नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा द्वारा मुसलमानों को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर ने सीएम पर कार्रवाई की मांग की है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने कहा है कि असम के सीएम को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.
इससे पहले मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने शर्मा के ख़िलाफ दिल्ली के हौज़ ख़ास पुलिस थाने में शिकायत कर, एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. इस शिकायत के बाद हिमंता ने मंदर के ख़िलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सौ केस फाइल करने की धमकी दी है.
जस्टिस लोकुर ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर ने कहा है कि बांग्ला भाषी मुसलमानों के खिलाफ घृणास्पद बयान देने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि ये टिप्पणियां असंवैधानिक हैं, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ती हैं और ऐसे में मुख्यमंत्री को पद से इस्तीफा देना चाहिए.
द वायर के लिए वरिष्ठ पत्रकार करण थापर को दिए एक साक्षात्कार में जस्टिस लोकुर ने बांग्ला भाषी मुसलमानों को ‘मिया’ कहने और उनकी ‘जिंदगी मुश्किल बनाने’ वाले बयानों को हेट स्पीच करार देते हुए ‘निंदा’ की है. उन्होंने कहा कि ये टिप्पणियां सिर्फ़ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उकसावे की श्रेणी में आती हैं, जो कानून-व्यवस्था को गंभीर रूप से बाधित कर सकती हैं.
जस्टिस लोकुर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा द्वारा 27 जनवरी को दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे. इन बयानों में मुख्यमंत्री ने लोगों से ‘मियाओं’ आर्थिक रूप से परेशान करने की अपील की थी और भाजपा कार्यकर्ताओं को उनके नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए शिकायतें दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया था.
शर्मा ने यह भी दावा किया था कि चार से पांच लाख बांग्ला भाषी मुसलमानों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए दिए जाएंगे.
जस्टिस लोकुर ने कहा, ‘मुख्यमंत्री ने जो कहा है, उसका किसी भी तरह से समर्थन नहीं किया जा सकता. उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.’ शर्मा के भाषण का एक उदाहरण देते हुए जस्टिस लोकुर ने उस बयान का भी ज़िक्र किया, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगर कोई रिक्शा चालक पांच रुपये किराया मांगे, तो उसे ‘परेशान करने’ के लिए केवल चार रुपये ही दिए जाएं.
जस्टिस लोकुर ने ज़ोर देकर कहा कि किसी मुख्यमंत्री का संवैधानिक दायित्व नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है, न कि किसी ख़ास समुदाय के ख़िलाफ़ उत्पीड़न को उकसाना. उन्होंने कहा, ‘शर्मा ठीक इसका उलटा कर रहे हैं. वह कानून-व्यवस्था की स्थिति भड़काने का काम कर रहे हैं.’
जस्टिस लोकुर ने कहा कि इस तरह के कदम के ख़िलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत आपराधिक मामला चलाया जा सकता है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही नफ़रत भरे भाषण के मामलों में पुलिस को बिना औपचारिक शिकायत का इंतज़ार किए स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का निर्देश दे चुका है.
इस घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने ‘मिया’ शब्द का बचाव यह कहते हुए किया था कि बांग्ला भाषी मुसलमान खुद को ‘मिया’ ही कहते हैं, इसलिए यह शब्द अपमानजनक नहीं है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस लोकुर ने कहा कि किसी शब्द का संदर्भ ही निर्णायक होता है.
जस्टिस गोविंद माथुर ने क्या कहा?
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने हिमंता बिस्वा शर्मा के उस बयान को ‘अत्यंत निंदनीय’ बताया है, जिसमें उन्होंने मुसलमानों को परेशान करने की बात कही थी.
जस्टिस माथुर ने कहा है कि किसी मुख्यमंत्री द्वारा नागरिकों को धर्म के आधार पर निशाना बनाना न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि यह संविधान की मूल भावना पर सीधा हमला है.
गोविंद माथुर ने कहा है कि मुख्यमंत्री द्वारा यह कहना कि मुसलमानों को इस हद तक परेशान किया जाए कि वे असम छोड़ दें, बेहद गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक है. उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, और यह प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है.
पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत किसी बहुसंख्यक भावना से नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता से शासित होता है. संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, अनुच्छेद 15 धर्म के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है और अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करता है. एक मुख्यमंत्री के रूप में हिमंता बिस्वा शर्मा ने संविधान की रक्षा की शपथ ली है और उनके शब्द राज्य की सत्ता का भार लिए होते हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई संवैधानिक पदाधिकारी डर, बहिष्कार और घृणा फैलाता है, तो वह भारतीय गणराज्य की नींव को कमजोर करता है. माथुर के अनुसार, इस तरह के सांप्रदायिक कृत्य समाज में पूर्वाग्रह को सामान्य बनाते हैं और नफरत को बढ़ावा देते हैं.
गोविंद माथुर ने कहा कि जो नेता नागरिकों को धार्मिक आधार पर बांटते हैं, वे भारत जैसे संवैधानिक लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं हो सकते. उन्होंने कहा कि जब कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति निष्पक्षता और समानता से विचलित होता है, तो उसके पद पर बने रहने की उपयुक्तता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
अपने बयान के अंत में पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत की ताकत एकता, विवेक और कानून के शासन में है, न कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में. उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सांप्रदायिक घृणा फैलाना कानूनन अपराध है और ऐसा करने वाले व्यक्ति को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.
मंदर ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत
इस सप्ताह की शुरुआत में मंदर ने दिल्ली के हौज़ ख़ास पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बीएनएस की उन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है जो दुश्मनी फैलाने, राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक दावों, सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयानों और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से किए गए कृत्यों से संबंधित हैं. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वह इस शिकायत की जांच कर रही है.
शिकायत में हर्ष मंदर ने 27 जनवरी को दिए गए हिमंता बिस्वा शर्मा के बयानों का हवाला दिया है, जिनमें उन्होंने असम में बंगाली मूल के मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द ‘मिया’ का उल्लेख करते हुए लोगों से उन्हें ‘परेशान करने’ की अपील की थी.
हर्ष मंदर ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की प्रासंगिक धाराओं (जिसमें धारा 196, 197, 299, 302 और 353 शामिल हैं) के तहत तत्काल कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. उन्होंने मामले की विधिवत जांच कराने और राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान इस तरह के और बयानों को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने का भी अनुरोध किया है.
शनिवार को मंदर द्वारा दर्ज कराई गई इसी शिकायत का ज़िक्र करते हुए शर्मा ने कहा, ‘उन्होंने मेरे ख़िलाफ़ सिर्फ़ एक मामला दर्ज किया है. आप देखिए, अब मैं उनके ख़िलाफ़ कम से कम 100 मामले दर्ज करूंगा, क्योंकि इसके लिए मेरे पास ज़रूरी सामग्री है.’
कौन हैं ये हर्ष मंदर? NRC के नाम पर इस व्यक्ति ने धंधा चलाया और असम को बर्बाद किया. pic.twitter.com/uLEWS2aXpk
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) January 31, 2026
सीएम की इस धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए हर्ष मंदर ने द वायर हिंदी से कहा कि इन धमकियों का उनके काम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, वह अल्पसंख्यकों के लिए काम करते रहेंगे.
मंदर ने कहा, ‘आरएसएस-भाजपा की विचारधारा में सौ साल पहले से यह धारणा है कि एक मजहब के लोग इस देश में बराबर के नागरिक की हैसियत नहीं रख सकते. गांधी जी की हत्या भी इसीलिए हुई थी कि उन्होंने कहा था कि यह देश सबके लिए बराबर है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘यह बेहद ही विचित्र है कि पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए कानूनी व मानवाधिकार सहायता पहुंचाना अपराध है, आज तक देश के कानून में ऐसा कहीं नहीं है. अगर वे नया कानून बना रहे हैं तो अलग बात है. किस कानून के तहत क्या केस दर्ज कराएंगे पता नहीं.’
