पुस्तक समीक्षा: रोहिंग्या जनसंहार की भयावह पृष्ठभूमि में मय्यू अली की किताब ‘इरैडिकेशन’ केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि मिटा दिए जाने के ख़िलाफ़ कविता का प्रतिरोध है. यह पुस्तक बताती है कि नफ़रत कैसे जन्म लेती है और स्मृति, भाषा व साहस किस तरह अस्तित्व को बचाने का आख़िरी सहारा बनते हैं.
हान कांग 'द वेजीटेरियन' में खाने की राजनीति पर कोई बात नहीं कर रही हैं, उनका विषय नायिका यंगहे का शाकाहारी हो जाने का निर्णय है, जो इस साधारण महिला को असाधारण बना देता है.
साल 2021 में 98 साल की उम्र में एक यहूदी महिला सेल्मा ने अपने नाम को शीर्षक बनाकर लिखी किताब में जर्मनी व यूरोप में 1933 से 1945 के बीच यहूदियों की स्थिति को दर्ज किया है. हज़ारों किलोमीटर और कई दशकों के फासलों के बावजूद 2023 के भारत में यह किताब किसी अजनबी दुनिया की बात नहीं लगती है.