अनिल चमड़िया ने इस साल 30 जून को मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की थी. चुनाव आयोग ने उन्हें इस बातचीत के लिए बुलाया गया था. इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन परीक्षण को उचित बताया था. प्रस्तुत है मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम उनका एक पत्र...
पिछले दशकों में एक विचित्र परिपाटी देखने को मिली है. लोकसभा चुनाव के वर्ष में अचानक से समाचार-पत्रों की संख्या में गहरी वृद्धि हो जाती है. यह महज चुनावी मीडिया है, जो लोकतंत्र को गहरा करने में कोई मदद नहीं करता.
ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद सूची में शामिल मतदाताओं के नामों पर दावे और आपतियों का एक सिलसिला मतदाताओं के बीच चल सकता है जो कि बिहार में चुनाव के लिए शायद मतदाताओं के बीच ध्रुवीकरण और बिखराव का मुख्य जरिया और मुद्दा बन सकता है.
असुरक्षा का भाव समाज के सैन्यकरण की स्वीकृति का अनिवार्य तत्व होता है. सांप्रदायिक राजनीति उसके भीतर भी असुरक्षा बोध खड़ा करती है जिसके पक्ष में वह दिखना चाहती है और उसके भीतर भी, जिसे वह शत्रु के रूप में चित्रित करती है. कश्मीर में असुरक्षा की भावना का इस्तेमाल कश्मीरी हिंदुओं और कश्मीरी मुसलमानों दोनों के ख़िलाफ़ होता आ रहा है.
आपके अभियान की भाषा केवल परिवार के मुखियाओं को संबोधित कर रही है. नई पीढ़ी से संवाद का अभाव इसमें दिख रहा है.
दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में शामिल होने वाले विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रकाशकों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है.