13 अक्टूबर को दिल्ली सरकार ने ‘दीपावली मंगल मिलन’ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ बातचीत के लिए आमंत्रित किया था. लेकिन इस कार्यक्रम में उर्दू मीडिया से जुड़े किसी पत्रकार को शामिल नहीं किया गया.
लुधियाना पुलिस ने आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप के ख़िलाफ़ एक टीवी डिबेट के दौरान वाल्मीकि का कथित रूप से अपमान करने के आरोप में भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज भावदास के राष्ट्रीय संयोजक चौधरी यशपाल की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है. 7 अक्टूबर को प्रसारित अंजना के शो में सीजेआई बीआर गवई पर जूता फेंकने की घटना पर चर्चा हुई थी.
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ने ज़ी न्यूज़ को कथित 'मेहंदी जिहाद' पर प्रसारित कार्यक्रमों के वीडियो हटाने और टाइम्स नाउ नवभारत को 'लव जिहाद' पर अपने दो प्रसारणों से टिकर हटाने का निर्देश दिया है. शिकायतकर्ता ने कहा था कि ये कार्यक्रम सांप्रदायिक हैं और मुसलमानों को बदनाम करते हैं.
गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के क्लर्क निशिध जानी की साबरमती जेल में संदिग्ध हालात में मौत हो गई है. वे पत्रकार महेश लांगा से जुड़े कथित दस्तावेज़ लीक मामले में गिरफ़्तार थे. जानी की मौत ने भ्रष्टाचार और जीएसटी घोटाले से जुड़े इस मामले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
उत्तरकाशी के पत्रकार राजीव प्रताप 10 दिन से लापता थे, अब उनका शव भगीरथी नदी से मिला है. पुलिस दुर्घटना की संभावना जता रही है पर उनके परिवार ने उन्हें धमकियां मिलने का आरोप लगाया है. सीपीजे ने स्थानीय मुद्दों पर निर्भीक रिपोर्टिंग करने वाले प्रताप की मौत की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है.
एक्स ने कहा कि वह कर्नाटक हाईकोर्ट के हालिया आदेश से बेहद चिंतित है, जो लाखों पुलिस अधिकारियों को 'सहयोग' नामक एक गुप्त ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से मनमाने ढंग से सामग्री हटाने के आदेश जारी करने की अनुमति देता है. एक्स के अनुसार, यह भारतीय नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों का हनन है.
ह्यूमन राइट्स एंड रिलिजियस फ्रीडम जर्नलिज़्म अवॉर्ड्स 2025 में द वायर हिंदी के पत्रकार अंकित राज और श्रुति शर्मा को ‘बेस्ट रिपोर्टिंग ऑन ह्यूमन राइट्स एंड रिलिजियस फ्रीडम (हिंदी)’ कैटेगरी में टॉप-3 फाइनलिस्ट चुना गया. उनकी ख़बरें हरियाणा चुनाव और संभल हिंसा पर आधारित थीं.
लखनऊ की एक अदालत ने समाचार एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एजेंसी ने बार-बार चुनाव आयोग के हवाले से फ़र्ज़ी ख़बरें प्रकाशित की हैं; ऐसे बयान जो न आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर थे, न ही सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किए गए.
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी9 भारतवर्ष, आजतक, एबीपी, ज़ी न्यूज़ और टीवी 18 को औपचारिक नोटिस भेजा है क्योंकि ये चैनल हिंदी होने के बावजूद प्रसारण में करीब तीस प्रतिशत उर्दू शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं. मंत्रालय ने भाषा विशेषज्ञ की नियुक्ति करने का भी निर्देश दिया है.
जहां एक ओर दिल्ली की रोहिणी ज़िला अदालत ने चार पत्रकारों पर अडानी समूह संबंधी ख़बरों के प्रकाशन पर रोक लगाने के एकतरफ़ा आदेश को रद्द किया, वहीं इसी आदेश को चुनौती देने वाली पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता की याचिका पर इसी कोर्ट के अन्य जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
बीते 13 सितंबर को कोच्चि में पत्रकार और कार्यकर्ताओं ने मई महीने में महाराष्ट्र एटीएस द्वारा गिरफ़्तार पत्रकार रेज़ाज एम. शीबा सिदीक़ की रिहाई की मांग करते हुए बैठक की थी. अब केरल पुलिस ने आयोजकों और वक्ताओं के ख़िलाफ़ अवैध जमावड़ा और पुलिस कर्तव्य में बाधा जैसे आरोपों में एफआईआर दर्ज की है.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दो मीडिया संस्थानों और कई यूट्यूब चैनलों को नोटिस भेजकर अडानी समूह का उल्लेख करने वाले कुल 138 वीडियो और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने का आदेश दिया है. यह आदेश अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा दायर मानहानि के एक मामले में 6 सितंबर को दिल्ली ज़िला अदालत द्वारा जारी एकपक्षीय आदेश पर आधारित हैं.
पिछले वर्षों में हिंदी पत्रकारिता अमूमन यूट्यूब और वायरल वीडियो तक सिमट गई है. ज़मीनी पत्रकार की जगह 'सेलेब्रिटी एंकर' ने ली है. क्या यूट्यूब के भड़काऊ मोनोलॉग खोजी पत्रकारिता का गला घोंट रहे हैं? हिंदी के प्रख्यात नाम वीडियो तक क्यों सिमट गए हैं? उन्होंने गद्य का रास्ता क्यों त्याग दिया है?
इस विषय पर द वायर हिंदी की परिचर्चा.
अटॉर्नी जनरल ने आईटी मंत्रालय की इस व्याख्या का समर्थन किया कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट आरटीआई कानून को कमजोर नहीं करता. पत्रकार संगठनों और विपक्ष ने संशोधन पर आपत्ति जताई है, जबकि कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव भ्रष्टाचार और जनहित मामलों से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच को सीमित करेगा.
कॉमनवेल्थ ह्यूमनराइट्स इनिशिएटिव, कॉमनवेल्थ पत्रकार संघ और कॉमनवेल्थ वकील संघ द्वारा प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि 56 राष्ट्रमंडल सदस्य देशों में से कई में राष्ट्रीय क़ानून प्रेस की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से बाधित करते हैं और अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार को अनुचित रूप से प्रतिबंधित करते हैं.