ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच ईयू प्रमुख का दावा- भारत और यूरोप के बीच जल्द होगा बड़ा समझौता

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेर लेयेन ने कहा है कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता अंतिम चरण में है. यह समझौता यूरोपीय संघ को भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में रणनीतिक बढ़त देगा. ट्रंप प्रशासन की हालिया नीतियों के बीच दोनों पक्ष समझौते को जल्द अंतिम रूप देना चाहते हैं.

(फोटो साभार: एक्स/@vonderleyen)

नई दिल्ली: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को कहा कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है. उनके अनुसार, यह समझौता 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ को भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में ‘पहली बढ़त’ (फर्स्ट मूवर एडवांटेज) दिलाएगा.

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब भी अनिश्चित बना हुआ है. साथ ही, अमेरिका द्वारा यूरोपीय संघ पर संभावित ऊंचे टैरिफ लगाने की धमकियों और भारतीय वस्तुओं पर अगस्त 2025 से 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की चेतावनियों ने वैश्विक व्यापार माहौल को और जटिल बना दिया है.

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के दौरान दिए गए अपने भाषण में उर्सुला फ़ॉन डेर लेयेन ने कहा कि वह दावोस के तुरंत बाद भारत की यात्रा करेंगी. उन्होंने कहा, ‘अभी कुछ मुद्दों पर काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद क़रीब हैं. कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ़ ऑल डील्स’ भी कह रहे हैं.’ उनके मुताबिक, यह समझौता करीब दो अरब लोगों का साझा बाज़ार तैयार करेगा और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक चौथाई हिस्से को कवर करेगा.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह समझौता यूरोप को दुनिया के सबसे तेज़ी से उभरते और गतिशील क्षेत्रों में से एक के साथ रणनीतिक बढ़त दिलाएगा. अमेरिका की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों पर परोक्ष हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोप इस सदी के ‘विकास केंद्रों’ के साथ व्यापार करना चाहता है, चाहे वह लैटिन अमेरिका हो या इंडो-पैसिफिक क्षेत्र. उनके शब्दों में, ‘यूरोप हमेशा दुनिया को चुनेगा, और दुनिया भी यूरोप को चुनने के लिए तैयार है.’

उर्सुला फ़ॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सैंटोस दा कोस्टा अगले सप्ताह भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. दोनों नेता 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की संयुक्त अध्यक्षता भी करेंगे.

भारत सरकार भी इस समझौते को लेकर आशावादी है. पिछले सप्ताह केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-ईयू व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ़ ऑल डील्स’ करार दिया था. उन्होंने कहा था कि यह समझौता व्यापक होगा और इसमें दोनों पक्षों के हितों व संवेदनशीलताओं का संतुलन रखा जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि इस पर 26 जनवरी के आसपास हस्ताक्षर हो सकते हैं.

भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह व्यापार समझौता वर्षों से बातचीत के दौर से गुजर रहा है. इसकी शुरुआत 2007 में हुई थी, लेकिन 2013 में वार्ता ठप पड़ गई थी. इसके बाद जुलाई 2022 में बातचीत दोबारा शुरू हुई, जिसके बाद अब जाकर दोनों पक्ष किसी ठोस नतीजे के क़रीब पहुंचे हैं.

हाल के महीनों में इन वार्ताओं में इसलिए भी तेजी आई है क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की व्यापार नीतियों को अधिक संरक्षणवादी दिशा में मोड़ दिया है. इससे कई देशों को वैकल्पिक बाज़ारों और नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश करनी पड़ रही है.

इस समझौते के पीछे चीन को लेकर साझा चिंता भी एक अहम कारण है. भारतीय उद्योगों को, खासकर सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में, चीनी उत्पादों की कीमतों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, यूरोपीय संघ को भी अहम और उभरती तकनीकों में चीन के बढ़ते वर्चस्व को लेकर चिंता है, क्योंकि इससे उसकी आपूर्ति शृंखला और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोखिम बढ़ सकता है.

व्यापारिक हितों की बात करें तो भारत कपड़ा, जूते, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में यूरोपीय बाज़ार तक बेहतर पहुंच चाहता है. दूसरी ओर, यूरोपीय संघ की नजर भारतीय बाज़ार में अपने ऑटोमोबाइल और पेय पदार्थ उद्योग के लिए अधिक अवसर हासिल करने पर है.

कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. अब तक 24 में से 20 चैप्टर्स पर सहमति बन चुकी है और यूरोपीय संघ के नेताओं की इस महीने के अंत में होने वाली भारत यात्रा से पहले समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है.