धमाके के बाद लाल क़िले का दर्दनाक दृश्य- ‘कहीं हाथ, कहीं पैर’

ग्राउंड रिपोर्ट: सोमवार शाम लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के बाहर एक कार में धमाका हुआ था. धमाके से आस-पास का इलाका थर्रा गया और लोगों में अफ़रातफ़री मच गई थी. द वायर ने घटनास्थल पर पहुंचकर ज़मीनी हालात देखे और और प्रत्यक्षदर्शियों से बात की.

भारतीय उद्योगपति रिसर्च में निवेश क्यों नहीं करते?

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर क्या ग़लतफ़हमियां हैं? क्या सच में उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सरकारी फंड के बंटवारे में असमानता है?
क्यों हमारे देश में ऐसे अरबपति हैं जिन्होंने शोध और इनोवेशन में निवेश किया है? पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन और राजनीतिक वैज्ञानिक देवेश कपूर से उनकी नई किताब A Sixth of Humanity पर बात कर रहे हैं द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज.

क्या आरएसएस ग़ैर-सियासी है?

अपनी स्थापना के सौ साल पूरे कर चुका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 'राजनीतिक' न होने का दावा करता है, हालांकि उसकी विचारधारा की छाप देश की सर्वोच्च सत्ता से लेकर शिक्षण संस्थानों, यहां तक कि सिनेमा तक पर देखी जा सकती है. आरएसएस के सौ सालों के सफ़र पर पत्रकार और लेखक धीरेन्द्र झा और द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी.

बिहार एसआईआर: 68 लाख मतदाताओं के नाम क्यों हटाए गए?

बिहार एसआईआर की अंतिम लिस्ट आ चुकी है. इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग पर काफ़ी समय से हमलावर था, इस बीच कई ऐसे सवाल थे जिनका जवाब या तो आयोग के पास नहीं था या वो उनसे बच रहा था. अब फाइनल सूची आ जाने के बाद भी कई सवाल बाक़ी हैं, जिन पर द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज के साथ चर्चा कर रहे हैं अलीशान जाफ़री.

राजभाषा दिवस: हिंदी ने क्या खोया, क्या पाया?

हिंदी क्षेत्र राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा ताकतवर है. शिक्षा, सामाजिक विज्ञान और पत्रकारिता के क्षेत्र में इसकी यह शक्ति किस तरह दिखाई देती है? क्या इसका योगदान इसकी शक्ति के अनुरूप है? 14 सितंबर को राजभाषा दिवस के अवसर पर द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज की वरिष्ठ लेखक अशोक वाजपेयी और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद से बातचीत.

विकास के नाम पर विनाश

देश के विभिन्न इस समय भारी बारिश का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ एक बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं. 'विकास' की अंधी दौड़ का पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या असर हो रहा है, इस बारे में देश के 'जलपुरुष' कहे जाने वाले राजेंद्र सिंह से बात कर रहे हैं इंद्र शेखर सिंह.

बिहार एसआईआर और नागरिकता: चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल

चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया के बाद बताया है कि पहली ड्राफ्ट सूची में 65 लाख वोटर्स के नाम नहीं आए हैं. पहले से ही प्रक्रिया पर कई सवाल थे, और अब यह दावा भी जुड़ गया है कि यह कवायद समावेशी यानी वोटर जोड़ने की नहीं बल्कि निकालने की है. स्वतंत्र पत्रकार पूनम अग्रवाल और द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी.

कांवड़ यात्रा का बहाना, मुस्लिमों पर निशाना

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सरकारों द्वारा जारी उन निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की गई है, जिसमें सरकारों ने कांवड़ यात्रा के रास्ते में पड़ने वाली दुकानों पर क्यूआर कोड लगाने को कहा है, जिसे स्कैन करने पर मालिक का नाम पता चल सके. क्या यह धार्मिक विभाजन गहराने का प्रयास है? इस याचिका को दायर करने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद और द वायर की संपादक सीमा चिश्ती के साथ चर्चा

आपातकाल असली संविधान हत्या था या बीते 11 बरस?

25 जून को आपातकाल के पचास साल पूरे होने के अवसर पर 'संविधान हत्या दिवस' मनाते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 1975 में लोकतंत्र को बंदी बना लिया गया था. हालांकि मोदी सरकार के बीते ग्यारह साल के कार्यकाल को लेकर भी यही आलोचना होती रही है. इस अघोषित आपातकाल पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा और द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.

ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने कितने लड़ाकू विमान खोए? भारत को क्या फायदा हुआ?

भारत-पाकिस्तान के संघर्ष में भारत ने कितने विमान खोए? इस कार्रवाई से भारत को क्या हासिल हुआ? क्या भारत को युद्ध की स्थिति में धकेला गया? ऑपरेशन सिंदूर के महीनेभर बाद सेंटर फॉर जॉइंट वॉर स्टडीज के महानिदेशक मेजर जनरल (रिटा.) अशोक कुमार से द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज की बातचीत.

माओवाद अंतिम चरण में: क्या बसवराजू के एनकाउंटर के बाद बस्तर में शांति आएगी?

नारायणपुर के अबूझमाड़ के जंगलों में हाल ही में हुए एनकाउंटर में सीपीआई (माओवादी) के जनरल सेक्रेटरी नमबाला केशव राव उर्फ बसवराजू मारे गए. बस्तर रेंज के आईजी ने कहा है कि बसवराजू पिछले 40-45 सालों से माओवादी आंदोलन का हिस्सा थे और 200 से ज़्यादा नक्सली हमलों में शामिल थे. सरकार और सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, पर क्या इसे नक्सलवाद का अंत मान सकते हैं? द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष

क्या सर्वदलीय डेलिगेशन मोदी सरकार की डिप्लोमैटिक नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश है?

भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के बाद 30 देशों में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले के राजनीतिक और कूटनीतिक निहितार्थों पर द वायर के पॉलिटिकल एडिटर अजॉय आशीर्वाद और द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज की चर्चा.

जंग बाद की बात, सुरक्षा इंतज़ाम पर चुप्पी क्यों?

पहलगाम हमले के क़रीब चार हफ्ते बाद भी इसे अंजाम देने वाले आतंकियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. पीएम क़रारा जवाब देने की बात करते हैं पर सुरक्षा के इंतज़ामों के बारे में चुप्पी है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्या घट रहा है, इस बारे में द वायर की संपादक सीमा चिश्ती और वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी से चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.

भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच मीडिया का तमाशा

भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. हालांकि, इस बीच भारतीय टीवी मीडिया द्वारा युद्धोन्माद में ढेरों ग़लत जानकारियों और फेक न्यूज़ को समाचार की शक्ल में पेश किया गया. इस बारे में द हिंदू के वरिष्ठ पत्रकार कल्लोल भट्टाचार्जी और द वायर के पॉलिटिकल एडिटर अजॉय आशीर्वाद के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.

क्या जाति जनगणना पहलगाम और राष्ट्रीय सुरक्षा से ध्यान भटकाने का ज़रिया है?

वीडियो: पहलगाम आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों के बीच केंद्र सरकार ने जाति जनगणना करवाने की बात कही है. क्या यह बड़े सवालों से ध्यान हटाने का तरीका है? द वायर की संपादक सीमा चिश्ती और वरिष्ठ पत्रकार उमाकांत लखेड़ा के साथ चर्चा कर रही हैं मीनाक्षी तिवारी.

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