नौकरियां

(फोटो: रॉयटर्स)

गृह मंत्रालय का एफसीआरए संशोधन के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से इनकार, कहा- राष्ट्रहित में नहीं

आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने दो आवेदन दायर कर इस विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2020 से जुड़े कैबिनेट नोट, पत्राचार और फाइल नोटिंग्स की प्रति मांगी थी. आरोप है कि इस संशोधन क़ानून के चलते कई एनजीओ के काम में बाधा आ रही है.

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट. (फोटो: पीटीआई)

हरियाणा: निजी क्षेत्र की नौकरी में स्थानीय युवकों को 75 फीसदी आरक्षण के ख़िलाफ़ याचिका

हरियाणा सरकार ने इस महीने की शुरुआत में निजी क्षेत्र की नौकरियों में राज्य के युवाओं के लिए 75 फीसदी आरक्षण देने वाले क़ानून को मंज़ूरी दी थी. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि यह क़ानून कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है.

Ranchi: Jharkhand Mukti Morcha (JMM) executive president Hemant Soren addresses a press conference ahead of Jharkhand Assembly Elections, in Ranchi, Sunday, Sept. 15, 2019. (PTI Photo) (PTI9_15_2019_000038B)

हरियाणा के बाद झारखंड में निजी क्षेत्र में स्थानीय युवकों को मिलेगा 75 फीसदी आरक्षण: रिपोर्ट

झारखंड सरकार की रोज़गार नीति के अनुसार, यह आरक्षण 30,000 रुपये प्रति महीने तक के वेतन वाली नौकरियों पर लागू होगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसकी घोषणा आगामी विधानसभा सत्र के दौरान करेंगे. इसके अलावा बेरोज़गारों को एक वर्ष के लिए राज्य सरकार की ओर से पांच हज़ार रुपये प्रति माह भत्ता दिया जाएगा.

मनोहर लाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला. (फोटोः पीटीआई)

हरियाणा: निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय युवकों को 75 फीसदी आरक्षण को राज्यपाल की मंज़ूरी

हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों को रोजगार विधेयक में निजी क्षेत्र की ऐसी नौकरियों में स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया, जिनमें वेतन प्रति माह 50,000 रुपये से कम है. इस विधेयक के प्रावधान निजी कंपनियों, सोसाइटियों, ट्रस्टों और साझेदारी वाली कंपनियों पर भी लागू होंगे.

(फोटो: रॉयटर्स)

खाद्य पदार्थों की क़ीमत में बढ़ोतरी और महामारी से एशिया में कई लोग भुखमरी के शिकार: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की चार एजेंसियों द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी से करीब विश्व में 1.9 अरब लोगों के लिए पौष्टिक भोजन जुटा पाना मुश्किल हो रहा है. नवीनतम अनुमानों के मुताबिक, दुनिया में 68.8 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हैं और इनमें से आधे से ज़्यादा एशिया में हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोविड-19 लॉकडाउन से ऑटोमोबाइल उद्योग को प्रतिदिन 2300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ: संसदीय समिति

वाणिज्य विभाग से जुड़ी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑटोमोबाइल उद्योग संगठनों के अनुसार, इस क्षेत्र में अनुमानित रूप से 3.45 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ. कम मांग और वाहनों की बिक्री में कमी आने के कारण निर्माताओं ने अपना उत्पादन 18-20 फ़ीसदी कम कर दिया है.

मनोहर लाल खट्टर. (फोटो: पीटीआई)

निजी क्षेत्र में स्थानीय युवकों को 75 फ़ीसदी आरक्षण संबंधी विधेयक हरियाणा विधानसभा में पारित

हरियाणा के ‘रोज़गार विधेयक, 2020’ में निजी क्षेत्र की ऐसी नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया, जिनमें वेतन प्रति माह 50,000 रुपये से कम है. इस विधेयक के प्रावधान निजी कंपनियों, सोसाइटियों, ट्रस्टों और साझेदारी वाली कंपनियों पर भी लागू होंगे.

A trader wearing protective hand gloves counts Indian currency notes at a market during a 21-day nationwide lockdown to limit the spreading of coronavirus disease (COVID-19), in Kochi, India, March 27, 2020. REUTERS/Sivaram V

‘एनजीओ को निशाना बनाने के लिए एफसीआरए लाया गया, तो पीएम केयर्स को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं’

कई ग़ैर सरकारी संगठनों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि नए एफसीआरए संशोधनों के कारण उनके काम में बाधा आएगी और कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है. इस विधेयक के प्रावधानों से छोटे एनजीओ के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा.

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एफसीआरए में संशोधन कैसे नौकरियों और एनजीओ को प्रभावित करेगा

वीडियो: बीते 20 सितंबर को विपक्ष ने लोकसभा में पेश किए गए एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक का विरोध यह कहते हुए किया कि सरकार इसके जरिये ‘आलोचकों पर निशाना’ साधना चाह रही है. इस क़ानून और इसके प्रभावों के बारे में बता रहे हैं द वायर के डिप्टी एडिटर गौरव विवेक भटनागर.

Golden Statues at the Trocadero square near the Eiffel tower wear protective masks during the outbreak of the coronavirus disease (COVID-19) in Paris, France, May 2, 2020. REUTERS/Benoit Tessier/File Photo

महामारी से वैश्विक पर्यटन को पांच माह में 320 अरब डॉलर का नुकसान: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि पर्यटन वैश्विक अर्थव्यवस्था का ईंधन है. महामारी की वजह से इस क्षेत्र की आय बुरी तरह प्रभावित हुई है. पर्यटन उद्योग में 12 करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं.

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हम पराधीनता से स्वाधीनता तक पहुंच गए, पर स्वतंत्रता तक पहुंचना अभी बाकी है

पेरियार ने कहा था, ‘हमें यह मानना होगा कि स्वराज तभी संभव है, जब पर्याप्त आत्मसम्मान हो, अन्यथा यह अपने आप में संदिग्ध मसला है.’ भारतीय संविधान की उद्देशिका बताती है कि भारत अब एक संप्रभु और स्वाधीन राष्ट्र है, लेकिन इसे अभी ‘स्वतंत्र’ बनाया जाना बचा हुआ है.

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भारतीय रेलवे का खलासी व्यवस्था ख़त्म करने का ऐलान, नहीं होंगी नई भर्तियां

रेलवे बोर्ड ने एक आदेश में कहा कि औपनिवेशिक काल से चले आ रहे खलासी पदों की समीक्षा के बाद निर्णय लिया गया है कि अब इनकी भर्ती नहीं होगी. साथ ही एक जुलाई 2020 से इन पदों पर की गई नियुक्तियों की भी समीक्षा की जाएगी.

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कोरोना वायरस महामारी में पत्रकारों पर बेकारी-बीमारी का ख़तरा

कोरोना वायरस संबंधित छंटनी अब भारतीय मीडिया उद्योग पर भी दिखने लगी है, कई समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल ऐसे हैं जिनमें मीडियाकर्मियों की नौकरी जा रही हैं. इसी बीच एक निजी चैनल के कर्मचारियों में भी संक्रमण पाया गया है. इसे मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश की राय.

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कोरोना संकट के बीच स्विगी करेगा 1,100 कर्मचारियों की छंटनी

कंपनी का कहना है कि कोरोना वायरस संकट की वजह से उसके व्यवसाय पर नकारात्मक असर पड़ा है, इसलिए वह देशभर के अपने विभिन्न कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या कम कर रहे हैं. इससे पहले जोमैटो ने भी अपने 13 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी और कर्मचारियों की तनख्वाह में कटौती की घोषणा की थी.

Bengaluru: BJP workers wear masks of Prime Minister Narendra Modi as they arrive in support of Bengaluru Central candidate PC Mohan, as he filed his nomination papers ahead of Lok Sabha Election 2019, in Bengaluru, Friday, March 22, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI3_22_2019_000078B)

कोविड-19 के संकट काल में भारत का मध्यम वर्ग कहां है?

मध्यम वर्ग को पता है कि छह साल में उसकी कमाई घटी ही है, बिजनेस में गच्चा ही खाया है. उसके मकानों की कीमत गिर गई है, हर राज्य में सरकार नौकरी की प्रक्रिया की दुर्गति है, वह सब जानता है, लेकिन ये समस्याएं न तो नौजवानों की प्राथमिकता हैं और न ही उनके मध्यमवर्गीय माता-पिता की.