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शरत प्रधान

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: औवेसी का गेम प्लान क्या है

वीडियो: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी के इस चुनाव में शामिल होने का ऐलान कर दिया है. ओवैसी की पार्टी के चुनाव लड़ने से उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों में क्या बदलाव होगा बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान.

अयोध्या: मंदिर निर्माण के लिए चंदा जुटाने के उद्देश्य से यूपी सरकार के विभाग ने बैंक खाता खोला

उत्तर प्रदेश के पीडब्ल्यूडी विभाग ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दान प्राप्त करने के उद्देश्य से एक बैंक खाता खोला है. यह कदम संविधान के उस प्रावधान का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि सरकार किसी विशेष धर्म के नाम पर टैक्स या धन एकत्र नहीं कर सकता है.

विकास दुबे एनकाउंटर: क्या जांच समिति सदस्यों के पारिवारिक संबंधों के चलते निष्पक्ष जांच होगी?

विकास दुबे एनकाउंटर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान के भाई भाजपा विधायक हैं और समधी भाजपा सांसद. वहीं समिति के अन्य सदस्य पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता कानपुर ज़ोन के आईजी के संबंधी हैं. ऐसी स्थिति में हितों के टकराव की संभावना के कयास लगाए जा रहे हैं.

Lucknow: BSP supremo Mayawati and Samajwadi Party President Akhilesh Yadav during a joint press conference, in Lucknow, Saturday, Jan. 12, 2019. (PTI Photo/Nand Kumar) (PTI1_12_2019_000113B)

क्या बसपा के महागठबंधन से पीछे हटने में भाजपा का हाथ है?

कुछ लोगों का मानना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार को सीबीआई से मिली क्लीनचिट ने मायावती के मन में विद्वेष का बीज डाला.

क्या रामदेव की यूपी से फूड पार्क हटाने की धमकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी?

योग गुरु बाबा रामदेव अपने उद्योग के लिए दबाव की रणनीति अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से पहले से ही मिली हुई रियायतों में और बढ़ोतरी चाहते हैं.

योगी उत्तर प्रदेश को मठ की तरह चला रहे हैं, जैसा वे गोरखपुर को चलाते थे

गोरखपुर में मिली हार योगी आदित्यनाथ के लिए बड़ा झटका है. भाजपा कार्यकर्ता उन्हें 2024 में प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे थे, लेकिन अपनी सीट छोड़ो, वो अपना बूथ तक नहीं बचा पाए.

बाबरी विध्वंस के 25 साल, न्याय की कछुआ चाल

बाबरी विध्वंस मामले में गवाह वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान बता रहे हैं ​कि कैसे टालमटोल, सुस्ती और न्याय तंत्र की उदासीनता के चलते यह केस 25 सालों से लटका हुआ है.