अमेरिकी जज के सामने दोष स्वीकार करते समय निखिल गुप्ता ने आख़िर क्या कहा?

अमेरिका के अंदर ही एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साज़िश में ‘मर्डर-फॉर-हायर’ मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में औपचारिक रूप से अपना अपराध स्वीकार कर लिया है. जब गुप्ता से अपने दोष स्वीकार करने के आधार पर अपनी भूमिका बताने को कहा गया, तब अदालत ने उनसे उनके कृत्यों को बयान करने को कहा था.

फाइल फोटो: 18 जून को चेक पुलिस द्वारा जारी वीडियो से लिए गए स्क्रीनग्रैब में जून 2024 में निखिल गुप्ता के अमेरिका प्रत्यर्पण का दृश्य.

नई दिल्ली: भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा करने की क्षमता रखने वाले एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय ‘मर्डर-फॉर-हायर’ (जान से मारने की सुपारी) मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने शुक्रवार (13 फरवरी) को न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में औपचारिक रूप से अपना अपराध स्वीकार कर लिया है.

54 वर्षीय गुप्ता ने इस सुनवाई के दौरान पहली बार खुले तौर पर उस साजिश में अपनी भूमिका कबूल की, जो कथित तौर पर भारत सरकार से जुड़े एक खुफिया अधिकारी से जुड़ी बताई जा रही है और जिसका मकसद अमेरिका में ही अमेरिकी नागरिक की हत्या करना था.

यह सुनवाई 13 फरवरी को सुबह 10:20 बजे न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में हुई. मुख्य मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न की अध्यक्षता में हुई इस कार्यवाही में अमेरिकी सरकार की ओर से असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी कैमिली फ्लेचर, अलेक्जेंडर ली और एशली निकोलस मौजूद थे, जबकि गुप्ता की ओर से वकील डेविड टॉगर थे.

हालांकि गुप्ता ने मुख्य रूप से अंग्रेज़ी में बात की, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह हर कानूनी बारीकी को पूरी तरह समझ सकें, दो हिंदी इंटरप्रेटर्स- उमेश सी. पासी और मधु मिश्रा को शपथ दिलाकर अदालत में तैनात किया गया था. सुनवाई के दौरान गुप्ता ने कहा कि हिरासत में रहने के दौरान उनकी अंग्रेज़ी में काफ़ी सुधार हुआ है, हालांकि उन्होंने प्रोबेशन इंटरव्यू के दौरान अपने वकील की मौजूदगी की मांग की.

दोष स्वीकार करने से पहले जज नेटबर्न ने एक प्रक्रियात्मक पहलू स्पष्ट किया. गुप्ता ने जिला जज के बजाय मजिस्ट्रेट जज के समक्ष अपने फेलोनी प्ली एलोकेशन के लिए औपचारिक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. अमेरिकी संघीय न्याय प्रणाली में यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसके तहत आरोपी प्रारंभिक दोष-स्वीकार सुनवाई मजिस्ट्रेट जज के सामने कराने के लिए सहमत होता है, जबकि अंतिम सजा सुनाने का अधिकार जिला जज के पास ही रहता है. इससे न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ किया जाता है.

गुप्ता ने पुष्टि की कि वह इस अधिकार को समझते हैं और उन्होंने इस पर अपने वकील से चर्चा की थी. इसके बाद जज ने उनके खिलाफ दर्ज तीन आरोप पढ़कर सुनाए- मर्डर-फॉर-हायर की साजिश, मर्डर-फॉर-हायर का वास्तविक अपराध, और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश.

अपने शब्दों में कबूलनामा

जब गुप्ता से अपने दोष स्वीकार करने के आधार पर अपनी भूमिका बताने को कहा गया, तब अदालत ने उनसे अपने शब्दों में घटनाक्रम बताने को कहा. नीचे अदालत के ट्रांसक्रिप्ट से लिया गया संवाद दिया गया है, जिसे द वायर ने अदालत के डॉकेट से प्राप्त किया है.

अदालत: आप अपने शब्दों में बता सकते हैं कि आपने ऐसा क्या किया, जिससे आपको लगता है कि आप इस आरोप में दोषी हैं?

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) क्या मैं पढ़कर सुना सकता हूं?

अदालत: हां, लेकिन धीरे-धीरे पढ़िए.

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) 2023 की वसंत ऋतु में मैंने एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर अमेरिका में एक व्यक्ति की हत्या करवाने पर सहमति जताई. और इस अपराध को आगे बढ़ाने के लिए मैंने सेल फोन के माध्यम से अमेरिका में एक अन्य व्यक्ति को 15,000 डॉलर नकद दिए.

अदालत: तो आपका यह कहना है कि 2023 में आपने और एक अन्य व्यक्ति ने मर्डर-फॉर-हायर की साजिश की और इसके बदले 15,000 डॉलर का लेन-देन हुआ. क्या यह सही है?

टॉगर: उसने किसी और को 15,000 डॉलर दिए?

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) मैंने सेल फोन का इस्तेमाल कर किसी और को 15,000 डॉलर दिए.

अदालत: आपने किसी को 15,000 डॉलर दिए ताकि वह यह काम करे?

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) हां.

टारगेट न्यूयॉर्क के क्वींस में

इसके बाद गुप्ता ने स्पष्ट किया कि भुगतान के समय वह भारत में थे, लेकिन उन्हें यह जानकारी थी कि पैसे पाने वाला व्यक्ति और हत्या का निशाना, दोनों ही न्यूयॉर्क में थे. उन्होंने विशेष रूप से बताया कि टारगेट क्वींस इलाके में था.

अदालत: जब आपने पैसे दिए, उस समय आप भारत में थे?

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) जी हां, योर ऑनर.

अदालत: क्या आपको पता था कि पैसे पाने वाला व्यक्ति अमेरिका में था?

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) हां, मुझे पता था कि वह अमेरिका में था.

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) यह भी की न्यूयॉर्क में था.

अदालत: और जिसे मारने का निशाना बनाया गया था, वह कहां था?

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) न्यूयॉर्क में.

अदालत: वह भी न्यूयॉर्क में ही था?

आरोपी: (अंग्रेज़ी में) हां, खास तौर पर क्वींस में.

संभावित सजा

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उसे पहले ही सूचित कर दिया गया था कि गुप्ता अपना बयान बदलकर दोष स्वीकार करना चाहते हैं. गुप्ता ने पुष्टि की कि अभियोग पत्र का उनके लिए अनुवाद कर दिया गया था और अदालत में पेश होने से पहले उन्होंने अपने वकील के साथ आरोपों और दोष स्वीकार करने के ‘फायदे-नुकसान’ पर विस्तार से चर्चा की थी.

अब गुप्ता को अधिकतम 40 साल की सजा का सामना करना पड़ सकता है, मर्डर-फॉर-हायर के दोनों आरोपों के लिए 10-10 साल और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के लिए 20 साल. हालांकि सरकार की ओर से दाखिल पिमेंटेल पत्र, जो संभावित सजा का अनुमान देता है, उसके मुताबिक सजा की गाइडलाइन 235 से 293 महीनों (करीब 19.5 से 23.5 साल) के बीच हो सकती है.

इसके अलावा उन पर 50,000 से 5,00,000 डॉलर तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. गुप्ता ने पुष्टि की कि उन्होंने सुनवाई से पहले यह पत्र देखा था और अपने वकील के साथ इस पर चर्चा की थी.

235 से 293 महीनों की यह सजा अमेरिकी संघीय न्याय प्रणाली में प्रयुक्त एक जटिल गणितीय व्यवस्था, सेंटेंसिंग गाइडलाइंस, पर आधारित है. अभियोजकों ने अदालत को बताया कि वास्तविक सजा अपराध स्तर के आधार पर तय की जाती है, जो गुप्ता के मामले में ‘कुल अपराध स्तर 38’ तक पहुंच गया है. 

अदालत ने मामले के लिए 15 मई 2026 को कंट्रोल डेट तय की है. इस अवधि के भीतर प्रोबेशन विभाग को प्री-सेंटेंस इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार करनी होगी. अमेरिकी संघीय अदालतों में कंट्रोल डेट का अर्थ होता है वह समयसीमा, जिसके भीतर यूएस प्रोबेशन ऑफिस आरोपी की विस्तृत जीवनी और आपराधिक विश्लेषण वाली रिपोर्ट तैयार करता है, ताकि जज अंतिम सजा तय कर सकें. इसके बाद सजा सुनाए जाने की औपचारिक सुनवाई 29 मई 2026 को जिला जज विक्टर मरेरो के समक्ष होनी तय है.

दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई किए हुए निखिल गुप्ता लगभग तीन वर्षों से हिरासत में हैं. अमेरिकी जेल ब्यूरो के मुताबिक, जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण के बाद से उन्हें न्यूयॉर्क सिटी के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर, ब्रुकलिन में रखा गया है. सजा सुनाए जाने तक वह अमेरिकी संघीय हिरासत में ही रहेंगे.