नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में दीपावली के दौरान कार्बाइड गन से सैकड़ों लोगों की आंखों में चोटों की खबरें आईं. इन घटनाओं के बाद भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की 2023 की रिपोर्ट ने ध्यान खींचा है.
द ट्रिब्यून के मुताबिक, इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि कैल्शियम कार्बाइड से जुड़ी आंखों की चोटें युवाओं में गंभीर दृष्टि हानि का कारण बन सकती हैं. इसलिए, ऐसी गनों और उनके कच्चे माल की बिना लाइसेंस बिक्री पर रोक लगाने की सिफारिश की गई थी. लेकिन इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हुए मध्य प्रदेश प्रशासन ने इनकी बिना नियंत्रण बिक्री जारी रहने दी, जिसके चलते अब तक कम से कम 30 लोगों की पूरी तरह से दृष्टि चली गई है.
भारत में कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल आमतौर पर स्थानीय स्तर पर बने पीवीसी की ‘स्केयर’ गनों में होता है, जिन्हें खेतों से जंगली जानवरों को भगाने और पशुओं व फसलों की रक्षा के लिए बनाया जाता है.
सोशल मीडिया पर ऐसे उपकरण खुद बनाने के कई वीडियो भरे पड़े हैं. आमतौर पर ये गन प्लास्टिक पाइप, घरेलू गैस लाइटर और कैल्शियम कार्बाइड से बनाई जाती हैं. इनका आगे का हिस्सा गैस और आग निकालने के लिए खुला रहता है और पीछे का हिस्सा बंद रहता है- वहां चिंगारी पैदा करने का मैकेनिज्म और कार्बाइड व पानी डालने के लिए वाल्व रहता है.
आईसीएमआर के अध्ययन में एक मरीज़ का ज़िक्र है जो घर पर बनी ऐसी गन चलाते समय घायल हुआ था:
एक मरीज़ ने इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो देखकर घर पर गन बनाई. पहले कुछ बार गन ठीक काम करती रही. फिर यह खराब हो गई, जिससे उपयोगकर्ता उसने आगे के खुले बैरल से या पीछे के कार्बाइड लोडिंग वाल्व का दरवाज़ा खोलकर चिंगारी देखने के लिए झांका. दुर्घटनावश बैरल में मौजूद एसीटिलीन गैस एक धमाके के रूप में जल उठी और बचे हुए कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड के छींटे आंखों में पड़ने से आंखें चोटिल हो गईं.
आईसीएमआर के अध्ययन में कहा गया है कि कार्बाइड गन से जुड़ी आंखों की चोटें ज़्यादातर मामलों में लोगों में इसके ख़तरों के प्रति जागरूकता की कमी, गलत तरीके से इस्तेमाल और इन उपकरणों की खराब बनावट के कारण होती हैं.
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि कैल्शियम कार्बाइड गन और उसके कच्चे माल की बिना लाइसेंस वाली बिक्री (कम से कम बच्चों के लिए) रोकी जानी चाहिए और ऐसी खिलौना गनों के निर्माण में सख़्त गुणवत्ता नियंत्रण मानक लागू होने चाहिए.

इस बीच, अखिल भारतीय नेत्र रोग विशेषज्ञ सोसाइटी (एआईओएस) ने शुक्रवार (24 अक्टूबर) को जारी एक बयान में कहा कि कार्बाइड गन ‘रासायनिक बम हैं, पटाखे नहीं’, जिससे जलन, अंधापन और किसी भी तरह की विकृति पैदा हो सकती हैं. उन्होंने इन्हें पूरे देश में तुरंत प्रतिबंधित किए जाने की भी मांग उठाई है.
एसोसिएशन ने कहा कि प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, जिसमें एफआईआर दर्ज करना, बच्चों को इस उपकरण के साथ प्रयोग करने से रोकने के लिए अभियान चलाना और आंखों की चोट के मामलों के इलाज के लिए अस्पतालों को चौबीसों घंटे तैयार रहना शामिल है.
शुक्रवार को ही भोपाल ज़िला प्रशासन ने कार्बाइड गनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश जारी किया.
ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में ख़ास तौर पर बड़ी संख्या में लोग इस गन से घायल हुए हैं. भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने एएनआई को बताया कि गुरुवार तक राजधानी और उसके आसपास 186 मामले दर्ज किए गए. एनडीटीवी ने कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से बताया है कि राज्य में लगभग 300 लोगों को कार्बाइड गन की वजह से आंखों में जलन, जलन या दृष्टि हानि हुई है.
मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश के अनुसार, ‘किसी भी व्यक्ति, संगठन या व्यापारी को ऐसे प्रतिबंधित पटाखे, आतिशबाज़ी सामग्री या गैर-कानूनी रूप से मॉडिफाई किए पटाखे (जैसे- कार्बाइड गन) बनाने, रखने, बेचने या ख़रीदने की अनुमति नहीं होगी. ख़ासकर, जो लोहे, स्टील या पीवीसी पाइप में विस्फोटक भरकर अत्यधिक शोर पैदा करते हैं.
ऐसी ख़बरें भी आई हैं कि बिहार और दिल्ली में भी कार्बाइड गन के इस्तेमाल से लोग घायल हुए हैं.
