नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के उस फैसले को मंजूरी दे दी है, जिसमें राज्य के आदिवासी मामलों के मंत्री विजय शाह के पिछले साल कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर उनके विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार किया गया था.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला सोमवार (31 अगस्त) रात लिया गया. इससे कुछ घंटे पहले ही राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मंत्री विजय पर मुकदमा चलाने का फ़ैसला राज्यपाल को करना है.
राज्य सरकार ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस जे. मोहना की सदस्यता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ को बताया था कि मुकदमा चलाने की मंजूरी से संबंधित फाइल राज्यपाल के पास पहुंच चुकी है और जल्द ही इस पर फैसला आने की उम्मीद है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196(1)(a) के तहत शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी मांगी थी. हालांकि, राज्य मंत्रिमंडल ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया था.
भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (सांप्रदायिक नफ़रत और दुर्भावना को बढ़ावा देना) के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए कोर्ट को मुकदमा चलाने की मंज़ूरी की ज़रूरत होती है.
इससे पहले कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की थी. कांग्रेस ने मंत्री के खिलाफ उचित कार्रवाई की भी मांग की थी.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने भोपाल के उच्च पदस्थ आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि राज्य के मुख्य सचिव अशोक बरनवाल ने सोमवार को राज्यपाल पटेल के भोपाल लौटने के बाद लोक भवन में उनसे मुलाकात की. इसके बाद मंत्रिमंडल की सिफारिश राज्यपाल के सामने रखी गई. इसके बाद राज्यपाल पटेल ने मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी अपनी जांच पहले ही पूरी कर चुकी है और अंतिम रिपोर्ट भी दाखिल कर चुकी है. वह शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही थी.
कर्नल को लेकर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी
दरअसल, यह पूरा मामला बीते साल 13 मई को मध्य प्रदेश के महू में आयोजित एक कार्यक्रम में विजय शाह द्वारा दिए गए बयान से जुड़ा है. उस कार्यक्रम में शाह ने कहा था कि जिन्होंने ‘भारत की बेटियों को विधवा किया’, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘उनकी ही बिरादरी की बहन को भेजकर’ सबक सिखाया है. उन्होंने यह टिप्पणी तुरंत दोहराई भी थी.
हालांकि, शाह ने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि यह बयान कर्नल सोफिया कुरैशी की ओर इशारा करता है. कर्नल कुरैशी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ताओं में से एक रही हैं.
14 मई 2024 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मंत्री की टिप्पणी ‘किसी और की नहीं बल्कि’ कर्नल कुरैशी की ओर ही संकेत करती है.
इसके बाद शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. उन पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने, समुदायों के बीच सौहार्द बिगाड़ने और ऐसे बयान देने का आरोप है, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है.
इस कार्रवाई के बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इससे पहले 13 मई को उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को ‘किसी दूसरे संदर्भ में’ नहीं देखा जाना चाहिए.
शाह ने कहा था कि अगर उनकी टिप्पणी से ‘समाज और धर्म’ को ठेस पहुंची है तो वे ‘दस बार’ माफी मांगने को तैयार हैं. अगले दिन उन्होंने एक और बयान जारी कर कहा कि वे अपनी टिप्पणी को लेकर ‘शर्मिंदा और दुखी’ हैं और कर्नल सोफिया कुरैशी की सराहना की.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को उनकी माफी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित कर दी थी. अदालत ने शाह की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था.
