‘दीनदयालु’ से ‘सेवा तीर्थ’ तक: क्या सरकारी भाषा लोकतंत्र को ईश्वरीय सत्ता की ओर ले जा रही है?

दया दिखाना क़ानूनी और तकनीकी तौर पर बाध्यकारी नहीं है. इसके केंद्र में दीनहीन व्यक्ति नहीं बल्कि दया करने वाले ‘दीनदयालु’ लोग हैं. जिनमें ‘दीनदयालुता’ को सेलिब्रेट करने का भी भाव है. जो एक विशुद्ध सामंती प्रवृत्ति है. इसीलिए आम भाषा में भी किसी अच्छे राजा को ‘दयालु’ बताया जाता है लेकिन अच्छी सरकार, अच्छे पीएम या सीएम को ‘ज़िम्मेदार’ कहा जाता है.

क्यों बिहार का राजनीतिक प्रयोग यूपी में दोहरा पाना नामुमकिन नहीं लेकिन मुश्किल ज़रूर है

उत्तर प्रदेश में भाजपा की बड़ी जीत के बाद से सपा-बसपा गठबंधन की चर्चा लगातार चल रही है, लेकिन जानिए वो दस वजहें जो बताती हैं क्यों उत्तर प्रदेश बिहार नहीं बन सकता है.

योगी को बसपा और सपा दोनों ही सरकारों ने बढ़ावा दिया

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने की बधाई के हकदार उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज न करने वाले पुलिस अधिकारी, ख़बरों को दबाने वाले पत्रकार, मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव भी हैं. बिना इनके सहयोग के योगी आज माननीय मुख्यमंत्री न बन पाते.