीएमसी से नियंत्रण गंवाना पड़ा, जिस पर वह करीब तीन दशकों से शासन कर रहा था.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और एकनाथ शिंदे. (फाइल फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: देश के सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं और इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना गठबंधन ने मिलकर जीत दर्ज की है. वहीं, पहली बार ठाकरे परिवार को बीएमसी से नियंत्रण गंवाना पड़ा, जिस पर वह करीब तीन दशकों से शासन कर रहा था.

इस चुनावी मुकाबले में छह प्रमुख राजनीतिक दल मैदान में थे – भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट), शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) (अजित पवार गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) (शरद पवार गुट).

इसके अलावा एआईएमआईएम, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई सीटों पर चुनाव लड़ा.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, बीएमसी चुनावों में 227 में से 118 सीट जीतकर भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने बहुमत के लिए जरूरी 114 सीट के आंकड़े को पार कर लिया. भाजपा ने यहां सबसे अधिक 89 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीटों पर जीत मिली.

मालूम हो कि अविभाजित शिवसेना ने 1997 से 25 वर्षों तक इस नगर निकाय पर शासन किया था. इस बार बीएमसी में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) को 65 सीटें और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं. वहीं, कांग्रेस को 24 सीटों पर संतोष करना पड़ा है.

इसके अलावा अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएमआईएम) ने आठ, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने छह सीट जीतीं. अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने तीन, समाजवादी पार्टी ने दो और एनसीपी (शरद पवार गुट) ने 1 सीट जीती है. यहां नौ साल के अंतराल के बाद हुए इन बहुचर्चित चुनावों में दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की.

द हिंदू के मुताबिक, इससे पहले 2017 में हुए बीएमसी के पिछले चुनाव में कुल 227 सीटों में से शिवसेना 84 सीटें जीतकर सबसे आगे रही थी, जबकि भाजपा को 82 सीटें मिली थी.

इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 31 सीटें, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 9 सीटें, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को 7 सीटें, समाजवादी पार्टी को 6 सीटें, निर्दलीय उम्मीदवार को 5 सीटें, एमआईएमआईएम को 2 सीटें और अखिल भारतीय सेना को 1 सीट मिली पर जीत मिली थी.

हालांकि, इन नतीजों को देखें, तो शिवसेना के मौजूदा दावेदार एकनाथ शिंदे को मुंबई में केवल 29 सीटें मिलीं. ये परिणाम मुंबई के प्रमुख मराठी भाषी क्षेत्रों में ठाकरे परिवार द्वारा एकनाथ शिंदे को पछाड़ देने के बाद मराठी वोट बैंक के एकीकरण को दर्शाते हैं.

शिवसेना (यूबीटी) ने हार के लिए एकनाथ शिंदे को जिम्मेदार ठहराते हुए दावा किया कि अगर शिंदे न होते तो भाजपा मुंबई में कभी भी अपना मेयर नहीं देख पाती.

शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने शुक्रवार(16 जनवरी) रात पोस्ट किया, ‘मराठी भाषी लोग एकनाथ शिंदे को ‘जयचंद’ के रूप में याद रखेंगे.’

हालांकि, उद्धव ठाकरे बीएमसी सीट हार गए, लेकिन नतीजों से संकेत मिलता है कि उन्हें करारी हार नहीं मिली. बल्कि, उन्होंने मराठी वोट बैंक के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में खुद को साबित किया और भाजपा के बाद दूसरे सबसे अधिक सीटें हासिल कीं.

मालूम हो कि इन चुनावों में ठाकरे (उद्धव-राज) और पवार परिवारों के दो महत्वपूर्ण राजनीतिक गठबंधनों ने फिलहाल अपने मतभेदों को सुलझा लिया है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वे असफल हो रहे हैं.

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा की शानदार जीत पर मतदाताओं को धन्यवाद दिया. पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में जनता को धन्यवाद करते हुए कहा, ‘राज्य की ऊर्जावान जनता ने एनडीए के जनहितैषी सुशासन के एजेंडे को आशीर्वाद दिया है.’

गौरतलब है कि 2017 के चुनावों में भाजपा को 82 सीटें मिली थीं, जो बीएमसी में उसका अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था. इससे पहले भाजपा पारंपरिक रूप से बीएमसी से दूर रही थी. बताया जाता है कि शिवसेना के साथ भाजपा का एक अलिखित समझौता था, जिसके तहत शिवसेना मुंबई की देखरेख करती थी, और भाजपा राज्य के बाकी हिस्सों की.

2019 के बाद जब महाराष्ट्र में सत्ता समीकरण तेजी से बदले, तो शिवसेना में फूट पड़ गई और उद्धव ठाकरे भाजपा के कट्टर विरोधी बन गए. जिसके बाद इस बार भाजपा ने बीएमसी में अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ दिया है, और 2029 के चुनावों में ‘शत प्रतिशत भाजपा’ के लक्ष्य पर उसकी नजर है.

मुंबई के 36 विधायकों में से भाजपा के पास 15 सीटें हैं. लेकिन शिवसेना (यूबीटी) की तुलना में मुंबई में शिवसेना का कमजोर प्रदर्शन यह दर्शाता है कि शहर किसे असली शिवसेना मानता है.

इस संबंध में एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने द हिंदू से कहा कि हालांकि ठाकरे परिवार के पक्ष में मराठी वोट बैंक एकजुट हो गया है, लेकिन भाजपा ने अपना मूल मराठी वोट बैंक नहीं खोया है.

उन्होंने आगे कहा, ‘हमें  गैर-मराठी वोट बैंक और हमारे मुख्य मराठी मतदाताओं ने भी हमें वोट दिया. इससे हमें जीत मिली.’