मोदी सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलने से जुड़े विधेयक को सूचीबद्ध किए जाने पर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है. उनका आरोप है कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि काम के अधिकार को कमज़ोर करने और केंद्र का नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश है.
मंगलवार को लोकसभा में चुनावी सुधारों पर चर्चा शुरू हुई. इस दौरान विपक्ष ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया की कमियों को उजागर किया. बहस के दौरान विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर निष्पक्षता की कमी का आरोप लगाया और पुनः बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की.
केंद्र सरकार ने सदन के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन एसआईआर पर चर्चा के लिए सहमति दे दी है. यह बहस अगले सप्ताह चुनावी सुधारों से जुड़े अन्य मुद्दों के साथ होगी. हालांकि यह भी कहा गया है कि यह चर्चा वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर होने वाली बहस के बाद ही की जाएगी.
शीतकालीन सत्र: विपक्ष की एसआईआर, राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा की मांग, पीएम बोले- संसद में ड्रामा नहीं
सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र शुरू हुआ है, जिसमें विपक्षी दलों ने एसआईआर, दिल्ली बम धमाके के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और बढ़ते वायु प्रदूषण जैसे अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग की है. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए. नारों के लिए पूरा देश खाली पड़ा है.
बिहार चुनाव: अमित शाह ने ‘अवैध प्रवासियों’ का मुद्दा उठाया, लेकिन चुनाव आयोग ने कोई आंकड़ा नहीं दिया
चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद इन सूचियों में शामिल विदेशियों की संख्या के बारे में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया है, लेकिन इन कथित 'अवैध प्रवासियों' की उपस्थिति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बिहार चुनाव अभियान में एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरी है.
चुनाव आयोग ने बताया है कि अबगोवा, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में एसआईआर किया जाएगा. असम को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है. बंगाल, तमिलनाडु और केरल के साथ असम में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.
कांग्रेस समेत 'इंडिया' गठबंधन में शामिल विभिन्न दलों ने उस संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का बहिष्कार करने का फैसला किया है, जो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ़्तार मंत्रियों को हटाने संबंधी तीन विधेयकों की जांच करेगी. द वायर को जानकारी मिली है कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को इस फैसले से अवगत करा दिया गया है.
हिंदुत्व समर्थक सोशल मीडिया हैंडल लगातार सीजेआई बीआर गवई पर ‘एंटी-हिंदू’ होने के आरोप लगा रहे हैं, जातिवादी तस्वीरें साझा कर रहे हैं और यहां तक कि सीजेआई पर हुए हमले की निंदा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना कर रहे हैं. एक एआई वीडियो में तो सीजेआई के गले में मिट्टी का घड़ा टंगा दिखाया गया है. यह वही प्रतीक है जो सदियों से दलितों को अपमानित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.
बिहार एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची को लेकर पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मतदाता सूची से करीब 47 लाख नाम हटाने के पीछे कारण क्या हैं या इनमें कितने विदेशी ‘अवैध प्रवासी’ पाए गए. उन्होंने कहा कि इस डेटा की पूरी जानकारी हर ईआरओ और जिलाधिकारी के पास उपलब्ध है.
चुनाव आयोग ने बिहार में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ पूरी कर अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है. 47 लाख मतदाताओं के नाम कम हुए हैं. आयोग ने नाम हटाए जाने के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी है. दस्तावेज़ की कमी से हटाए गए नाम, कितने नए मतदाता और अवैध विदेशी प्रवासियों की संख्या जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी नहीं दी गई हैं.
बिहार में तीन महीने तक चले एसआईआर प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूची में लगभग 6% की कमी आई है, जिसमें लगभग 47 लाख नाम हटाए गए हैं. चुनाव आयोग के अनुसार, 'अगर कोई पात्र व्यक्ति अभी भी मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना चाहता है, तो वह चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख से दस दिन पहले तक आवेदन जमा कर सकता है.'
प्रोफेसर जगदीप एस. छोकर एडीआर के सह-संस्थापक थे और देश में चुनावी सुधारों एवं लोकतांत्रिक पारदर्शिता को बनाए रखने में उन्होंने अहम योगदान दिया था. 12 सितंबर को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया.
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा के पूरे 77 दिन बाद निर्वाचन आयोग ने अपने कड़े प्रतिरोध के बावजूद निर्देश दिए हैं कि वे संशोधित मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए पहचान के प्रमाण के रूप में दिए जाने वाले 12वें दस्तावेज के तौर पर आधार कार्ड को स्वीकार करें.
दिल्ली हाईकोर्ट ने डीपीडीपी एक्ट, 2023 का हवाला देते हुए केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के उस आदेश को ख़ारिज किया जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था. इस क़ानून को अब तक अधिसूचित नहीं किया गया है.
चुनाव आयोग ने सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में 2003 के बिहार एसआईआर की प्रति उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया. इसके बजाय चुनावी राज्य में चल रही वर्तमान प्रक्रिया के लिए जून 2025 के आदेश का लिंक दे दिया है.