Chandra Shekhar Azad

चंद्रशेखर आज़ाद. (फोटो साभार: www.hindgrapha.com)

आज़ाद के शहीद हो जाने के बाद भी उनकी मां को उनके लौट आने का विश्वास था

चंद्रशेखर आज़ाद की मां ने मन्नत मानकर दो उंगलियों में धागा बांध रखा था. कहती थीं कि आज़ाद के आने के बाद ही धागा खोलेंगी.

New Delhi: Family members of the people arrested for violence during a rally against the Citizenship Amendment Act (CAA), last evening, wait for their release outside Daryaganj police station, in New Delhi, Saturday, Dec. 21, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist)  (PTI12_21_2019_000012B)

अदालत का दिल्ली पुलिस को निर्देश, दरियागंज में हिरासत में लिए गए लोगों से वकीलों को मिलने दें

अदालत के आदेश के बाद हिरासत में लिए गए आठ नाबालिगों को शनिवार सुबह रिहा किया गया. दरियागंज में शुक्रवार को नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हुए हिंसक प्रदर्शन के संबंध में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर समेत अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जामिया मिलिया इस्लामिया के बाहर हुआ प्रदर्शन.

Saharanpur: Bhim Army chief Chandrashekhar Azad being released from Saharanpur Jail, in Saharanpur, Friday, Sept 14, 2018. Azad was arrested from Himachal Pradesh's Dalhousie in June last year in connection with the May 5 caste violence in which one person was killed and 16 others were injured at Shabbirpur village in Saharanpur. (PTI Photo) (PTI9_14_2018_000121B)

‘योगी सरकार चंद्रशेखर पर रासुका लगाने के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में न्यायोचित नहीं ठहरा पाती’

वीडियो: भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद की रिहाई पर उनके वकील श्रीजी भावसार से द वायर के अजय आशीर्वाद की बातचीत.

Chandrashekhar Bhim Army ANI

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद जेल से हुए रिहा

लगभग 16 महीने से सहारनपुर जेल में बंद चंद्रशेखर को 1 नवंबर 2018 को रिहा किया जाना था. निकलकर कहा, 2019 में भाजपा को सत्ता से बाहर करेंगे.

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर. (फोटो: फेसबुक)

चंद्रशेखर पर रासुका की अवधि तीन महीने और बढ़ाई गई

भीम आर्मी डिफेंस कमेटी के संयोजक प्रदीप नरवाल ने कहा कि चंद्रशेखर की जगह अगर आज बाबा साहेब आंबेडकर होते तो भाजपा सरकार उन पर भी रासुका लगा देती.

शहीद अशफ़ाक उल्ला खां, रामप्रसाद बिस्मिल और रौशन सिंह. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

वतन पे मरने वालों के परिवारों का क्या यही बाक़ी निशां होगा?

अशफ़ाक़ उल्ला ख़ां, रामप्रसाद बिस्मिल और रौशन सिंह के शहादत दिवस (19 दिसंबर) पर उनकी मांओं और परिवार के दुर्दशा की कहानी.