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सुभाष गाताडे

नरेंद्र मोदी और भीमा-कोरेगांव हिंसा. ​​(फोटो साभार: पीटीआई/एएनआई)

मोदी ख़ुद को आंबेडकर का शिष्य कहते हैं लेकिन उनकी कथनी​​​​​​​​​​​​​​​​​​​-करनी में अंतर है

जब भी दलित अपने आत्मसम्मान की बात करते हैं तो मौजूदा सरकार का रवैया हमेशा नकारात्मक दिखता है.

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जिस संविधान की कसमें खाते हैं उसी को मिटाने की ​बात करते हैं

मुल्क की बागडोर संभालते वक्त ‘संविधान को सबसे पवित्र किताब’ कहने वाले तथा अपने आप को ‘आंबेडकर का शिष्य’ घोषित करने वाले प्रधानमंत्री ने भी अनंत कुमार हेगड़े के बयान पर खामोशी बरतना मुनासिब समझा.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

बाबरी विध्वंस के 25 साल: जलती मशालों के बीच का अकेलापन

बाबरी मस्जिद विध्वंस और उसके बाद के रक्तरंजित दौर की तरफ पच्चीस साल बाद फिर लौटते हुए हम नए सिरे से उस पुराने द्वंद्व से रूबरू होते हैं जो हर ऐसे सांप्रदायिक दावानल के बहाने उठता है.

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पूरे देश में जादू-टोना विरोधी क़ानून बनाने की सख़्त ज़रूरत

महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाद पूरे देश में अंधश्रद्धा विरोधी क़ानून की सख़्त ज़रूरत है ताकि आस्था की दुहाई देते हुए तमाम ग़रीब, वंचितों को छल से बचाया जा सके.

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स्टैच्यू आॅफ यूनिटी: सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ते बच्चे और 121 करोड़ रुपये का चंदा

देश के वंचितों के स्वास्थ्य की बदतर स्थिति का एक तरह से मखौल उड़ाती सरदार पटेल की मूर्ति के लिए 121 करोड़ के चंदे की ख़बर पर चर्चा नहीं हो सकी.

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पीएन ओक: वो व्यक्ति जिसने ताजमहल को तेजोमहालय बताने वाले विवाद की शुरुआत की

भारत के इतिहास को सेक्युलर और मार्क्सवादी इतिहासकारों द्वारा गढ़ा बताने वाले ओक दावा करते हैं कि क्रिश्चियनिटी और इस्लाम ‘वैदिक’ विश्वासों की विकृतियों के तौर पर पैदा हुए हैं.

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यह समाज और इसका वातावरण बच्चों के अनुकूल नहीं है

यह ‘अच्छे स्पर्श’ और ‘बुरे स्पर्श’ की सरलीकृत बायनरी से आगे बढ़ने का वक़्त है. बच्चों के लिए न विशेष अदालतें हैं, न काउंसलिंग के इंतज़ाम हैं, न ही सुरक्षित वातावरण जिसमें वह पल-बढ़ सकें.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi pays floral tributes to the bust of Shyama Prasad Mukherjee at BJPs national executive meeting at Talkatora stadium, in New Delhi on Monday. PTI Photo by Kamal Kishore (PTI9 25 2017 000034B)

दीनदयाल उपाध्याय: जो मुसलमानों को समस्या और धर्मनिरपेक्षता को देश की आत्मा पर हमला मानते थे

अंत्योदय का नारा देने वाले दीनदयाल उपाध्याय का कहना था कि अगर हम एकता चाहते हैं, तो हमें भारतीय राष्ट्रवाद को समझना होगा, जो हिंदू राष्ट्रवाद है और भारतीय संस्कृति हिंदू संस्कृति है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

वंचित समुदाय के मेधावी बच्चों के लिए बने आवासीय स्कूल मौत के कुएं क्यों बन रहे हैं?

आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ यौन अत्याचार, शोषण और उनके मरने की घटनाएं आम हो चली हैं लेकिन मुख्यधारा में कहीं भी उनकी चर्चा नहीं है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi with the Spiritual Leader and Founder of the “Art of Living Foundation”, Sri Sri Ravi Shankar at World Culture Festival, in New Delhi on March 11, 2016.

पर्यावरण बचाने की राह में आस्था का रोड़ा

आस्था की स्वतंत्रता की गारंटी देते वक़्त कभी संविधान निर्माताओं ने यह नहीं सोचा होगा कि लोगों की निजी आस्था पर अमल पर्यावरण को कितना बड़ा ख़ामियाज़ा भुगतने के लिए मजबूर कर सकता है.

New Delhi: Demonstrators hold placards with the picture of journalist Gauri Lankesh during a 'Not In My Name' protest at Jantar Mantar in New Delhi on Thursday. PTI Photo(PTI9_7_2017_000157B)

पाकिस्तान का वर्तमान अब भारत का भविष्य नज़र आने लगा है

शब्द और विचार हर किस्म के कठमुल्लों को बहुत डराते हैं. विचारों से आतंकित लोगों ने अब शब्दों और विचारों के ख़िलाफ़ ​बंदूक उठा ली है.

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बच्चों को खेलकूद का अधिकार कब मिलेगा?

सत्तर के दशक से आज तक बच्चों के खेलकूद के स्थान में 90 फीसदी गिरावट आई है लेकिन हमारी व्यवस्था बच्चों के इस बुनियादी अधिकार को लेकर असंवेदनशील है.

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गोशालाओं में गायों की रोज़ाना मौत और गोभक्ति का पाखंड

भाजपा शासित राज्यों में गोशालाओं में बदइंतज़ामी के चलते लगातार गायों की मौत हो रही है, लेकिन वे गाय के प्रति अपना ‘प्रेम’ उजागर करने में नित नये क़दम बढ़ाते रहते हैं.