नई दिल्ली: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने लोकसभा को बताया है कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने बीते पांच वित्तीय वर्षों- 2020-21 से 2024-25 के बीच कुल 405 एयर प्यूरीफायर खरीदे हैं.
यह जानकारी तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में दी गई. इस प्रश्न का जवाब 5 फरवरी को राज्य मंत्री टोखन साहू ने दिया.
साल-दर-साल आंकड़े राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता के तेजी से बिगड़ने की तस्वीर पेश करते हैं.
मंत्रालय के अनुसार, 2020-21 में सीपीडब्ल्यूडी ने कोई भी एयर प्यूरीफायर नहीं खरीदा था. 2021-22 में यह संख्या 24 रही, जो 2022-23 में बढ़कर 81 हो गई. इसके बाद 2023-24 में इसमें तेज़ उछाल आया और 144 यूनिट एयर प्यूरीफायर खरीदे गए.
वहीं, 2024-25 में सीपीडब्ल्यूडी ने 156 एयर प्यूरीफायर खरीदे.
सरकार के जवाब में बताया गया है कि ये एयर प्यूरीफायर विभिन्न सरकारी और उच्च-प्रोफ़ाइल परिसरों में लगाए गए हैं. इनमें सुप्रीम कोर्ट के जजों और रजिस्ट्रारों के कक्ष व कार्यालय, अदालत कक्ष, केंद्रीय मंत्रियों के कार्यालय, तथा वीवीआईपी लाउंज और डाइनिंग हॉल शामिल हैं.
इसके अलावा, संसद परिसर, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, लोकसभा और राज्यसभा सचिवालयों, और विभिन्न केंद्रीय सरकारी कार्यालयों को भी ये उपकरण दिए गए.
बताया गया है कि नई दिल्ली में निर्माण भवन, सेवा भवन और विज्ञान भवन में स्थित मंत्रालयों और विभागों में भी एयर प्यूरीफायर लगाए गए हैं. जोधपुर और वाराणसी में स्थित सीपीडब्ल्यूडी कार्यालय भी इसके लाभार्थियों में शामिल हैं.
महुआ मोइत्रा ने मंत्रालय से एयर प्यूरीफायर के मेक, मॉडल, लागत और अन्य तकनीकी विवरणों के साथ-साथ यह भी पूछा था कि क्या इनकी खरीद के लिए टेंडर जारी किए गए थे.
सरकार के जवाब के अनुसार, एयर प्यूरीफायर पर 2021-22 में 4,20,394 रुपये, 2022-23 में 4,69,300 रुपये, 2023-24 में 6,29,219 रुपये और 2024-25 में 10,24,500 रुपये खर्च किए गए.
दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर चिंता का विषय बनने के बीच द वायर ने अपने एक विश्लेषण में यह रेखांकित किया था कि साफ़ हवा में सांस लेने का विशेषाधिकार अब तेजी से वर्ग पर निर्भर होता जा रहा है.
ऐश्वर्या बाजपेयी ने लिखा था कि, ‘स्थिर आय वाले लोगों के लिए कुछ हद तक सुरक्षा आसानी से उपलब्ध है. सीलबंद दफ्तर, फ़िल्टर की गई वेंटिलेशन व्यवस्था, एयर प्यूरीफायर और लिफ्ट के पास लगे डिजिटल एक्यूआई स्क्रीन बताते हैं कि बाहर जाना ‘सुरक्षित’ है या नहीं. लेकिन प्रवासी मज़दूरों के लिए इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है.’
अक्टूबर के महीने में जब राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता लगातार ख़राब होती जा रही थी, तब पीएम नरेंद्र मोदी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की एक तस्वीर में पीछे दिख रहा एयर प्यूरीफायर व्यापक नाराज़गी का कारण बना था.
