नई दिल्ली: पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में आरोपी 17 लोगों में शामिल श्रीकांत पांगारकर ने महाराष्ट्र के जालना नगर निकाय चुनाव में जीत दर्ज की है. निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे पांगारकर को 2,621 वोट मिले.
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को 144 वोटों से हराया. जालना से जीत के बाद पांगारकर अब जालना नगर निगम परिषद में वार्ड 13-डी से पार्षद के रूप में काम करेंगे. वार्ड 13 में शिवसेना (शिंदे गुट) ने उम्मीदवार नहीं उतारा था.
बताया जा रहा है कि पांगारकर की पुरानी पार्टी शिवसेना ने जालना चुनाव में उनकी निर्दलीय उम्मीदवारी का समर्थन किया था. हालांकि मीडिया से बातचीत में पांगारकर ने इसका खंडन किया, लेकिन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में भविष्य में वापसी की संभावना से इनकार भी नहीं किया.
पांगारकर का शिवसेना से पुराना संबंध रहा है. वे 2001 से 2006 के बीच पार्टी से पार्षद रह चुके हैं. वर्ष 2024 में उन्होंने शिंदे-नेतृत्व वाली शिवसेना में दोबारा शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या जैसे गंभीर आरोपों के चलते विरोध के बाद यह कदम वापस लेना पड़ा.
शिंदे गुट की ओर से उनके खिलाफ उम्मीदवार न उतारे जाने से भी जीत में उन्हें मदद मिली.
मालूम हो कि 5 सितंबर 2017 को पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मार कर हत्या कर दी गई थी.
गौरी लंकेश हत्या मुकदमा
लंकेश की हत्या के लगभग एक दशक बाद भी पांगारकर और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला कर्नाटक के बेंगलुरु में ट्रायल स्टेज में है. हत्या की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया था. यह हत्या दिनदहाड़े बाइक सवार हमलावरों ने की थी, जिनकी तस्वीरें सीसीटीवी में कैद हुई थीं, एसआईटी ने 2018 में वह वाहन भी बरामद किया था.
एसआईटी ने 2018 में करीब 650 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. हत्या के चार साल बाद नवंबर 2021 में आरोप तय हुए थे, लेकिन अब तक फैसला नहीं आया है.
बेंगलुरु सिटी एंड सेशंस कोर्ट के भीतर गठित विशेष अदालत में मुकदमा चल रहा है. आरोपियों पर कर्नाटक कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट, आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आरोप लगाए गए हैं.
जमानत और ट्रायल में देरी
सितंबर 2024 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने पांगारकर को इस आधार पर जमानत दी कि वे 2018 से करीब छह साल जेल में रहे हैं और ट्रायल के पूरा होने के आसार नहीं दिख रहे थे. ट्रायल 2022 में शुरू हुआ था. अन्य कई आरोपी भी 2025 की शुरुआत से जमानत पर हैं.
पांगारकर के सह-आरोपी मोहन नायक को दी गई जमानत को अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल में देरी के आधार पर बरकरार रखा था. सितंबर 2025 तक आठ आरोपियों को ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत मिल चुकी थी.
स्वतंत्र निगरानी संस्थाओं का कहना है कि अब भी 100 से अधिक गवाहों की गवाही बाकी है. ट्रायल शुरू होने के बाद से गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं, लेकिन प्रगति बेहद धीमी है.
पांगारकर के ख़िलाफ़ अन्य मामले भी
पांगारकर पर हत्या के अलावा ‘हथियारों की तस्करी’ जैसे आरोप भी लगे हैं. 2018 में एसआईटी के सामने एक गवाह ने दावा किया था कि पांगारकर ने लंकेश के हत्यारों को हथियार खरीदने के लिए वित्तीय मदद दी थी. उस वक्त पांगारकर पहले से ही मुंबई में न्यायिक हिरासत में थे. महाराष्ट्र पुलिस की आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने अगस्त 2018 में उन्हें गोला-बारूद, देसी बमों की तस्करी और ठिकानों की रेकी के आरोप में गिरफ्तार किया था. उन पर यूएपीए के तहत भी आरोप लगे थे.
‘नालासोपारा हथियार ज़ब्ती मामला’ नाम से मशहूर केस में महाराष्ट्र हाई कोर्ट ने अगस्त 2024 में पांगारकर और चार अन्य आरोपियों को जमानत दी थी.
जांच एजेंसियों का यह भी आरोप है कि लंकेश की हत्या में इस्तेमाल हथियार का इस्तेमाल इससे पहले अगस्त 2015 में कर्नाटक के तर्कवादी प्रोफेसर एमएम कलबुर्गी की हत्या में भी हुआ था.
पांगारकर ने कहा, ‘जनता की अदालत से न्याय’
16 जनवरी को चुनाव जीतने के बाद पांगारकर ने कहा, ‘मुझे जनता की अदालत से न्याय मिला है. गौरी लंकेश हत्या मामला न्यायालय में विचाराधीन है और मैं निर्दोष हूं. मेरे खिलाफ आरोप अब तक साबित नहीं हुए हैं.’
इस मामले में पुलिस ने कुल 18 आरोपियों की पहचान की थी, जिनमें से 17 को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक आरोपी वर्षों तक फरार रहा.
