पिछले दशकों में एक विचित्र परिपाटी देखने को मिली है. लोकसभा चुनाव के वर्ष में अचानक से समाचार-पत्रों की संख्या में गहरी वृद्धि हो जाती है. यह महज चुनावी मीडिया है, जो लोकतंत्र को गहरा करने में कोई मदद नहीं करता.
बीते 4 जुलाई को पुणे के पास एक कस्बे में नदी किनारे अवैध निर्माण गतिविधि की रिपोर्टिंग कर रहीं पत्रकार स्नेहा बर्वे पर दिनदहाड़े जघन्य हमला किया गया. आरोपी भूमि मालिक ने उन्हें लाठी से तब तक पीटा, जब तक वह बेहोश नहीं हो गईं.
बिहार के बेगूसराय ज़िले में स्वतंत्र पत्रकार अजीत अंजुम के ख़िलाफ़ बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न प्रक्रिया से संबंधित हालिया रिपोर्टिंग को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है. अंजुम का कहना है कि 'सवालों के जवाब देने की बजाय अब पत्रकारों को डराने-धमकाने की कोशिश शुरू हो गई है. मैं डरूंगा नहीं, सिर्फ़ सच दिखाऊंगा.'
एक्स ने रॉयटर्स का एकाउंट ब्लॉक करने के भारत सरकार के दावे का खंडन करते हुए बताया कि कंपनी को 3 जुलाई को रॉयटर्स सहित 2,355 एकाउंट ब्लॉक करने के आदेश मिले थे. इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा था कि भारत सरकार को रॉयटर्स हैंडल को बंद रखने की कोई ज़रूरत नहीं है.
भारत में रॉयटर्स, तुर्की मीडिया की प्रमुख न्यूज़ वेबसाइट टीआरटी न्यूज़ और चीन के ग्लोबल टाइम्स न्यूज़ जैसे अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों के एक्स हैंडल रविवार देर रात फिर से बहाल कर दिए गए. एक्स पर इन एकाउंट्स को ब्लॉक करने के लगभग 24 घंटे बाद दोबारा बहाल किया गया.
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स, चीन की सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स और तुर्की मीडिया की प्रमुख न्यूज़ वेबसाइट टीआरटी न्यूज़ के एक्स हैंडल भारत में ब्लॉक कर दिए गए हैं.
कर्नाटक हाईकोर्ट में एक्स की ओर से पेश वकील ने कहा है कि भारत में अब हर ‘ऐरे-गैरे’ सरकारी अधिकारी को ऑनलाइन कंटेंट हटाने का आदेश देने का हक़ मिल गया है. एक्स की कोर्ट से मांग है कि वह घोषणा करे कि आईटी अधिनियम की धारा 79(3)(b) किसी अधिकारी को जानकारी हटाने का आदेश देने का अधिकार नहीं देती.
वाराणसी पुलिस ने महामना की मूर्ति की सफाई संबंधी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अशांति और गलत सूचना फैलाने के आरोप में छह पत्रकारों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. यूपी कांग्रेस ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि सरकार आईना दिखाया जाना बर्दाश्त नहीं कर सकती, इसलिए सच बोलने वालों को दंडित कर रही है.
अगर रामनाथ गोयनका जीवित होते और आज के 'अघोषित आपातकाल' पर अख़बारों के मालिकों और संपादकों को पत्र लिखते, तो शायद यह दर्ज करते कि वह प्रेस जो स्वतंत्र होने की अनुमति का इंतज़ार करती है, उसने अपनी मर्ज़ी से आजीवन क़ैदी बनना चुना है. और वह संपादक जो सत्य से मुंह मोड़ता है, उसे उस कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और 21 अन्य मीडिया संगठनों ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि पत्रकारों के पेशेवर कार्यों को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के दायरे से बाहर रखा जाए. इस ज्ञापन को 1,000 से अधिक पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्टों का समर्थन प्राप्त है.
फ़र्ज़ी ख़बरों के तेजी से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए कर्नाटक सरकार ने एक नया क़ानून प्रस्तावित किया है, जिसके तहत सात साल तक की सजा और अधिकतम 10 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है. मसौदे में कहा गया है कि आज सोशल मीडिया दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन इसके इस्तेमाल में सावधानी भी जरूरी है.
एक टीवी बहस के दौरान पैनलिस्ट की विवादास्पद टिप्पणियों के लिए आंध्र प्रदेश पुलिस ने साक्षी टीवी के एंकर कोमिनेनी श्रीनिवास राव को गिरफ़्तार किया था. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि पत्रकारीय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए.
इन दिनों पंजाब की पुलिस स्वतंत्र पत्रकारों को परेशान कर रही है. उनसे तमाम क़िस्म की निजी जानकारी मांग रही है. इससे पत्रकारों में आक्रोश है. उनके मुताबिक़, यह पत्रकारों को डराने का प्रयास है.
साक्षी टीवी के वरिष्ठ पत्रकार कोम्मिनेनी श्रीनिवास राव को आंध्र प्रदेश पुलिस ने 9 जून को उनके हैदराबाद स्थित घर से गिरफ़्तार किया है. उनके द्वारा संचालित लाइव टॉक शो में एक पैनलिस्ट ने कथित तौर पर 'आपत्तिजनक और दुर्भावनापूर्ण' टिप्पणियां कीं थीं. इस घटना के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं.
बीते नौ अप्रैल से ऑल इंडिया रेडियो के त्रिची एफएम 102.1 ने अपने रात्रिकालीन प्रसारण में तमिल के बजाय हिंदी सामग्री का प्रसारण शुरू किया है, जिसकी आलोचना हो रही है. कहा जा रहा है कि श्रोताओं की नाराज़गी के चलते तमिल प्रोग्राम फिर शुरू हो सकते हैं.