आकृति, सृष्टि, आदित्य, रूपेश, सत्यम ख़ुद मज़दूर नहीं, वे भारतीय संविधान की प्रस्तावना वाले भारत के लोग हैं. भारत में अगर किसी तबके को आज़ादी, बराबरी और इंसाफ़ में कमी का अहसास हो और अगर वे आवाज़ उठाएं तो बाक़ी लोगों के कान ऐसे हों कि उनकी आवाज़ सुन सकें. सिर्फ़ सुनें नहीं, उनकी आवाज़ में अपनी आवाज़ भी मिलाएं. इसी संवैधानिक संवेदना और सहानुभूति के ज़रिए भारतीयता का निर्माण होता है.
दिल्ली की भाजपा सरकार ने बकरीद के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. दिल्ली में पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वच्छता सुनिश्चित करने का हवाला देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध की अनुमति नहीं है. कुर्बानी केवल वैध जगहों पर ही की जा सकती है. इसके अलावा बकरीद पर गौवंश, गाय, बछड़ा, ऊंट और अन्य प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी करने पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है.
भारत में 1961 से दहेज प्रथा अवैध है, लेकिन आज भी इस कुरीति के चलते सलाना हज़ारों लड़कियां अपनी जान गंवा रही हैं. एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि देशभर में साल 2024 में दहेज ने करीब 5,737 जानें ली है, यानी हर दिन औसतन 15 से 16 मौत. राज्यवार डेटा देखें, तो 2024 में दहेज प्रताड़ना के कारण उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,038 मौतें हुईं, वहीं दूसरे नंबर पर बिहार रहा, जहां 1,078 ऐसे मामले सामने आए.
आरएसएस से जुड़ा जनजाति सुरक्षा मंच 24 मई को दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. झारखंड के सौ से अधिक संगठनों, मूलवासी, जन संगठन के प्रतिनिधि, पारंपरिक स्वशासन प्रतिनिधि, शिक्षाविद व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे बहिष्कार करने की अपील करते हुए कहा कि समागम की मूल सोच आदिवासी विरोधी है.
हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व पदाधिकारी सुशील प्रजापति पर गाज़ियाबाद में एलएलबी की एक छात्रा से बलात्कार का आरोप है. उन्हें आठ महीने बाद 17 मई को ज़मानत पर रिहा किया गया था, जिसके बाद उसके समर्थकों ने उसे फूल मालाएं पहनाकर, कंधों पर उठाए, नारे लगाते एक जुलूस निकाला. एनसीआरबी के अनुसार, 2023 में उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों से जुड़े सबसे अधिक 66,381 मामले दर्ज किए गए थे.
जहां एक तरफ़ हिंदुत्व से जुड़े संगठन और भाजपा सरकारें 'लव जिहाद' के नफ़रती नैरेटिव का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करके मुस्लिम पुरुषों के ख़िलाफ़ नफ़रत और कभी-कभी हिंसा भड़का रही हैं, वहीं दूसरी तरफ़ इसका असर दूसरे धार्मिक कट्टरपंथी समुदायों- सिख और ईसाई पर भी पड़ रहा है. इन सभी के बीच समानता यह है कि इन्हें भरोसा नहीं है कि संविधान के अनुसार वयस्क महिलाएं अपनी पसंद से साथी चुन सकती हैं और उससे विवाह कर सकती
एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन ने गुजरात के दो चिड़ियाघरों के भीतर जंगली जानवरों को खिलाने के लिए भैंसों का वध किए जाने को चुनौती देते हुए कहा था कि चिड़ियाघर परिसर के भीतर पशुओं का वध करना बूचड़खाना चलाने के समान है, इसलिए पशु क्रूरता निवारण अधिनियम सहित अन्य क़ानूनी प्रावधानों का पालन होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया.
पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स ने एक बयान में कहा कि सांप्रदायिक उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार के कारण उत्तम नगर में तरुण की हत्या मामले के आरोपियों के परिवारों के बहुत सारे लोग अपने घरों में दो महीने बाद भी वापस नहीं लौट पाए हैं. इन परिवारों की औरतों और बच्चों को सांप्रदायिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है.
सेवानिवृत्त लोकसेवकों के मंच 'कॉन्स्टिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप' ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को खुला पत्र लिखकर कहा कि देशभर के लगभग 50 आईएएस, आईपीएस अधिकारियों ने 4 अप्रैल 2022 को एक ही दिन भोपाल के कोलार इलाके के पास प्लॉट खरीदे. यह खरीद 3,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित 'भोपाल वेस्टर्न बाईपास' के आसपास हुई है. ज़मीन खरीद के लगभग 16 महीने बाद अगस्त, 2023 में इस परियोजना को मंज़ूरी मिली थी.
राजस्थान सरकार द्वारा संचालित कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जेके लोन अस्पताल में 11 मई को सीज़ेरियन प्रसव के बाद हुई जटिलताओं के चलते एक और महिला की मौत हो गई. इसके साथ ही पिछले एक सप्ताह में ज़िले में ऐसी मौतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. बताया गया है कि शहर के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद इलाज करा रही छह अन्य महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ जघन्य अपराधों में दोषी क़ैदियों को पैरोल दिए जाने की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि आयोग जल्द ही केंद्र सरकार को अपनी सिफ़ारिशें सौंपेगा, जिनमें महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराधों में दोषियों के लिए पैरोल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है.
एनसीआरबी द्वारा जारी 'भारत के कारागार आंकड़े-2024' के अनुसार, दिल्ली की जेलों में ऑक्यूपेंसी रेट 194.6 प्रतिशत था, जो देशभर में सबसे ज़्यादा था. हालांकि 2023 में दर्ज 200 प्रतिशत के ऑक्यूपेंसी रेट से इसमें थोड़ा सुधार हुआ है, फिर भी यह इस सूची में सबसे ऊपर है.
वर्ष 2024 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध देश के 19 बड़े शहरों में सबसे ज़्यादा रहे. यहां कुल 13,396 मामले दर्ज किए गए. दिल्ली में बलात्कार के मामलों की संख्या सबसे अधिक है और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसक अपराधों में भी इसकी हिस्सेदारी ज्यादा है.
1947 में भारत से पाकिस्तान का अलग होना सिर्फ़ ज़मीन के लिए लड़ी गई लड़ाई नहीं थी, यह औरतों के शरीर और समुदाय की 'इज़्ज़त' के लिए भी उतनी ही बड़ी लड़ाई थी. यह टकराव आज भी दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के बीच जारी है. इस स्त्री-द्वेषी दृष्टि की वजह से महिलाओं को आज भी यह चुनने की आज़ादी नहीं है कि वे किससे दोस्ती करें, किससे प्रेम या किसके साथ संबंध बनाएं और किससे शादी करें.
बीते सप्ताह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक हेड कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर बिहारी पहचान को लेकर एक 22 वर्षीय डिलीवरी बॉय पांडव कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी. बीते कुछ बरसों में भारत में धर्म और जाति के आधार पर हो रही हिंसा सामान्य हो चली है. इसमें क्षेत्रीय भेदभाव आधारित हिंसा की ख़बरें भी आती रही हैं, हालांकि बिहारी प्रवासी इस हिंसा के निशाने पर दशकों से रहे हैं.