पिछले एक दशक में कई छात्र आंदोलनों के दौरान बेसिर-पैर की अफ़वाहों को राजनीतिक नैरेटिव का रूप दिया गया. अब आंदोलन करने वाले युवाओं पर पैलेट, लाठियां चलने के बाद, उन्हें 'देशद्रोही', 'गटर जेनेरशन' कहे जाने, भद्दी गालियां दिए जाने के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत उनका समर्थन करने लगे हैं. यह सच है या पिछली कई बार की तरह सरसंघचालक इसे अफ़वाह बताकर मुकर तो नहीं जाएंगे?