मनरेगा केवल कागज पर लिखा कानून नहीं था, बल्कि हर गांव में लोकतंत्र का जीवंत उदाहरण बन गया. नई व्यवस्था (वीबी-ग्रामजी योजना) में काम केवल उन्हीं गांवों में उपलब्ध होगा जिन्हें केंद्र सरकार चुनेगी. इस तरह अधिकार प्राप्त नागरिक को निर्भर लाभार्थी में बदल दिया गया. लाखों मजदूरों के लिए जो पहले एक कानूनी अधिकार था, वह अब नौकरशाही की कृपा पर निर्भर हो गया.
स्मृति शेष: प्रख्यात नारीवादी कमला भसीन अपनी शैली की सादगी और स्पष्टवादिता से किसी मसले के मर्म तक पहुंच पाने में कामयाब हो जाती थीं. उन्होंने सहज तरीके से शिक्षाविदों और नारीवादियों का जिस स्तर का सम्मान अर्जित किया, वह कार्यकर्ताओं के लिए आम नहीं है. उनके लिए वे एक आइकॉन थीं, स्त्रीवाद को एक नए नज़रिये से बरतने की एक कसौटी थीं.