अपनी स्थापना के सौ साल पूरे कर चुका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 'राजनीतिक' न होने का दावा करता है, हालांकि उसकी विचारधारा की छाप देश की सर्वोच्च सत्ता से लेकर शिक्षण संस्थानों, यहां तक कि सिनेमा तक पर देखी जा सकती है. आरएसएस के सौ सालों के सफ़र पर पत्रकार और लेखक धीरेन्द्र झा और द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी.
चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया के बाद बताया है कि पहली ड्राफ्ट सूची में 65 लाख वोटर्स के नाम नहीं आए हैं. पहले से ही प्रक्रिया पर कई सवाल थे, और अब यह दावा भी जुड़ गया है कि यह कवायद समावेशी यानी वोटर जोड़ने की नहीं बल्कि निकालने की है. स्वतंत्र पत्रकार पूनम अग्रवाल और द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी.
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सरकारों द्वारा जारी उन निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की गई है, जिसमें सरकारों ने कांवड़ यात्रा के रास्ते में पड़ने वाली दुकानों पर क्यूआर कोड लगाने को कहा है, जिसे स्कैन करने पर मालिक का नाम पता चल सके. क्या यह धार्मिक विभाजन गहराने का प्रयास है? इस याचिका को दायर करने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद और द वायर की संपादक सीमा चिश्ती के साथ चर्चा
25 जून को आपातकाल के पचास साल पूरे होने के अवसर पर 'संविधान हत्या दिवस' मनाते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 1975 में लोकतंत्र को बंदी बना लिया गया था. हालांकि मोदी सरकार के बीते ग्यारह साल के कार्यकाल को लेकर भी यही आलोचना होती रही है. इस अघोषित आपातकाल पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा और द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
पहलगाम हमले के क़रीब चार हफ्ते बाद भी इसे अंजाम देने वाले आतंकियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. पीएम क़रारा जवाब देने की बात करते हैं पर सुरक्षा के इंतज़ामों के बारे में चुप्पी है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्या घट रहा है, इस बारे में द वायर की संपादक सीमा चिश्ती और वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी से चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. हालांकि, इस बीच भारतीय टीवी मीडिया द्वारा युद्धोन्माद में ढेरों ग़लत जानकारियों और फेक न्यूज़ को समाचार की शक्ल में पेश किया गया. इस बारे में द हिंदू के वरिष्ठ पत्रकार कल्लोल भट्टाचार्जी और द वायर के पॉलिटिकल एडिटर अजॉय आशीर्वाद के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
वीडियो: पहलगाम आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों के बीच केंद्र सरकार ने जाति जनगणना करवाने की बात कही है. क्या यह बड़े सवालों से ध्यान हटाने का तरीका है? द वायर की संपादक सीमा चिश्ती और वरिष्ठ पत्रकार उमाकांत लखेड़ा के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा सैलानियों पर हमले के बाद गृह मंत्री द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा और शांति क़ायम होने के दावों पर सवाल उठ रहे हैं. इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार संजय के. झा और द वायर की नेशनल अफेयर्स एडिटर संगीता बरुआ पिशारोती के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
मणिपुर में जातीय संघर्ष चलते हुए दो साल पूरे होने को हैं लेकिन आज भी क्षेत्र में शांति एक सपना ही है. राष्ट्रपति शासन के बाद राज्य के क्या हालात हैं, इस बारे में मणिपुर से लौटे पत्रकार याक़ूत अली और द वायर की नेशनल अफेयर्स एडिटर संगीता बरुआ पिशारोती से चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा विधेयक और सरकारी आदेश रोकने को अवैध और मनमाना कहा है. सरकार बनाम राज्यपाल की खींचतान कई अन्य प्रदेशों में भी जारी है, क्या यह निर्णय उनके लिए एक सबक होगा. द वायर के पॉलिटिकल एडिटर अजॉय आशीर्वाद और सुप्रीम कोर्ट की वकील वर्तिका मणि के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
वक़्फ़ संशोधन विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई हैं लेकिन विपक्षी दलों और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के सवाल अब भी बाक़ी हैं. इस बिल को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलयास और वरिष्ठ पत्रकार उमर राशिद के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
वीडियो: कुणाल कामरा के वीडियो को लेकर उठे राजनीतिक विवाद और नेताओं द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की 'सीमा' तय करने के बारे में द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.
वीडियो: क्या नरेंद्र मोदी के डोनाल्ड ट्रंप से दोस्ती के दावे देश के हित में काम कर रहे हैं? ट्रंप कहते हैं दोस्ती अपनी जगह, पर भारत पर टैरिफ लगाएंगे ही, तो क्या ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डालेंगे? द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.
संभल में शाही जामा मस्जिद के बहाने सांप्रदायिकता और अविश्वास की खाई को और गहरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं. सत्ता और प्रशासन अपने ज़हर बुझे बयानों से इस आग को हवा दे रहे हैं. इस बारे में द वायर की संपादक सीमा चिश्ती और द वायर की रिपोर्टर श्रुति शर्मा के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.
समाज की विभिन्न असमानताओं से घिरीं भारतीय क़स्बों-गांवों की औरतें अपनी परिस्थितियों को बदलने की जद्दोजहद में लगे हुए अपने स्तर पर किसी भी तरह अगर पितृसत्ता को चुनौती दे रहीं हैं, तो क्या वे महानगरों में फेमिनिज़्म की आवाज़ बुलंद कर रही महिलाओं से कहीं कमतर हैं?