मुसलमान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह. (फोटो: रॉयटर्स)

बंगाल के चुनाव परिणाम ने भाजपा को ‘एक देश, एक संस्कृति’ की सीमा बता दी है

कई सालों से मोदी-शाह की जोड़ी ने चुनाव जीतने की मशीन होने की जो छवि बनाई थी, वह कई हारों के कारण कमज़ोर पड़ रही थी, मगर इस बार की चोट भरने लायक नहीं है. वे एक ऐसे राज्य में लड़खड़ाकर गिरे हैं, जो किसी हिंदीभाषी के मुंह से यह सुनना पसंद नहीं करता कि वे उनके राज्य को कैसे बदलने की योजना रखते हैं.

विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भतीजे अभिषेक की बेटी के साथ ममता बनर्जी. (फोटो: पीटीआई)

बंगाल परिणाम: टीएमसी की जीत नहीं, उन दो नेताओं की हार महत्त्वपूर्ण है

बंगाल के समाज के सामूहिक विवेक ने भी उस ख़तरे को पहचाना, जिसका नाम भाजपा है. तृणमूल कांग्रेस की यह जीत इसलिए बंगाल में छिछोरेपन, लफंगेपन, गुंडागर्दी, उग्र और हिंसक बहुसंख्यकवाद की हार भी है.

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बंगाल चुनाव: हिंदू-मुसलमान को बांटने के लिए भाजपा ने उठाया मुस्लिम तुष्टिकरण का मुद्दा

वीडियो: ध्रुवीकरण की राजनीति को लेकर क्या कहते हैं पश्चिम बंगाल के मुस्लिम समुदाय के लोग? खिदिरपुर इलाके में रहने वाले इस समुदाय के लोगों से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

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दिल्ली दंगे के साल भर बाद प्रभावित शिव विहार का हाल

वीडियो: एक साल पहले सांप्रदायिक दंगों में उत्तर पूर्वी दिल्ली में जान-माल का काफ़ी नुकसान हुआ था. तब द वायर ने शिव विहार के प्रभावित लोगों से इस विषय पर बात की थी. एक साल बाद उन्हीं लोगों से दोबारा बातचीत कर उनका हाल जाना गया.

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दिल्ली दंगों का एक साल: ख़ौफ़ में जीने को मजबूर शिव विहार के मुसलमान

वीडियो: दिल्ली दंगों के एक साल बाद भी लोग ख़ौफ़ में जी रहे हैं. दंगों में हुए जान-माल के नुकसान की भरपाई हो पाना असंभव है. द वायर ने शिव विहार के लोगों से बातकर उनकी समस्या को जाना.

उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक/@umar.khalid.984)

जो जनता आज उमर को आतंकवादी कह रही है, वो उसी के लिए काम करना चाहता था…

दिल्ली पुलिस ने लिखा है कि उमर ख़ालिद सेकुलरिज्म का चोला ओढ़कर चरमपंथ को बढ़ावा देता है. आपको भी यही लगता है तो कम से कम यह मांग तो कर ही सकते हैं कि दिल्ली पुलिस के अफसरों को फिल्म निर्देशक बन जाना चाहिए क्योंकि वे लोगों के अंदर छिपे अभिनेता को पहचान लेते हैं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

तबलीग़ी जमात: दिल्ली की अदालत ने 36 विदेशियों को सभी आरोपों से बरी किया

दिल्ली पुलिस ने तबलीग़ी जमात के सदस्यों के ख़िलाफ़ वीज़ा शर्तों के उल्लंघन, धार्मिक प्रचार गतिविधियों में शामिल होने समेत कई आरोपों को लेकर चार्जशीट दायर की थी. हालांकि कोर्ट ने ठोस सबूत नहीं मिलने पर सभी को बरी कर दिया.

योगी आदित्यनाथ. (फोटोः पीटीआई)

मुग़लों को निशाना बनाकर आदित्यनाथ अपने ही नाथ संप्रदाय के इतिहास को मिटा रहे हैं

पूरे मुग़ल शासन के दौरान गोरखपुर समेत विभिन्न नाथों को शासकों द्वारा तोहफे और अनुदान प्राप्त हुए हैं. आधिकारिक मंदिर साहित्य भी इस बात की पुष्टि करता है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

स्त्री रक्षा करो, गोरक्षा हो जाएगी

लड़कियों को बिना दिमाग का और भावुक फिसलन की शिकार माना जाता है और इसलिए उन पर निगाह और लगाम रखने की ज़रूरत है. लड़कियां ज़िंदा बम है और उनको फटने से बचाना सबसे बड़ा धार्मिक कर्तव्य. लगता है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष इसी कर्तव्य निर्वाह के पवित्र अभियान पर निकल पड़ी हैं.

उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक/@umar.khalid.984)

उमर ख़ालिद ‘आतंकवादी’ है कि नहीं?

जो लोग ये कहते हैं कि अगर निर्दोष होगा तो अपने आप बाहर आ जाएगा, उनको मैं कह दूं, क्यों न आपको साल भर के लिए जेल में बंद कर दिया जाए? क्यों न देश के हर नागरिक को 18 साल का होते ही साल भर के लिए जेल में बंद कर दिया जाए. हम सब निर्दोष हैं, बाहर आ ही जाएंगे

स्वामी अग्निवेश. (फोटो साभार: फेसबुक/@swamiagnivesh)

स्वामी अग्निवेश: आधुनिक आध्यात्मिकता का खोजी

स्वामी अग्निवेश गांधी की परंपरा के हिंदू थे, जो मुसलमान, सिख, ईसाई या आदिवासी को अपने रंग में ढालना नहीं चाहता और उनके लिए अपना खून बहाने को तत्पर खड़ा मिलता है. वे मुसलमानों और ईसाइयों के सच्चे मित्र थे और इसीलिए खरे हिंदू थे.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

काशी-मथुरा के मंदिरों को ‘मुक्त’ कराने की दक्षिणपंथी समूहों की मांग पर संघ ने कहा- हम ज़ोर नहीं देंगे

हिंदू संतों के एक संगठन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इस हफ़्ते की शुरुआत में कहा कि वे राम जन्मभूमि आंदोलन की तर्ज पर वाराणसी और मथुरा के ‘हिंदू मंदिरों को मुक्त’ कराने के लिए अभियान शुरू करेंगे. इसके बाद आरएसएस ने कहा कि इसके लिए ज़ोर नहीं देगा.

Ayodhya Janmsthan Temple Story

अयोध्या: नये राम मंदिर के लिए ढहाया गया तीन सौ साल पुराना ऐतिहासिक राम जन्मस्थान मंदिर

300 साल पुराना जन्मस्थान मंदिर 1980 के दशक में शुरू हुए रामजन्मभूमि आंदोलन के पहले राम के जन्म से जुड़ा था और एक मुस्लिम ज़मींदार द्वारा दान दी गई ज़मीन पर बनाया गया था. यह राम की सह-अस्तित्व वाली उस अयोध्या का प्रतीक था, जिसका नामो-निशान अब नज़र नहीं आता.

(फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन)

कुठांव: मुस्लिम समाज में जातिवाद को उघाड़ता उपन्यास

अब्दुल बिस्मिल्लाह ने मुस्लिम समाज में मौजूद जातिवाद को कुठांव यानी मर्मस्थल की मानिंद माना है. उनके अनुसार यह एक ऐसा नाज़ुक विषय है अमूमन जिसका अस्तित्व ही अवास्तविक माना जाता है और जिसके बारे में बात करना पूरे मुस्लिम समाज के लिए एक पीड़ादायक विषय है.