युद्ध से पहले जिस क्रूड ऑयल के भारतीय बाजार तक पहुंचने में 55-56 रुपये का खर्च आता था, अब वही 120 से 125 रुपये में पहुंच रहा है. उस समय भी भारत सरकार 55 रुपये वाले तेल को 95 से 110 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेच रही थी, जिससे सरकार को 10 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ होता था. अब जब वही तेल 125 रुपये में पहुंच रहा है, तो 10 लाख करोड़ रुपये के घाटे की