प्रेम में पेड़ होना: प्रकृति और मानवीय प्रेम का मिलन

जसिंता करेकेट्टा का 'प्रेम में पेड़ होना' काव्य संग्रह ज़ोर देता है कि समाज को इस सोच से बाहर निकलना होगा कि सिर्फ़ कुछ ही लोग 'पेड़' बनेंगे और बाकी उसकी छांव लेंगे. प्रेम में साझेदारी और समानता का भाव होना चाहिए- कोई हमेशा देने वाला और कोई हमेशा लेने वाला न हो.