उत्तर प्रदेश: होली में अव्यवस्था दिखाती पुरानी ‘वीडियो’ साझा करने पर एक पत्रकार समेत नौ लोगों पर एफआईआर

बीते शनिवार (28 फरवरी) को मथुरा और वृंदावन शहरों में होली के दौरान उमड़ी भीड़ और अव्यवस्था को दिखाता एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में एक पत्रकार और आठ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस का कहना है कि इस पुराने वीडियो के चलते लोगों में 'डर का माहौल' बन गया है.

‘थूक’ और ‘फूड जिहाद’ की ख़बरों पर ज़ी न्यूज़ समेत कई चैनलों को एनबीडीएसए ने फटकारा

एनबीडीएसए ने समाचार रिपोर्टिंग में 'जिहाद' शब्द के इस्तेमाल को लेकर विशेष दिशानिर्देश तैयार करने का निर्णय लिया है. साथ ही ज़ी न्यूज़ नेटवर्क के विभिन्न चैनलों, टाइम्स नाउ नवभारत, न्यूज़18 और एनडीटीवी सहित कई टीवी चैनलों को उन प्रसारणों को लेकर चेतावनी दी है, जिनमें खाने में कथित मिलावट की घटनाओं को 'थूक जिहाद' और 'फूड जिहाद' जैसे शब्दों के साथ पेश किया गया था.

ज़ी तेलुगु की गिरफ़्तार लोगों की ट्रांसजेंडर पहचान फ़र्ज़ी बताने वाली ख़बर पर 1 लाख रुपये का जुर्माना

ज़ी तेलुगु न्यूज़ ने नवंबर 2024 में प्रसारित एक कार्यक्रम में एक मामले में गिरफ़्तार किए गए कुछ लोगों की ट्रांसजेंडर पहचान को ‘फ़र्ज़ी’ बताया था. इसे लेकर न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन ने 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए प्रसारण में इस्तेमाल की गई तस्वीरें हटाने का निर्देश भी दिया है.

मणिपुर: स्थानीय अख़बार के एडिटर-इन-चीफ पर हमला, गोली चलाई गई

18 फरवरी की रात इंफाल ईस्ट ज़िले में स्थानीय अख़बार 'नाहरोलगी थौडांग' के संपादक खोइरॉम लोयलाकपा अज्ञात हमलावरों ने हमला किया और उनकी गाड़ी पर गोलियां चलाई गईं. पुलिस ने कहा है कि हमले के पीछे का मकसद और हमलावरों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है. ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन और एडिटर्स गिल्ड ऑफ मणिपुर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है.

हाईवे पर नमाज़ से जाम लगने की झूठी ख़बर चलाने के मामले में ज़ी न्यूज़ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना

जम्मू-कश्मीर में ट्रक चालक द्वारा हाईवे पर नमाज़ पढ़ने के कथित वीडियो को बिना पुष्टि प्रसारित करने पर ज़ी न्यूज़ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. एनबीडीएसए ने इसे गंभीर चूक मानते हुए सोशल मीडिया सामग्री के उपयोग को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं.

‘बहाना हास्यास्पद है’: द वायर का कार्टून हटाने पर एडिटर्स गिल्ड ने आईटी मंत्रालय को घेरा

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा द वायर के इंस्टाग्राम से प्रधानमंत्री पर बने कार्टून हटाने के आदेश की निंदा की है. गिल्ड ने कहा कि बिना स्पष्ट कारण कंटेंट हटाना और पेज ब्लॉक करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.

गुजरात: अडानी समूह द्वारा दायर आपराधिक मानहानि केस में पत्रकार रवि नायर को दोषी क़रार दिया गया

गुजरात की एक अदालत ने स्वतंत्र पत्रकार रवि नायर को अडानी समूह की कंपनी द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराया और एक साल की क़ैद पांच हज़ार जुर्माना लगाया. अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने आरोप लगाया था कि नायर द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट्स मानहानिकारक थीं, जिससे कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा.

सालभर से ठप प्रेस काउंसिल, राज्यसभा में सांसद बोले- स्वतंत्र प्रेस के हित में फिर शुरू करें

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का कार्यकाल खत्म हुए एक साल से ज़्यादा हो चुका है और उसकी अध्यक्ष को पद छोड़े हुए भी क़रीब दो महीने बीत चुके हैं. बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह करते हुए कहा कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति पूरी करने और नई परिषद के गठन के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए, क्योंकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और मीडिया की जवाबदेही को मज़बूत करने के

वॉशिंगटन पोस्ट में छंटनी: एक-तिहाई स्टाफ बाहर, कई विदेशी ब्यूरो और स्पोर्ट्स सेक्शन बंद

अमेरिका के प्रतिष्ठित अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने कर्मचारियों के लगभग एक-तिहाई हिस्से की छंटनी करते हुए स्पोर्ट्स सेक्शन और कई विदेशी ब्यूरो बंद कर दिए हैं. आलोचकों का कहना है कि यह क़दम न सिर्फ पत्रकारिता, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श को भी कमज़ोर करेगा.

मुक़दमों के ज़रिये पत्रकारों को ‘चुप’ करा रहा है अडानी समूह: आरएसएफ

मीडिया पर निगरानी रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने आरोप लगाया है कि अडानी समूह 2017 से खोजी पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के ख़िलाफ़ दीर्घकालिक, महंगे और डराने वाले मुक़दमे दायर कर रहा है. संस्था ने इन मामलों को प्रेस की आज़ादी के लिए गंभीर ख़तरा बताया है.

मार्क टली: बीबीसी की आवाज़ और भरोसेमंद पत्रकारिता का एक दौर

बीबीसी से अपने लगभग तीन दशक के कार्यकाल (1964-94) के दौरान मार्क टली ने भारतीय उपमहाद्वीप की शायद ही ऐसी कोई बड़ी घटना हो जिसे उन्होंने कवर न किया हो. मार्क टली ने अपनी रिपोर्टिंग के ज़रिए जो साख बनाई वह बहुत कम लोगों को नसीब हो पाती है.

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