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सुभाष गाताडे

The Prime Minister, Shri Narendra Modi paying respects to Dr. Babasaheb Ambedkar, at Chaitya Bhoomi, in Mumbai on October 11, 2015. 
The Governor of Maharashtra, Shri C. Vidyasagar Rao, the Chief Minister of Maharashtra, Shri Devendra Fadnavis and the Union Minister for Road Transport & Highways and Shipping, Shri Nitin Gadkari and other dignitaries are also seen.

मोदी ख़ुद को आंबेडकर का ‘शिष्य’ बताते हैं, लेकिन मनु पर दोनों के नज़रिये में फ़र्क़ दिखता है

पुस्तक अंश: मोदीनामा किताब का पांचवां अध्याय ‘मनु का सम्मोहन’ बताता है कि भारत के संविधान के ऐलान को डाॅ. आंबेडकर ने मनु के शासन की समाप्ति कहा था, बावजूद इसके मनु की वापसी हो रही है.

sanatan-sanstha FB

आतंक का ‘सनातन’ चेहरा

सनातन संस्था एवं हिंदू जनजागृति समिति जैसे ‘आध्यात्मिक’ कहे जाने वाले संगठनों से कथित तौर पर संबद्ध कई लोगों की गिरफ़्तारी इनकी अतिवादी गतिवधियों की ओर इशारा करती है. बीते दिनों सामने आया एक स्टिंग ऑपरेशन बताता है कि अपनी संगठित हिंसक गतिविधियों के बावजूद इन संगठनों को मिले राजनीतिक संरक्षण के चलते उनके ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई से हमेशा बचा गया.

New Delhi: RSS chief Mohan Bhagwat speaks during a book release function in New Delhi, Thursday, Sep 20, 2018. (PTI Photo/Subhav Shukla) (PTI9_20_2018_000153B)

संघ से संवाद: दक़ियानूसी विचारों को नई पैकेजिंग के ज़रिये आकर्षक बनाने का पैंतरा

वे सभी लोग जो नए कलेवर में प्रस्तुत संघ को लेकर प्रसन्न हो रहे हैं, उन्हें यह जानना होगा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब संघ इस क़वायद में जुटा है. उन्हें 1977 के अख़बारों को पलट कर देखना चाहिए जब यह बात फैलाई जा रही थी कि संघ अब अपनी कतारों में मुसलमानों को भी शामिल करेगा. लेकिन यह शिगूफ़ा साबित हुआ.

Bhavesh Patel ANI

दंगाइयों पर फूल बरसाने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर किस मुंह से सवाल उठाते हैं?

जिस तरह इस्लामिस्ट आतंकवादी अपनी हरकतों से इस्लाम का ही ग़लत मतलब पेश करते हैं, वही स्थिति हिंदुत्व आतंकवादियों की होती है, वे हिंदू धर्म का इस्तेमाल कर उसकी ग़लत छवि पेश करते हैं.

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क्या पिछले दरवाज़े से ईशनिंदा क़ानून को प्रवेश दिलाकर भारत भी पाकिस्तान के नक़्शे क़दम पर है?

पिछले दिनों पंजाब कैबिनेट ने धार्मिक ग्रंथों का अनादर करने के दोषियों को उम्रक़ैद की सज़ा देने के लिए भारतीय दंड संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता में संशोधनों के प्रस्ताव वाले विधेयक के मसौदे को मंज़ूरी दी है.

Rajsthan Highcourt AIR

हिंदुत्ववादियों का मनुस्मृति से ‘मोह’ छूट नहीं रहा है

भारत द्वारा संविधान अपनाए हुए सत्तर साल बीत चुके हैं. डॉ. आंबेडकर के मुताबिक इसने ‘मनु के शासन की समाप्ति की थी.’ लेकिन हिंदुत्ववादियों के बीच आज भी उसका सम्मोहन बरक़रार है.

Galagoda Aththe Gnanasara

श्रीलंका में एक अतिवादी बौद्ध भिक्षु को दंडित किया जाना सुर्खियों में क्यों नहीं है?

श्रीलंका में बौद्ध भिक्षुओं को शायद ही दंडित किया जाता है, मगर जब पिछले दिनों वहां की न्यायपालिका ने एक अतिवादी बौद्ध भिक्षु को दंडित कर ‘इतिहास रचा’ तब भी भारत समेत दक्षिण एशिया का मीडिया खामोश रहा.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो:पीटीआई)

शिक्षा में ‘धार्मिक रंग’ जोड़ने के साथ दक्षिणपंथी विचारकों को लोकप्रिय बनाने की कोशिश जारी है

विद्यार्थियों के पाठ्येत्तर गतिविधियों में ‘संतों-महात्माओं’ के प्रवचनों को शामिल करने का राजस्थान सरकार का ताज़ा निर्देश संविधान के कई अहम प्रावधानों को नज़रअंदाज़ करता दिखता है.

On 20 May 1951, Dr. Ambedkar addressed a conference on the occasion of Buddha Jayanti organised at Ambedkar Bhawan, Delhi. The Guest of Honour was the then Ambassador of France in India. Shankaranand Shastri is seen on the right in the photograph.

आंबेडकर के रेडिकल पक्ष से कौन डरता है?

बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के रेडिकल पक्ष को नज़रअंदाज़ करने के पीछे की राजनीति बहुत पुरानी है. शासक जमातें उत्पीड़ित तबकों से आने वाले नेताओं को सीमित करके प्रस्तुत करती हैं.

Modi-Ambedkar-PTI

ज़ुबां पर आंबेडकर, दिल में मनु

लोग अब समझने लगे हैं कि अपने संकीर्ण एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सत्ताधारी जमातें भले डॉ आंबेडकर की मूर्तियां लगवा दें, मगर तहेदिल से वह मनु की ही अनुयायी हैं.

मुहम्मद अली, टॉमी स्मिथ, जॉन कॉर्लोस और कॉलिन केपरनिक. फोटो: रॉयटर्स)

हमारे ‘महान’ खिलाड़ी मुश्किल समय में जनता के साथ क्यों नहीं खड़े होते?

हमारे महान खिलाड़ियों को जनता सिर-आंखों पर बैठाती है, मगर जनता पर जब ऐसी कोई त्रासदी बरपा करती है- जिसके लिए सरकार या समाज का एक वर्ग ज़िम्मेदार हो तो वे ऐसे विलुप्त हो जाते हैं, गोया इस दुनिया में रहते न हों.

Jabalpur: Art of Living founder Sri Sri Ravi Shankar speaks during Mahasatsang 'Shakti Sangam' at Jabalpur on Thursday. PTI Photo (PTI3_8_2018_000023B)

एक के बाद एक भड़काऊ बयान दे रहे श्रीश्री रविशंकर पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?

अयोध्या के संबंध में श्रीश्री का यह दावा करना कि अगर अदालत हिंदुत्ववादियों की मांग को ख़ारिज करता है तो हिंदू हिंसा पर उतर आएंगे, इसके ज़रिये वह न केवल क़ानून के राज को चुनौती दे रहे थे बल्कि संवैधानिक सिद्धांतों पर भी सवाल खड़ा कर रहे थे.

साभार: राधाकृष्ण प्रकाशन

क्या ‘जूठन’ पाठ्यक्रमों से बाहर कर दी जाएगी?

हिमाचल विश्वविद्यालय में ओम प्रकाश वाल्मीकि की ‘जूठन’ बीते 3 सालों से पढ़ाई जा रही थी, तब भावनाएं अचानक कहां से आहत हो गईं? क्या इसका ताल्लुक़ राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन से है?

(फोटो: पीटीआई)

अतार्किकता और अवैज्ञानिकता के मामले में क्या हम पाकिस्तान बनने की ओर अग्रसर हैं?

भारत में बंददिमागी एवं अतार्किकता को जिस किस्म की शह मिल रही है और असहमति की आवाज़ों को सुनियोजित ढंग से कुचला जा रहा है, उसे रोकने की ज़रूरत है ताकि संविधान को बचाया जा सके.