क्या अब जैसा मोदी सरकार चाहेगी वैसा होगा चुनाव आयोग?

वीडियो: शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा ने बीते 12 दिसंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक 2023 पारित कर दिया. इसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के लिए नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यालय को विनियमित करना है. साथ ही आयोग के कामकाज की प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करना है.

चुनाव आयुक्त विधेयक पर सवाल: ‘अंपायर को टीम के कैप्टन के मातहत नहीं रखा जा सकता’

केंद्र के नए चुनाव आयुक्त विधेयक के बारे में क़ानून के जानकारों का कहना है कि इसका सबसे चिंताजनक पहलू चुनाव आयुक्तों के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त का दर्जा सुप्रीम कोर्ट के जजों के बराबर से घटाकर कैबिनेट सचिव के बराबर करना है क्योंकि सचिव स्पष्ट रूप से सरकार के अधीन होकर काम करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट पीठ ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति के ख़िलाफ़ याचिका से ख़ुद को अलग किया

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त के रूप में अरुण गोयल की नियुक्ति मनमाना और संस्थागत अखंडता और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का उल्लंघन है. गोयल को 19 नवंबर 2022 को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था.

कांग्रेस सांसद की मांग- चुनाव आयुक्त के चयन के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में समिति गठित हो

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संसद में एक निजी विधेयक पेश किया है, जिसमें चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और स्वायत्तता को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति का गठन हो, जिसमें नेता विपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हों.

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए समिति गठित करने संबंधी विधेयक राज्यसभा में पेश

माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता, तटस्थता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत के संविधान में संशोधन को लेकर एक निजी विधेयक पेश किया. संविधान (संशोधन) विधेयक-2022 में भारतीय चुनाव आयोग का एक स्थायी स्वतंत्र सचिवालय स्थापित करने की भी बात कही गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति में हुई ‘जल्दबाज़ी’ पर सवाल उठाए

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी व्यवस्था बनाने का अनुरोध करने वाली याचिकाएं सुन रही है. कोर्ट ने हाल ही में हुई निवार्चन आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति को लेकर कहा कि इसमें ‘बहुत तेज़ी’ दिखाई गई और उनकी फाइल 24 घंटे भी विभागों के पास नहीं रही.

सीईसी नियुक्ति: कोर्ट की टिप्पणी के समर्थन में विपक्ष, कहा- केंद्र ने चुनाव आयोग को कमज़ोर किया

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियों के लिए कॉलेजियम जैसा तंत्र बनाने की मांग की गई है. पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि यह मांग पिछले दो दशकों से उठाई जा रही है लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया.

चुनाव आयोग को सरकार की ‘हां में हां मिलाने वाला’ नहीं होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी याचिका की सुनवाई में केंद्र से पूछा कि अगर कोई चुनाव आयुक्त शिकायत के बावजूद प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई न करे... तो क्या यह व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने की स्थिति नहीं होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति से जुड़ी फाइल पेश करने को कहा

निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी याचिका सुन रही जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अटॉर्नी जनरल से चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति संबंधी फाइल मांगते हुए कहा कि अदालत देखना चाहती है कि नियुक्तियों में किस तंत्र का पालन किया जा रहा है.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ग़ैर-राजनीतिक और प्रभावित न होने वाला शख़्स होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी याचिका सुन रही है. इसमें कहा गया है कि वर्तमान में निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियां कार्यपालिका की मर्ज़ी से की जा रही हैं.

पूर्व सीईसी सुनील अरोड़ा ने 2019 लोकसभा चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधा

60 से अधिक सेवानिवृत्त नौकरशाहों द्वारा साल 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर लिखे गए एक पत्र में कहा गया था कि यह बीते तीन दशकों में सबसे कम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव था. उस समय सुनील अरोड़ा तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त थे. इस पत्र में 2019 लोकसभा चुनाव के आयोजन में गंभीर विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था.

पीएमओ बैठक विवाद: क़ानून मंत्रालय ने कहा, वह पत्र सचिव या सीईसी के प्रतिनिधि के लिए था

चुनाव आयोग को बीते 15 नवंबर को कानून मंत्रालय की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा मतदाता सूची को लेकर एक बैठक लेने वाले हैं और चाहते हैं कि इसमें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ मौजूद रहें. इस ‘असामान्य’ पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, क्योंकि चुनाव आयोग आमतौर पर अपने कामकाज की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सरकार से दूरी बनाए रखता है.

केंद्र से बैठक में शामिल होने का पत्र मिलने पर चुनाव आयुक्त ने पीएमओ से बातचीत की थीः रिपोर्ट

चुनाव आयोग को बीते 15 नवंबर को कानून मंत्रालय की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा एकल मतदाता सूची को लेकर एक बैठक लेने वाले हैं और चाहते हैं कि इसमें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ मौजूद रहें. यह पत्र बहुत ही असामान्य था, क्योंकि चुनाव आयोग आमतौर पर अपने कामकाज की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सरकार से दूरी बनाए रखता है.

पीएमओ की बैठक में चुनाव आयुक्तों को बुलाने वाले पत्र पर पूर्व सीईसी ने कहा- यह उचित नहीं

बीते 15 नवंबर को चुनाव आयोग को क़ानून मंत्रालय का एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा एकल मतदाता सूची को लेकर एक बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं और चाहते हैं कि इसमें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ मौजूद रहें. इस पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग अपने कामकाज की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सरकार से दूरी बनाए रखता है.

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