छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुसार, बीजापुर ज़िले में दो वरिष्ठ माओवादी नेता, भास्कर उर्फ मायलारपू अडेलु और नरसिम्हा चलम उर्फ सुधाकर बीते दो दिनों में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ों में मारे गए. वहीं नागरिक संगठनों का कहना है कि उन्हें कथित रूप से फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार गिराया गया.
माओवादियों के महा सचिव बसवराजू समेत आठ नक्सलियों के शवों का अंतिम संस्कार सोमवार (26 मई) को नारायणपुर में पुलिस और प्रशासन की निगरानी में किया गया. अंतिम संस्कार की पुष्टि नारायणपुर पुलिस द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में की गई है. इससे पहले स्थानीय लोगों का कहना था कि पुलिस परिजनों पर नारायणपुर में ही अंतिम संस्कार करने का दबाव बना रही थी.
पुलिस को आशंका है कि यदि शव परिजनों को सौंपा गया और अंतिम संस्कार सार्वजनिक रूप से हुआ, तो यह बसवराजू को माओवादी ‘नायक’ के तौर पर महिमामंडित कर सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस इन शवों का अंतिम संस्कार नारायणपुर में करने की तैयारी कर रही है और परिजनों पर दबाव बना रही है कि वे इसके बाद अस्थियों को अपने साथ ले जाएं.
नारायणपुर के अबूझमाड़ के जंगलों में हाल ही में हुए एनकाउंटर में सीपीआई (माओवादी) के जनरल सेक्रेटरी नमबाला केशव राव उर्फ बसवराजू मारे गए. बस्तर रेंज के आईजी ने कहा है कि बसवराजू पिछले 40-45 सालों से माओवादी आंदोलन का हिस्सा थे और 200 से ज़्यादा नक्सली हमलों में शामिल थे. सरकार और सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, पर क्या इसे नक्सलवाद का अंत मान सकते हैं? द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष
वामपंथी दलों और नागरिक कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में हुई उस मुठभेड़ की निंदा की है, जिसमें 27 माओवादी मारे गए. उन्होंने नक्सलियों के ख़िलाफ़ 'ऑपरेशन कगार' की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की.
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर चल रहा नक्सल विरोधी अभियान समाप्त हो चुका है. अधिकारियों का दावा है कि इस ऑपरेशन में उन्हें उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली. लेकिन यह अभियान कई प्रश्न पीछे छोड़ गया है.
भाजपा नक्सलवाद को मिटाने का श्रेय लेना चाहती है, जैसे उसने अनुच्छेद 370 हटाने या राम मंदिर निर्माण को अपनी बड़ी ‘उपलब्धियों’ में गिनाया है. लेकिन माओवादियों के साथ बातचीत के ज़रिये शांति की स्थापना भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती थी.
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर चलाए जा रहे माओवादी विरोधी अभियान में बुधवार को सुरक्षा बलों ने कम से कम 15 माओवादियों को मारने का दावा किया है. तेलंगाना की सीमा से लगे पुजारी कांकेर क्षेत्र की कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में बीते 21 अप्रैल से सुरक्षाबलों का अभियान जारी है.
छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों का नक्सल विरोधी अभियान: नागरिक संगठनों की युद्धविराम की अपील, पीएम को लिखा
छत्तीसगढ़-तेलंगाना की सीमा पर कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में जारी नक्सल विरोधी अभियान के बीच नागरिक संगठनों ने फिर शांति वार्ता और युद्धविराम की अपील की है. उन्होंने झारखंड पुलिस प्रमुख के ‘15-20 दिनों में माओवादी सफाया’ जैसे बयान को संविधान विरोधी बताते हुए नागरिकों के खिलाफ हिंसा क़रार दिया.
छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले के पुजारी कांकेर क्षेत्र की कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में पिछले कई दिनों से जारी सुरक्षाबलों के अभियान के बीच माओवादियों ने एक बार फिर से शांति वार्ता की पहल की है. माओवादियों ने सरकार से हिंसा को एक महीने के लिए स्थगित करने की अपील की है.
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर करेगुट्टा पहाड़ियों में माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच बड़ी मुठभेड़ चल रही है. अब तक तीन नक्सलियों के मारे जाने की ख़बर आ रही है. कहा जा रहा है कि इस पहाड़ी पर शीर्ष माओवादी उपस्थित हैं.
31 मार्च को दक्षिण छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में पुलिस फायरिंग में गुमुडावेल्ली रेणुका की मौत हो गई. दंतेवाड़ा पुलिस ने इसे 'एनकाउंटर' बताया है, हालांकि इस इलाके में ऐसे दावों की सत्यता संदिग्ध ही रही है.
माओवादियों और राज्य के इस खेल में पड़े बिना हमें सरकार से सशस्त्र कार्रवाई बंद करने की मांग करनी चाहिए. माओवादियों को घोषणा करनी चाहिए कि वे हिंसा रोक रहे हैं. राज्य के लिए बस्तर सिर्फ़ संसाधनों का भंडार है. माओवादियों के लिए यह सिर्फ़ एक आधार है जहां से वे अपनी 'क्रांति' का विस्तार करेंगे. लेकिन बस्तर वास्तव में वहां रहने वाले लोग मिलकर बनाते हैं. वे आदिवासी ही प्राथमिक हैं. न राज्य, न माओवादी.
बीते दिनों नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी ने कहा है कि अगर सरकार नक्सलियों के ख़िलाफ़ चल रहे अभियानों को रोक देती है, तो वे बिना शर्त शांति वार्ता के लिए तैयार हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार के युद्ध, उसके सामाजिक नुकसान पर द वायर के पॉलिटिकल एडिटर अजॉय आशीर्वाद से चर्चा कर रहे हैं द वायर हिंदी के संपादक आशुतोष भारद्वाज.
छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने सुकमा ज़िले में 12 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें आदिवासी नेता व पूर्व विधायक मनीष कुंजाम का घर भी शामिल है. कहा जा रहा है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने करोड़ों रुपये के तेंदूपत्ता बोनस वितरण में अनियमितताओं की जांच की मांग की थी.