दिल्ली के जंतर-मंतर पर गुरुवार को मोदी सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन देखने को मिला. इस प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में ट्रेड यूनियन के सदस्य, मज़दूर, युवा, पत्रकार और नागरिक समाज के लोग शामिल हुए. इस दौरान मज़दूर संगठनों ने आरोप लगाया कि नए लेबर कोड से कामगारों का शोषण बढ़ेगा और पूंजीपतियों को फायदा मिलेगा.
गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश के बागपत के बड़ौत नगर पालिका परिसर में भाजपा नेता और राज्यमंत्री केपी मलिक ने एक ‘संविधान पार्क’ का उद्घाटन किया था. हालांकि वहां लगी संविधान की प्रस्तावना की प्रतिकृति से समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द गायब हैं. प्रशासन इसे मूल प्रस्तावना बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञ और स्थानीय लोग इसे संविधान की भावना के ख़िलाफ़ मानते हुए बदलाव की मांग कर रहे हैं.
सरकार द्वारा '10 मिनट डिलीवरी' की ब्रांडिंग पर रोक का देशभर के गिग वर्कर्स संगठनों ने स्वागत किया है, साथ ही इस दिशा में अन्य ज़रूरी सुविधाएं और समस्याओं की ओर ध्यान देने का भी आग्रह किया है, जिसमें उचित वेतन संरचना, सामाजिक सुरक्षा लाभ और पारदर्शी नीतियां लागू करना शामिल है.
बीते दिनों उन्नाव बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सर्वाइवर को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर के ज़मानत के आदेश पर रोक लगा दी है. उधर, पीड़ित महिला का कहना है कि अगर कोर्ट की कार्यवाही हिंदी में हो, तो वे अपना केस खुद लड़कर दुनिया के सामने सारी सच्चाई स्पष्टता के साथ रख देंगी.
देश के प्रमुख डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े कई गिग वर्कर्स संगठनों ने नए साल के मद्देनज़र बुधवार (31 दिसंबर) को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. गिग वर्कर संगठनों का कहना है कि यह विरोध ग्राहकों को असुविधा पहुंचाने के लिए नहीं है, बल्कि गिग वर्कर्स की समस्याओं पर तत्काल ध्यान आकर्षित करने के लिए है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में गजट नोटिफिकेशन जारी कर मेडिकल स्नातकोत्तर (पीजी) प्रवेश नियम 2025 में आंशिक संशोधन कर राज्य कोटे की सीटें 50% से घटाकर 25% कर दी हैं. नए नियम के लागू के बाद अब राज्य के मेडिकल कॉलेजों में 75 प्रतिशत एडमिशन केवल मेरिट के आधार पर होगा. राज्य के चिकित्सा संगठनों और डॉक्टरों ने इसका विरोध करते हुए हाईकोर्ट का रुख़ किया है.
हरियाणा के लगभग हर ज़िले में महिला स्कीम वर्कर्स, जिसमें आंगनबाड़ी , मिड-डे मील और आशा कार्यकर्ता-सहायिका शामिल हैं, इस वक़्त समय पर मानदेय न मिलने समेत अपनी कई मांगों को लेकर सड़क पर उतरी हैं. 6-8 दिसंबर के बीच इन्होंने केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा सांसदों के कार्यालयों के बाहर धरना देकर ज्ञापन सौंपते हुए डबल इंजन सरकार को उनके चुनावी वादों की याद दिलाई.
दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच दिल्ली महिला आयोग डेढ़ साल से बंद पड़ा है. आयोग की आखिरी नियुक्त अध्यक्ष स्वाति मालिवाल थीं, जिन्होंने जनवरी 2024 को राज्यसभा जाने के लिए पद छोड़ा है. इस साल फरवरी में भाजपा सरकार आने के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तमाम दावे किए थे लेकिन आज तक आयोग के दफ़्तर पर लगा ताला खुल नहीं सका.
दिल्ली के पास बिसाहड़ा गांव में दस साल पहले मोहम्मद अख़लाक़ की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. अख़लाक़ के छोटे बेटे दानिश भी बुरी तरह घायल हो गए थे. लेकिन एक दशक बाद भी यहां के लोगों को इस हत्याकांड को लेकर कोई अफ़सोस नहीं. अगर कुछ है, तो सिर्फ आरोपियों के लिए सहानुभूति और योगी आदित्यनाथ के लिए धन्यवाद.
हिंंदी पखवाड़े के अंतर्गत हमने हिंदी की कुछ लेखिकाओं से हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श को लेकर परिचर्चा की. उनके जवाब हिंंदी साहित्य में स्त्री की उपस्थिति की मुकम्मल तस्वीर बनाते हैं, नये प्रश्न भी दे जाते हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग की बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और उसके बाद आयी ड्राफ्ट सूची को विपक्षी दलों ने एक बड़ा मुद्दा बनाया है. बिखरा हुआ विपक्ष एक बार फिर एकजुट नज़र आने लगा है.
भारत के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 75 साल के इतिहास में पहली बार महिला सैनिकों ने पासिंग आउट परेड में पुरुषों के साथ कदमताल किया. ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये आने वाले दशकों में महिलाओं के लिए भारतीय सेना के सर्वोच्च पदों तक पहुंचने का एक रास्ता खोलता है, जो इनके लंबे संघर्ष की जीत है.
चर्चित फिल्म 'मिसेज़' की पटकथा लेखक अनु सिंह चौधरी साहित्य और पत्रकारिता की दुनिया का जाना-पहचाना नाम रह चुकी हैं. उनकी रचनाओं में महिलाएं प्रमुख भूमिका में रही हैं; वे मानती हैं कि 'अगर आधी आबादी से होते हुए भी हम इस आबादी की कहानियां नहीं कहेंगे, तो कौन कहेगा.' उनसे बातचीत.
भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड विजय मिलने के बाद सत्ताधारी पार्टी आम आदमी को करारी हार का स्वाद चखना पड़ा है. जबकि कांग्रेस के हाथ तीसरी बार भी खाली रहे और उसके खाते में एक भी सीट नहीं आई.
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली में रोजाना 3,000 टन से अधिक ठोस कचरे का निस्तारण नहीं होने को लेकर दिल्ली नगर निगम और केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को कचरे निपटान पर साथ काम करने को कहा था. लेकिन ये मुद्दा सालों से चुनावी राजनीति की भेंट चढ़ा हुआ है.