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Ranchi: Chief Election Commissioner Sunil Arora after a review meeting with Jharkhand police officers and deputy commissioners to review the preparations for the upcoming Lok Sabha elections, in Ranchi, Wednesday, Jan. 30, 2019. (PTI Photo)(PTI1_30_2019_000125B)

पूर्व सीईसी सुनील अरोड़ा ने 2019 लोकसभा चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधा

60 से अधिक सेवानिवृत्त नौकरशाहों द्वारा साल 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर लिखे गए एक पत्र में कहा गया था कि यह बीते तीन दशकों में सबसे कम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव था. उस समय सुनील अरोड़ा तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त थे. इस पत्र में 2019 लोकसभा चुनाव के आयोजन में गंभीर विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था.

पीएमओ बैठक विवाद: क़ानून मंत्रालय ने कहा, वह पत्र सचिव या सीईसी के प्रतिनिधि के लिए था

चुनाव आयोग को बीते 15 नवंबर को कानून मंत्रालय की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा मतदाता सूची को लेकर एक बैठक लेने वाले हैं और चाहते हैं कि इसमें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ मौजूद रहें. इस ‘असामान्य’ पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, क्योंकि चुनाव आयोग आमतौर पर अपने कामकाज की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सरकार से दूरी बनाए रखता है.

केंद्र से बैठक में शामिल होने का पत्र मिलने पर चुनाव आयुक्त ने पीएमओ से बातचीत की थीः रिपोर्ट

चुनाव आयोग को बीते 15 नवंबर को कानून मंत्रालय की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा एकल मतदाता सूची को लेकर एक बैठक लेने वाले हैं और चाहते हैं कि इसमें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ मौजूद रहें. यह पत्र बहुत ही असामान्य था, क्योंकि चुनाव आयोग आमतौर पर अपने कामकाज की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सरकार से दूरी बनाए रखता है.

पीएमओ की बैठक में चुनाव आयुक्तों को बुलाने वाले पत्र पर पूर्व सीईसी ने कहा- यह उचित नहीं

बीते 15 नवंबर को चुनाव आयोग को क़ानून मंत्रालय का एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा एकल मतदाता सूची को लेकर एक बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं और चाहते हैं कि इसमें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ मौजूद रहें. इस पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग अपने कामकाज की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सरकार से दूरी बनाए रखता है.

पीएमओ के चुनाव सुधारों पर चुनावों आयुक्तों के साथ बातचीत पर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा

चुनाव आयोग को बीते 15 नवंबर को क़ानून मंत्रालय की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा एकल मतदाता सूची को लेकर एक बैठक लेने वाले हैं और चाहते हैं कि इसमें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ मौजूद रहें. यह पत्र बहुत ही असामान्य था, क्योंकि चुनाव आयोग आमतौर पर अपने कामकाज की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सरकार से दूरी बनाए रखता है.

मोदी के आचार संहिता उल्लंघन पर आपत्ति जताने के बाद सर्विलांस सूची में आए थे अशोक लवासा

पेगासस प्रोजेक्ट: पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के फोन की फॉरेंसिक जांच के बिना यह बता पाना संभव नहीं है कि इसमें सफलतापूर्वक पेगासस स्पायवेयर डाला गया या नहीं, हालांकि निगरानी सूची में उनके नंबर का होना यह दर्शाता है कि उनके फोन में सेंध लगाने की योजना बनाई गई थी.

पश्चिम बंगाल सहित चार राज्यों, एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख़ का ऐलान

चुनाव आयोग ने इस साल पश्चिम बंगाल की 294 सीटों, तमिलनाडु की 234 सीटों, केरल की 140 सीटों, असम की 126 सीटों और केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी की 30 सीटों पर विधानसभा चुनाव का ऐलान किया है. बंगाल में आठ चरणों, असम में तीन जबकि केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में एक चरण में चुनाव होंगे. मतगणना दो मई को होगी.

‘एक देश, एक चुनाव’ के लिए एक मतदाता सूची तैयार करने पर पीएमओ ने की बैठक

बीते 13 अगस्त को प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक मतदाता सूची तैयार करने को लेकर दो विकल्पों पर चर्चा हुई. मुख्य सचिव ने कैबिनेट सचिव को राज्यों से परामर्श करने और एक महीने में अगले क़दम का सुझाव देने के लिए कहा है.

‘एक देश, एक चुनाव’ पर राजनीतिक दलों के बीच सर्वसम्मति की जरूरत: मुख्य चुनाव आयुक्त

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ तब तक नहीं हो सकता, जब तक कि राजनीतिक दल साथ बैठ कर सर्वसम्मति पर नहीं पहुंच जाते हैं और कानून में जरूरी संशोधन नहीं लाया जाता है.

New Delhi: Chief Election Commissioner Sunil Arora addresses the concluding session of the Training workshop on ICT Application for General Elections 2019, in New Delhi, Friday, Feb 8, 2019. (PIB Photo via PTI) (PTI2_8_2019_000236B)

नरेंद्र मोदी और अमित शाह को तथ्यों के आधार पर क्लीनचिट दी गई: मुख्य चुनाव आयुक्त

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष के भाषणों से जुड़ीं शिकायतों पर चुनाव आयोग द्वारा उन्हें दी गई सिलसिलेवार क्लीनचिट पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने असहमति जताई थी.

Ranchi: Chief Election Commissioner Sunil Arora after a review meeting with Jharkhand police officers and deputy commissioners to review the preparations for the upcoming Lok Sabha elections, in Ranchi, Wednesday, Jan. 30, 2019. (PTI Photo)(PTI1_30_2019_000125B)

धन के दुरुपयोग के चलते बेदाग चुनाव कराना एक चुनौती: मुख्य चुनाव आयुक्त

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि साफ-सुथरा चुनाव कराना हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है, खासकर तब जब धन का उपयोग मतदाताओं को लुभाने के लिए किया जा रहा हो.

ईवीएम संचालन के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण चुनाव आयोग की बड़ी चुनौती: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एचएस ब्रह्मा ने ईवीएम की विश्वसनीयता को संदेह से परे बताते हुए इसके संचालन से जुड़े कर्मचारियों के माकूल प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बरकरार रखने की आयोग को नसीहत दी है.

हम बैलट पेपर के दौर में नहीं लौटने वाले: मुख्य चुनाव आयुक्त

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा ईवीएम की आलोचना से हम परेशान होने वाले नहीं. चुनाव आयोग ईवीएम और वीवीपीएटी का इस्तेमाल जारी रखेगा.

ईवीएम की विश्वसनीयता के सवाल पर चुनाव आयुक्त ने कहा, इसे फुटबॉल बना दिया गया है

किसी दल विशेष के पक्ष में चुनाव परिणाम नहीं आने पर इसका ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने की प्रवृत्ति के बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने दलील दी कि ईवीएम महज़ एक मशीन है. इसमें ख़ास प्रोग्रामिंग कर विशेष परिणाम हासिल करने की संभावना को मैं पूरी तरह से नकार सकता हूं.