नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार से कहा कि वह भाजपा नेता और राज्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति देने पर दो हफ्ते के भीतर फैसला करे. मामला कर्नल सोफिया कुरैशी को कथित रूप से निशाना बनाने वाली उनकी टिप्पणियों से जुड़ा है.
लाइव लॉ के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बताया कि अदालत द्वारा मई में गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है और अब राज्य सरकार से अभियोजन की मंजूरी का इंतज़ार किया जा रहा है.
अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत, जो सांप्रदायिक घृणा और वैमनस्य फैलाने से जुड़े अपराधों से संबंधित है, किसी भी कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की मंजूरी ज़रूरी है.
यह मामला 13 मई को मध्य प्रदेश के महू में आयोजित एक कार्यक्रम में विजय शाह द्वारा दिए गए बयान से जुड़ा है. उस कार्यक्रम में शाह ने कहा था कि जिन्होंने ‘भारत की बेटियों को विधवा किया’, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘उनकी ही बिरादरी की बहन को भेजकर’ सबक सिखाया है. उन्होंने यह टिप्पणी तुरंत दोहराई भी थी.
हालांकि, शाह ने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि यह बयान कर्नल सोफिया कुरैशी की ओर इशारा करता है. कर्नल कुरैशी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ताओं में से एक रही हैं.
14 मई 2024 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मंत्री की टिप्पणी ‘किसी और की नहीं बल्कि’ कर्नल कुरैशी की ओर ही संकेत करती है.
इसके बाद शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. उन पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने, समुदायों के बीच सौहार्द बिगाड़ने और ऐसे बयान देने का आरोप है, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है.
इस कार्रवाई के बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इससे पहले 13 मई को उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को ‘किसी दूसरे संदर्भ में’ नहीं देखा जाना चाहिए.
शाह ने कहा था कि अगर उनकी टिप्पणी से ‘समाज और धर्म’ को ठेस पहुंची है तो वे ‘दस बार’ माफी मांगने को तैयार हैं. अगले दिन उन्होंने एक और बयान जारी कर कहा कि वे अपनी टिप्पणी को लेकर ‘शर्मिंदा और दुखी’ हैं और कर्नल सोफिया कुरैशी की सराहना की.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को उनकी माफी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित कर दी थी. अदालत ने शाह की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में एसआईटी ने राज्य सरकार को मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने का प्रस्ताव भेजा था. लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया.
सोमवार की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता श्रीधर पोत्तराजू से कहा, ‘हम अब जनवरी 2026 में हैं.’ इसके जवाब में पोत्तराजू ने कहा कि मंजूरी में देरी की एक वजह यह हो सकती है कि शाह की एफआईआर रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
वहीं, विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने अदालत को बताया कि मंत्री माफी मांग चुके हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं. इस पर जस्टिस कांत ने टिप्पणी की, ‘आप जांच में सहयोग करते रहिए.’
लाइव लॉ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अब तक रिकॉर्ड पर कोई औपचारिक माफी दाखिल नहीं की गई है. अदालत ने कहा, ‘अब माफी देने में बहुत देर हो चुकी है.’ पीठ ने यह भी याद दिलाया कि वह पहले ही इस तरह की माफियों पर अपनी राय जता चुकी है.
13 मई की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने शाह की टिप्पणियों को ‘अशोभनीय’ और ‘पूरी तरह से बिना सोचे-समझे दिया गया’ बताया था और उनकी सार्वजनिक माफी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
सोमवार को अदालत ने यह भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट में शाह द्वारा पहले भी दिए गए कुछ अन्य कथित आपत्तिजनक बयानों का ज़िक्र है. कोर्ट ने जांच टीम को निर्देश दिया है कि इन मामलों में प्रस्तावित कार्रवाई पर अलग से रिपोर्ट दाखिल की जाए.
