भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई की मां और राजनीतिक कार्यकर्ता कमलताई गवई ने बुधवार (1 अक्तूबर) को कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से 5 अक्टूबर को अमरावती में होने वाले आरएसएस शताब्दी समारोह में शामिल नहीं होंगी.
मध्य प्रदेश और राजस्थान में ख़राब कफ सिरप पीने के बाद आठ बच्चों की मौत हो गई है. छिंदवाड़ा में छह बच्चों की मौत हुई है. राजस्थान के सीकर और भरतपुर में दो बच्चों की मौत हुई है. इन मौतों के बाद सिरप की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है, सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं.
पिछले हफ़्ते यूपी के अलीगढ़ में पुलिस ने अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रवक्ता अशोक पांडे को हाथरस में एक बाइक शोरूम के मालिक अभिषेक गुप्ता की हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया. उनकी पत्नी पूजा शकुन पांडे, जो महासभा की महासचिव और निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर हैं, इस मामले में मुख्य आरोपी हैं और फ़रार हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि किसी अन्य देश के समर्थन में मैसेज पोस्ट करने मात्र से भारत के नागरिकों में रोष या वैमनस्य पैदा हो सकता है, यह बीएनएस की धारा 196 (शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत दंडनीय भी हो सकता है, लेकिन यह धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को ख़तरे में डालने वाले कृत्य) के कठोर प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरएसएस शताब्दी समारोह में संघ की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका का गुणगान किया, लेकिन ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि आरएसएस ने न तो स्वतंत्रता आंदोलन में संगठित भागीदारी की और न ही अंग्रेजों से टकराव किया.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में देशभर में हुए 24,678 रेल हादसों में 21,803 लोगों की मौत दर्ज की गई. महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा मौतें रिपोर्ट की गई.
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस साल 5 अगस्त को सूबे में 'अलगाववाद को बढ़ावा देने' और 'भारतीय राज्य के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने' के आरोप में 25 किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की गई.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में देशभर में 10,786 किसानों और कृषि मज़दूरों ने आत्महत्या की. इनमें से सबसे ज़्यादा संख्या महाराष्ट्र 38.5%, उसके बाद कर्नाटक 22.5% का स्थान था. किसान संगठनों ने इस स्थिति के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.
चुनाव आयोग ने बिहार में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ पूरी कर अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है. 47 लाख मतदाताओं के नाम कम हुए हैं. आयोग ने नाम हटाए जाने के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी है. दस्तावेज़ की कमी से हटाए गए नाम, कितने नए मतदाता और अवैध विदेशी प्रवासियों की संख्या जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी नहीं दी गई हैं.
हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख की निदेशक और सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा कि लद्दाख के लिए खड़े होने के कारण वांगचुक को निशाना बनाया गया. उन्होंने पूछा कि अगर सोनम राष्ट्र-विरोधी थे, तो सरकार उनके प्रयासों को पुरस्कृत क्यों कर रही थी? क्या वे महीनेभर के अंदर ही राष्ट्र-विरोधी हो गए?
बिहार में तीन महीने तक चले एसआईआर प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूची में लगभग 6% की कमी आई है, जिसमें लगभग 47 लाख नाम हटाए गए हैं. चुनाव आयोग के अनुसार, 'अगर कोई पात्र व्यक्ति अभी भी मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना चाहता है, तो वह चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख से दस दिन पहले तक आवेदन जमा कर सकता है.'
आरएसएस द्वारा विजयादशमी और संगठन के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की मां कमलताई गवई को आमंत्रित करने की ख़बर सामने आने के बाद कमलताई ने कथित तौर पर एक बयान जारी कर कहा कि वे एक ‘कट्टर आंबेडकरवादी’ हैं और इसलिए इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी.
एनसीआरबी की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 2023 में अनुसूचित जनजातियों के ख़िलाफ़ अपराधों में 28.8% और साइबर अपराधों में 31.2% की ख़तरनाक वृद्धि दर्ज की गई है. अकेले मणिपुर में अनुसूचित जनजातियों के ख़िलाफ़ अपराध के 3,399 मामले दर्ज किए गए, जो 2022 में दर्ज केवल एक मामले की तुलना में काफी अधिक है.
द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की जांच में खुलासा हुआ है कि बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले के ढाका विधानसभा क्षेत्र में लगभग 80,000 मुस्लिम मतदाताओं को ग़लत तरीके से ग़ैर-भारतीय नागरिक बताकर बार-बार मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई है.
लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष चेयरिंग दोरजे लाकरुक ने कहा कि लद्दाखियों ने हमेशा विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेश की मांग की थी. हम अनुच्छेद 370 को कोसते थे. लेकिन उसी ने सात दशक तक हमारी ज़मीन और पहचान को सुरक्षा दी. उसके हटने के बाद अब बाहरी लोगों की आमद, होटल चेन और बड़े प्रोजेक्ट स्थानीय जीवन पर संकट बन गए हैं.