बीते 13 मई को मणिपुर के चूड़ाचांदपुर में आयोजित एक कार्यक्रम से वापस कांगपोकपी लौट रहे चर्च नेताओं के वाहनों पर अज्ञात लोगों ने गोलीबारी की गई जिसमें चार लोगों की मौत हो गई. यह घटना मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह के चूड़ाचांदपुर दौरे से ठीक कुछ दिन पहले हुई है.
मणिपुर के कई नगा नागरिक समाज संगठनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए आरोप लगाया कि म्यांमार स्थित कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा के उग्रवादियों ने एसओओ समूहों की सहायता से मणिपुर के उखरुल, कामजोंग और अन्य पहाड़ी जिलों में नगा गांवों पर बार-बार हमले किए हैं.
इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के प्रमुख समाचार.
मणिपुर भाजपा के प्रवक्ता एलांगबम जॉनसन ने कहा कि 3 मई 2023 से, जब राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़की थी, तब से पार्टी लोगों की इच्छाओं के अनुरूप काम करने में नाकाम रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की राज्य इकाई पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में है. राज्य इकाई के पास अनुशासनात्मक मामलों पर फ़ैसले लेने का अधिकार भी नहीं है.
मणिपुर में 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा को तीन वर्ष पूरे हो गए, लेकिन केंद्र सरकार का जांच आयोग अब तक रिपोर्ट नहीं दे सका है. चार बार समयसीमा बढ़ चुकी है. हिंसा में 270 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि राज्य में तनाव अब भी बना हुआ है.
मणिपुर की राजधानी इंफाल के बाबूपाड़ा इलाके में स्थित मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह के बंगले की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. कम से कम 22 लोग घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहीं, कांगपोकपी ज़िले में कुकी संगठन ने उखरुल में संदिग्ध नगा उग्रवादियों के गोलीबारी में मारे गए दो लोगों के विरोध में 10 घंटे के पूर्ण बंद का आह्वान किया था.
हिंसाग्रस्त मणिपुर में यूनाइटेड नगा परिषद द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान कांगपोकपी ज़िले में तांगखुल नगा और कुकी समुदायों के बीच झड़पें हुईं. इस दौरान गोलियां भी चलीं. अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि गोली किसने चलाई. नगा संगठन ने नगा बहुल इलाकों में तीन दिन का बुलाया है.
कांग्रेस ने मणिपुर में में हुई हालिया हत्याओं, जिनमें दो बच्चों की हत्या भी शामिल है, की तत्काल और समयबद्ध जांच की मांग की. मणिपुर से कांग्रेस सांसद ए. बिमोल अकोइजाम ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने शांति बहाल करने और लोगों की जान बचाने की अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है.
मणिपुर में बढ़ती हिंसा के बीच कोकोमी ने भाजपा के बहिष्कार का ऐलान किया है और मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है. वहीं, नगा संगठन ने दो लोगों की हत्या के विरोध में तीन दिन के बंद की घोषणा की है. हालिया घटनाओं में कई लोगों की मौत और कई दर्जन लोगों के घायल होने की खबर है.
मणिपुर के बिष्णुपुर ज़िले में बीते 7 अप्रैल को दो बच्चों की हत्या हुई थी, जिसके विरोध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन जारी है. ताज़ा हिंसा की घटनाओं में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है, लेकिन अभी तक किसी भी मामले में कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
मणिपुर के बिष्णुपुर ज़िले में मंगलवार को बीते 7 अप्रैल को मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में में हुए धमाके, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी, के विरोध में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों के साथ टकराव हुआ, जिसमें पांच महिलाओं सहित लगभग 18 नागरिक घायल हो गए.
मणिपुर सरकार ने जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य के पांच ज़िलों - इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर में मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं, जिसमें वीपीएन एक्सेस भी शामिल है, पर लगी रोक को दो और दिनों के लिए बढ़ा दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को राज्य की जातीय हिंसा से जोड़ने वाले कथित ऑडियो क्लिप्स की प्रमाणिकता स्थापित करने में केंद्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की विफलता पर कड़ी नाराज़गी जताई है. शीर्ष अदालत ने बार-बार हो रही देरी और स्पष्ट निष्कर्षों की कमी पर सवाल उठाए और सुझाव दिया कि सिंह सीधे तौर पर नया वॉयस सैंपल दें.
मणिपुर में दो बच्चों की हत्या के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र सरकार ने कई ज़िलों की इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं. कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है. इस बीच राज्य में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है. फिलहाल स्थिति नियंत्रित है लेकिन हालात तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं. सरकार ने नागरिकों से अफ़वाहों पर ध्यान न देने को कहा है.
बिहार के नालंदा के नूर सराय इलाके में एक महिला के साथ उत्पीड़न का मामला सामने आया है, जिससे जुड़े एक वीडियो में पुरुषों की एक भीड़ को महिला का उत्पीड़न करते हुए जबरन परेड कराते हुए देखा जा सकता है. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया है. वहीं, इस मामले को विपक्ष ने मणिपुर की घटना से जोड़ते राज्य में क़ानून व्यवस्था के खस्ताहाल पर सवाल उठाए हैं.