मध्य प्रदेश के फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में कथित ज़मीन विवाद को लेकर स्थानीय भाजपा नेता और उनके साथियों ने एक 40 वर्षीय किसान की बेरहमी से पिटाई की और थार गाड़ी से कुचल दिया गया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई. मृतक की बेटी ने भाजपा नेता पर मारपीट और निर्वस्त्र करने का आरोप भी लगाया है.
पूर्व भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के ‘मुस्लिम लड़कियां लाओ, नौकरी पाओ’ वाले बयान को बसपा प्रमुख मायावती ने घृणित और नफ़रत फैलाने वाला बताया है. उन्होंने कहा कि ऐसे आपराधिक और असामाजिक तत्व क़ानून को अपने हाथ में लेकर समाज में ज़हर घोल रहे हैं, जिन पर सरकार को सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए.
असम सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा ने शनिवार को कहा कि भाजपा सरकार द्वारा 'लव जिहाद' के ख़िलाफ़ लाए जा रहे प्रस्तावित क़ानून में पुरुष आरोपी के माता-पिता को गिरफ़्तार करने का प्रावधान शामिल होगा. शर्मा ने यह भी कहा कि तीन से ज़्यादा बच्चों को जन्म देने वाली महिलाएं स्त्री सशक्तिकरण की सरकारी योजनाओं के लिए पात्र नहीं होंगी.
नागरिक सहभागिता मंच लोकलसर्किल्स द्वारा किए गए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण से पता चला है कि दिल्ली-एनसीआर में चार में से तीन परिवार ज़हरीली हवा के दुष्प्रभावों के कारण गले में ख़राश, खांसी से लेकर आंखों में जलन, सिरदर्द और नींद न आने जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं.
छठ केवल पूजा का नहीं, बल्कि घर लौटने, पहचान हासिल करने और सवाल पूछने का पर्व है. शारदा सिन्हा सिर्फ सूरज की आराधना नहीं करती थीं, उनके गीत रेलगाड़ियों के डिब्बों में, आंगन की हवा में, रेडियो पर बजते थे. उनकी आवाज़ पीढ़ियों को जोड़ती थी. उंनका संगीत घर का मानचित्र बन जाता था.
दीपावली पर पटाखे जलाने को जायज़ ठहराते हुए दक्षिणपंथी समूहों ने एक बार फिर यह दिखाने की कोशिश की कि बहुसंख्यक समुदाय का त्योहार बिना किसी नियम-क़ायदे, प्रदूषण नियंत्रण उपायों या नागरिकों और जानवरों के स्वास्थ्य की परवाह किए मनाया जा सकता है.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने देश में कथित तौर पर खाना पकाने में प्रयोग किए गए तेल को व्यापक रूप से बार-बार इस्तेमाल किए जाने पर चिंता जताने वाली एक शिकायत पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है.
मध्य प्रदेश में दीपावली के दौरान कार्बाइड गन से सैकड़ों लोगों की आंखों में चोटें आईं और कई ने दृष्टि ही गंवा दी. अब बताया गया है कि आईसीएमआर ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कैल्शियम कार्बाइड से जुड़ी ऐसी गन गंभीर दृष्टि हानि का कारण बन सकती हैं. चेतावनियों के बावजूद प्रशासन ने बिक्री नहीं रोकी, जिससे कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को एक 31 वर्षीय महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जिन्होंने अपने परिवार द्वारा दूसरे धर्म के दोस्त से शादी करने के विरोध के बीच अपना घर छोड़ दिया था. कोर्ट ने कहा कि वह वयस्क हैं और अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं.
आंध्र प्रदेश के कुरनूल ज़िले में हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही एक निजी लक्ज़री बस में शुक्रवार तड़के आग लग गई. हादसे में 25 से अधिक यात्रियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हैं. घटना के बाद तेलंगाना के परिवहन मंत्री ने निजी बस संचालकों को चेताया है कि यदि किसी बस ऑपरेटर ने ख़राब बस चलवाकर यात्रियों की जान ख़तरे में डाली तो उन पर हत्या के मुक़दमे दर्ज किए जाएंगे.
पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने में 77 फीसदी गिरावट के बावजूद दिल्ली की हवा दीपावली के बाद पांच साल में सबसे ज़्यादा प्रदूषित रही. रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस बार रिकॉर्ड स्तर का प्रदूषण स्थानीय कारणों, ख़ासकर पटाखों और धीमी हवाओं, की वजह से हुआ, न कि बाहर से आए धुएं से.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में कहा कि किसी वॉट्सऐप संदेश में भले ही धर्म का ज़िक्र सीधे तौर पर न किया गया हो, लेकिन उसमें निहित संकेत या अनकहे शब्द अगर दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने वाले हों, तो उसे भी अपराध माना जा सकता है.
केरल हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि संथियों (मंदिर के पुजारी) की नियुक्ति पारंपरिक प्रथा के अनुसार होनी चाहिए और अधीनस्थ क़ानून द्वारा इसे कमज़ोर नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति के लिए पात्र होने हेतु किसी व्यक्ति का किसी विशेष जाति या वंश से संबंधित होना आवश्यक नहीं है.
यूपी और मध्य प्रदेश में दलितों के ख़िलाफ़ अत्याचार की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं, जहां लखनऊ में एक दलित वृद्ध के साथ बदसलूकी हुई तो भिंड में एक व्यक्ति के साथ मातपित कर पेशाब पीने को मजबूर किया गया. राजनीतिक दलों ने इसे लेकर दोनों राज्यों की भाजपा सरकारों पर 'हाशिए पर पड़े समुदायों की गरिमा की रक्षा करने में विफल रहने' का आरोप लगाया है.
कोई तो बताए कि इस तरह अंधेरों को घना करते फिरने को अभिशप्त समाज अपने आम लोगों की दीपावली शुभ होने को लेकर आश्वस्त क्योंकर हो सकता है? खासकर तब, जब उसका सुखासीन हिस्सा अपने सुख व समृद्धि के लिए दूसरों के सारे सुख-चैन छीन लेने में कतई कोई बुराई नहीं देख रहा. इसके चलते गैरबराबरी और उसके जाए उत्पीड़न व शोषण हमारे आकांक्षा व प्रतीक्षा के द्वंद्वों का खात्मा ही नहीं होने दे रहे.