हिंदी पत्रकारिता के दो सौ साल: ‘मुख्य’ धारा की पतन गाथा!

एक समय कहा जाता था कि मीडिया प्रायः ऊंचा सुनने वाली दिल्ली को जनता की आवाज़ सुनने के लिए मजबूर कर देती है, लेकिन अब इसने इस प्रवाह को पूरी तरह पलट दिया है. अब यह सत्ताओं को आम लोगों की तकलीफ़े बताने के 'जोखिम' तो नहीं ही उठाती, उलटे सरकारों के हुक्म व फरमान उन तक इस रूप में ले आती है कि 'बुलडोजर जस्टिस' जैसा शब्द 'लोकतांत्रिक' हो जाता है.

गाज़ा में काम कर रहे फोटो और वीडियो पत्रकारों को 2026 का गोल्डन पेन ऑफ फ्रीडम अवॉर्ड

'गोल्डन पेन ऑफ फ्रीडम' डब्ल्यूएएन-आईएफआरए वार्षिक प्रेस स्वंतत्रता सम्मान है, जो उन लोगों या संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने प्रेस की आज़ादी की रक्षा करने और उसे बढ़ावा देने में बेहतरीन योगदान दिया है. इस साल यह अवॉर्ड उन फ़िलिस्तीनी फोटोग्राफरों और वीडियोग्राफरों को दिया जा रहा है जो तीन अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसियों- एएफपी, एपी और रॉयटर्स से जुड़े हैं.

ताजमहल को मंदिर बताने पर सुधीर चौधरी के शो को एनबीडीएसए की फटकार, कहा- निष्पक्ष नहीं

मीडिया नियामक संस्था एनबीडीएसए ने सुधीर चौधरी के पूर्व कार्यक्रम ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ में ताजमहल को हिंदू मंदिर बताए जाने संबंधी दावों को लेकर निष्पक्षता की कमी पाई है. संस्था ने कहा कि एएसआई के आधिकारिक निष्कर्षों को नजरअंदाज किया गया. संस्था ने आज तक को कार्यक्रम में संशोधन का निर्देश दिया है.

इंस्टाग्राम ने विशाखापत्तनम गूगल डेटा सेंटर के ख़िलाफ़ ग्रामीणों के विरोध वाले वीडियो को प्रतिबंधित किया

एनवायरनमेंटल रिपोर्टिंग कलेक्टिव (ईआरसी) द्वारा अपलोड की गई दो मिनट की वीडियो, जिसमें विशाखापत्तनम में गूगल डेटा सेंटर के ख़िलाफ़ ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन को दिखाया गया था, को कथित तौर पर सरकारी आदेश के बाद इंस्टाग्राम से हटा दिया गया है. इस वीडियो में दलित समुदायों के संघर्ष को दिखाया गया है, जिन पर कथित तौर से इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी ज़मीनें और घर छोड़ने का दबाव डाला जा रहा है.

एडिटर्स गिल्ड ने मीडिया के सवालों के प्रति सरकार की ‘असहिष्णुता’ की आलोचना की

पत्रकारों के संगठन एडिटर्स गिल्ड ऑफॉ इंडिया ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे और नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान भारतीय अधिकारियों और यूरोपीय पत्रकारों के बीच टकराव को 'शर्मनाक' बताते हुए इस पर चिंता व्यक्त की. गिल्ड ने इसे 'अफसोसजनक' भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक दशक से ज़्यादा के कार्यकाल में अब तक एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है.'

जिन्हें पत्रकारिता का रखवाला समझा, वे कूचा-ए-क़ातिल के मुसाफ़िर निकले

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे पत्रकार जगदीश उपासने ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करने वाली नॉर्वे की पत्रकार हेले ल्यूंग की आलोचना में उनकी निजी तस्वीरें पोस्ट की हैं. अगर सवाल पूछना अपमान है तो फिर पत्रकारिता विश्वविद्यालयों में क्या पढ़ाया जाए? प्रेस नोट का संपादन? नेता की मुस्कान का वर्णन? विद्यार्थी अगर देखें कि एक विदेशी पत्रकार ने प्रश्न पूछा और वरिष्ठों ने उसके व्यक्तित्व पर हमला शुरू किया तो वह क्या सीखेगा?

हेले ल्यूंग को चुप कराने की कोशिश क्यों चिंता का विषय है?

मीडिया का काम सरकार की तयशुदा बातों को जस का तस दोहराना नहीं, बल्कि सवाल पूछना है. सरकार की बातों का प्रचार करना उसके प्रवक्ताओं का काम है. इस मामले में हेले ल्यूंग बिल्कुल सही हैं, जब वह कहती हैं, ‘पत्रकारिता कभी-कभी टकरावपूर्ण होती है.' अगर नागरिकों को भेड़ों में नहीं बदलने देना है या हमेशा के लिए ख़ामोश नहीं कर देना, तो सवाल ज़रूरी हैं.

सवाल पूछने पर ट्रोलिंग से चरित्र-हनन तक: नॉर्वे की पत्रकार हेले ल्यूंग पर हमलों की पड़ताल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मीडिया की आज़ादी पर सवाल पूछने के बाद नॉर्वे की पत्रकार हेले ल्यूंग सोशल मीडिया पर हमलों का सामना कर रही हैं. उन्हें ‘भारत विरोधी’ और ‘एजेंट’ बताया जा रहा है. आलोचना अब पेशेवर असहमति से आगे बढ़कर निजी जीवन और चरित्र पर हमलों तक पहुंच गई है. यहां तक कि पत्रकारिता के पेशे से जुड़े कुछ एंकर उनके प्रधानमंत्री से सवाल किए जाने को लेकर आहत हैं.

‘दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवाल क्यों नहीं लेते?’ नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी से पत्रकार का सवाल

नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वहां की एक पत्रकार ने मीडिया के सवाल लेने को लेकर सवाल किया, लेकिन वे बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए. बाद में भारतीय दूतावास की प्रेस ब्रीफिंग में भी मानवाधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल पूछे गए.

नीदरलैंड में मोदी सरकार से प्रेस स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर तीखे सवाल, भारतीय राजनयिक से बहस

12 वर्षों से अधिक के अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचते रहे हैं. इसमें विदेशी दौरों के दौरान होने वाली खुली और बिना पूर्व-निर्धारित सवालों वाली संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी शामिल हैं. इसके बजाय वे मेजबान देशों के नेताओं के साथ पहले से तैयार संयुक्त बयान देना पसंद करते रहे हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूब चैनल 4PM न्यूज़ को बहाल करने का निर्देश दिया, ‘आपत्तिजनक’ वीडियो ब्लॉक रहेंगे

दिल्ली हाईकोर्ट ने 4PM न्यूज़ नेटवर्क और इसके संपादक संजय शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके यूट्यूब चैनल को बहाल करने का आदेश दिया है. यह चैनल बीते 12 मार्च से देश में अनुपलब्ध था. केंद्र सरकार ने इसे प्रतिबंधित करने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था.

अनिल अंबानी का एनडीटीवी पर मानहानिकारक ख़बरें छापने का आरोप, बोले- अडानी ‘कंपनियां क़ब्ज़ाना चाहते हैं’

उद्योगपति अनिल अंबानी ने आरोप लगाया कि एनडीटीवी ने पिछले कुछ महीनों में उनको ‘निशाना बनाते हुए’ 72 लेख प्रकाशित किए हैं, ताकि उसके वास्तविक मालिकों की ‘कब्ज़े की रणनीतियों’ को आगे बढ़ाया जा सके. उन्होंने जोड़ा कि एनडीटीवी का बहुसंख्यक शेयरधारक- अडानी समूह अनिल अंबानी की कंपनियों पर क़ब्ज़ा करना चाहता है.

भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने डिज़िटल निगरानी पर रिपोर्टिंग के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार

भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा को 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री' श्रेणी में पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. यह पुरस्कार ब्लूमबर्ग की नताली ओबिको पियर्सन के साथ साझा किया गया, जिन्होंने 'ट्रैप्ड' नामक प्रोजेक्ट पर काम किया है. यह रिपोर्ट भारत की एक न्यूरोलॉजिस्ट की साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' की कहानी बयां करती है.

‘अनौपचारिक आपातकाल जैसी स्थिति’, विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक-2026 में भारत 157वें स्थान पर

आरएसएफ के प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत 157वें स्थान पर खिसक गया है. रिपोर्ट में मोदी सरकार के दौर में बढ़ती हिंसा, मीडिया का केंद्रीकरण और सत्तारूढ़ विचारधारा के प्रभाव को प्रेस स्वतंत्रता के गंभीर संकट की वजह बताया गया है.

भारत उन देशों में शामिल, जहां फेसबुक, इंस्टाग्राम ख़ुद कंटेंट पर रोक लगा सकते हैं: रिपोर्ट

केंद्रीय गृह मंत्रालय का 'सहयोग’ पोर्टल अधिकृत पुलिस अधिकारियों को बड़ी संख्या में कंटेंट हटाने के आदेश देने, एकतरफ़ा कार्रवाई करने और सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थों के साथ सीधे संवाद की सुविधा देता है. जहां एक्स कॉर्प ने 'सहयोग' पोर्टल को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. वहीं, मेटा का रवैया बिल्कुल अलग है. वह पोर्टल के ज़रिए कंटेंट हटाने का अनुरोध मिलने पर तुरंत कंटेंट तक पहुंच पर रोक लगा देता है.

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